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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Feb 18, 2024 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

Mahoba: श्री गुमान बिहारी जू मंदिर बनेगा पर्यटन स्थल, बिहारी सागर का होगा कायाकल्प; मंदिर निर्माण के पीछे है अनोखी कहानी

Updated: Sun, 18 Feb 2024 02:15 PM (IST)

हर विधानसभा क्षेत्र में एक पर्यटन स्थल तैयार करने की सरकार की ओर से हुई घोषणा के तहत चरखारी कस्बा के श्री गुमान बिहारी मंदिर को पर्यटन स्थल बनाया जाना ...और पढ़ें

86 लाख की लागत से गुमान बिहारी मंदिर का होगा सुंदरीकरण
86 लाख की लागत से गुमान बिहारी मंदिर का होगा सुंदरीकरण

HighLights

  1. 86 लाख की लागत से गुमान बिहारी मंदिर का होगा सुंदरीकरण
  2. श्रद्धालुओं के ठहरने का बनेगा स्थल
  3. महारानी के जिद पर हुआ था इस मंदिर का निर्माण

जागरण संवाददाता, महोबा। हर विधानसभा क्षेत्र में एक पर्यटन स्थल तैयार करने की सरकार की ओर से हुई घोषणा के तहत चरखारी कस्बा के श्री गुमान बिहारी मंदिर को पर्यटन स्थल बनाया जाना है। मंदिर और परिसर का सुंदरीकरण कराने के साथ बिहारी सागर का भी कायाकल्प होगा। रंगबिरंगी लाइटिंग की व्यवस्था होगी। दीपावली पर इस मंदिर परिसर में एक माह तक विशाल मेला सजता है। 2017 में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी यहां आ चुके हैं।

इतै भीर भई भारी, वृंदावन भई चरखारी, ये गीत बुंदेलखंड में खासा प्रचलित है और इसके बोल सच भी हैं। बुंदेलखंड के चरखारी में भी एक छोटा वृंदावन है, जिसे महारानी की जिद के आगे हारकर महाराज मलखान सिंह ने सजाया संवारा था।

जन्माष्टमी पर होती है भव्य सजावट

महारानी गुमान कुंवर के नाम पर चरखारी में गुमान बिहारी जू का मंदिर है। महारानी की इच्छा पूरी करने के लिए महाराजा मलखान सिंह ने सरोवर के किनारे मंदिर की स्थापना कराई थी। जन्माष्टमी पर भव्य सजावट होती है और दीपावली की परेवा को विशेष गोवर्धन पूजा होती है।

बताया जाता है कि यहां की महारानी गुमान कुंवर भगवान श्रीकृष्ण के दर्शन करने वृंदावन गईं थीं और वहां की भव्यता देखकर मंत्रमुग्ध हो गईं थी। उन्होंने महाराजा को संदेश भेजकर कहा था कि अपने नगर में भी कान्हा जी का ऐसा ही सुंदर मंदिर होना चाहिए और शर्त रख दी थी कि जबतक वह हां नहीं करेंगे तब तक नहीं लौटेंगी और वृंदावन में बस जाएंगी।

मंदिर और परिसर को पर्यटन स्थल के तौर पर किया जा रहा तैयार

महारानी की जिद के सामने महाराज मलखान सिंह हार गए थे और उनकी शर्त मानकर वापस बुलवाया था। इसके बाद चरखारी को वृंदावन के रूप में बसाने का फैसला किया। आसपास कोई नदी न होने पर उन्होंने करीब 1883 में रायनपुर क्षेत्र में सरोवर के किनारे गुमान बिहारी जू के नाम से मंदिर की स्थापना कराई। सरोवर को गुमान सरोवर का नाम दिया। अब मंदिर और परिसर को पर्यटन स्थल के तौर पर तैयार कराया जाएगा।

रायनपुर स्थिति गुमान बिहारी मंदिर के सुंदरीकरण का काम पर्यटन विभाग की ओर से कराया जाना है। इसका विधायक बृजभूषण राजपूत की ओर से भूमि पूजन भी हो चुका है। कराए जाने वाले कार्यों के लिए 86 लाख 25 हजार रुपये स्वीकृत हुए हैं। इसमें श्रद्धालुओं के लिए रुकने का स्थान, बिहारी सागर के घाटों का निर्माण, लाइटिंग व अन्य कार्य होंगे। इसके लिए 69 लाख की किश्त भी अवमुक्त हो चुकी है।

पर्यटन अधिकारी चित्रगुप्त ने कहा कि जिले के गोरखगिरि का सुंदरीकरण हो रहा है, अब चरखारी के गुमान बिहारी मंदिर व बिहारी सागर का भी सुंदरीकरण का काम होना है।

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