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    ठाकुर बांकेबिहारी मंदिर में धक्का मुक्की से बचेंगे श्रद्धालु, रेलिंग लगाने का काम हो गया शुरू

    By Ravi Prakash Edited By: Prateek Gupta
    Updated: Wed, 04 Feb 2026 07:10 PM (IST)

    वृंदावन के ठाकुर बांकेबिहारी मंदिर में श्रद्धालुओं की सुविधा और भीड़ नियंत्रण के लिए स्टील की रेलिंग लगाने का काम शुरू हो गया है। मेरठ की कनिका कंस्ट् ...और पढ़ें

    बांकेबिहारी मंदिर के अंदर लगाई गई रेलिंग।

    बांकेबिहारी मंदिर के अंदर लगाई गई रेलिंग।

    संवाद सहयोगी, जागरण, वृंदावन। ठाकुर बांकेबिहारी मंदिर में श्रद्धालुओं की सुविधा व सुरक्षा के साथ भीड़ नियंत्रण के उद्देश्य से उच्चाधिकार प्राप्त प्रबंधन समिति के आदेश पर मेरठ की कनिका कंस्ट्रक्शन कंपनी द्वारा तैयार स्टील की रेलिंग को लगाने का काम बुधवार को शुरू हो गया।

    मंदिर में गेट संख्या चार व पांच के मध्य रेलिग लगाने का काम शुरू कर दिया है। जब ये रेलिंग पूरे मंदिर परिसर में लगा दी जाएंगी। ताकि श्रद्धालुओं को मंदिर के प्रवेशद्वार से निकास द्वार तक रेलिंग में होकर ही गुजारा जाएगा। रेलिग में से गुजरते हुए श्रद्धालु आराध्य बांकेबिहारीजी के दर्शन कर सकेंगे।

    ऐसे में मंदिर प्रांगण में श्रद्धालुओं का ठहराव खत्म होगा, तो मंदिर के बाहर श्रद्धालुओं की भीड़ को इंतजार नहीं करना पड़ेगा। ठाकुर बांकेबिहारी मंदिर में बुधवार की सुबह जब मंदिर के पट खुले तो मंदिर के प्रवेशद्वार संख्या चार व पांच के बीच स्टील की रेलिंग लगी हुई थीं।

    ठाकुर बांकेबिहारी मंदिर उच्चाधिकार प्राप्त प्रबंधन समिति के आदेश पर मेरठ की कनिका कंस्ट्रक्शन ने ये स्टील की रेलिंग तैयार की हैं। मंदिर में एक महीने पहले भी इसी जगह पर रेलिंग लगाकर ट्रायल किया गया।

    लेकिन, जो तकनीकी खामी उस दौरान सामने आईं अब उन खामियों को खत्म करने के बाद कंपनी ने एकबार फिर से मंदिर में स्टील की रेलिंग लगाना शुरू कर दिया है। इस बार मंदिर प्रांगण में एक दो दिन के अंदर पूरी तरह रेलिंग लग जाएंगी।

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    श्रद्धालु इन रेलिंग में होकर ही मंदिर में प्रवेश करेंगे और रेलिंग से गुजरते हुए ही आराध्य बांकेबिहारी के दर्शन कर बाहर निकलेंगे। मंदिर उच्चाधिकार प्राप्त प्रबंधन समिति के सदस्य दिनेश गोस्वामी ने कहा मंदिर में अब एंट्री गेट से निकार द्वार तक स्टील की रेलिंग लगाने का काम शुरू हो गया है।

    काम पूरा होने पर श्रद्धालु प्रवेश द्वार से रेलिंग में प्रवेश करेंगे और ठाकुरजी के दर्शन करते हुए निकास द्वार बाहर निकलेंगें। ऐसे में मंदिर प्रांगण में श्रद्धालुओं का ठहराव खत्म होगा और भीड़ नियंत्रण में सहायता मिलेगी।