बांकेबिहारी मंदिर में चढ़ावा चोरी रोकने को ऑनलाइन दान पर जोर, राम मंदिर के बाद सतर्कता बढ़ी
मंदिर में क्यूआर कोड पहले से लगे हैं और अब श्रद्धालुओं को ऑनलाइन दान के लिए प्रेरित किया जा रहा है, जिससे कुल दान का करीब 20% ऑनलाइन हो रहा है। ...और पढ़ें

प्रतीकात्मक तस्वीर
HighLights
राम मंदिर चोरी के बाद बांकेबिहारी में सतर्कता बढ़ी।
ऑनलाइन दान को बढ़ावा देने पर विशेष जोर।
दान पेटिका का आकार बदला, चोरी रोकने के उपाय।
संवाद सहयोगी, वृंदावन। अयोध्या में राम मंदिर में चढ़ावा चोरी मामले के बाद अब ठाकुर बांकेबिहारी मंदिर में भी प्रबंधन सतर्क हो गया है। अब ज्यादा से ज्यादा ऑनलाइन दान पर जोर दिया जा रहा है। मंदिर के अंदर लगी दान पेटिका में करीब तीन वर्ष पहले से ही भारतीय स्टेट बैंक के मंदिर के बैंक खाते का क्यूआर कोड लगाया गया। अब इस क्यूआर कोड के जरिए मंदिर में लगे सुरक्षाकर्मी ऑनलाइन दान देने को प्रेरित कर रहे हैं।
ठाकुर बांकेबिहारी मंदिर में हर दिन हजारों श्रद्धालु दर्शन को आते हैं। पहले की अपेक्षा श्रद्धालुओं का चढ़ावा भी बढ़ रहा है। मार्च, अप्रैल और मई तीन माह की दानराशि की गणना की गई तो 4.90 करोड़ रुपये चढ़ावा मंदिर प्रबंधन को मिला है। क्यूआर कोड लगने के बाद भी आनलाइन दान देने वाले श्रद्धालुओं की संख्या बहुत अधिक नहीं बढ़ पा रही है।
मंदिर की दान पेटिका में लगे क्यूआर कोड को स्कैन कर दान की अपील
इधर, अयोध्या में राम मंदिर के चढ़ावे में चोरी के मामले ने जिम्मेदारों को सतर्क कर दिया है। यही कारण है कि अब अधिक से अधिक श्रद्धालुओं को ऑनलाइन दान के लिए प्रेरित करने की कोशिश की जा रही है। कुछ माह पहले ही आनलाइन दान के लिए भारतीय स्टेट बैंक की एक मशीन मंदिर के कार्यालय में लगा दी गई। एक और मशीन मंदिर परिसर में लगाने की तैयारी हो गई है।
चार माह में पहले की अपेक्षा बढ़ा ऑनलाइन दान प्रतिशत, अब और जोर
सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित उच्चाधिकार प्राप्त प्रबंधन समिति अब आनलाइन दान के प्रति लोगों को प्रेरित करने को जगह-जगह नोटिस भी चस्पा करेगी। मंदिर से जुड़े लोगों का कहना है कि पिछले चार माह में आनलाइन दान में बढ़ोतरी हुई है। कुल दान का करीब 20 प्रतिशत आनलाइन हो रहा है। इसके अलावा मंदिर कार्यालय में दानराशि जमा कर रसीद अलग कटाई जाती है।
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चोरी रोकने को बदलवाई दान पेटिका
पहले मंदिर के अंदर दान पेटिका इस तरह से लगी थीं, उन पर कोई भी सामान रख सकता था। उच्चाधिकार प्राप्त प्रबंधन समिति का मानना था कि मंदिर के कर्मचारी और भंडारी आदि दान पेटिका के द्वार पर डलिया, फूल माला और चुनरी आदि रखकर वहीं खड़े हो जाते थे, इससे श्रद्धालु पेटिका में सीधे दान नहीं डाल पाते थे। उनका दान वहां खड़े कर्मचारी या भंडारी खुद लेकर जेब में रख लेते थे। इसे देख समिति ने दान पेटिका का पिछले माह आकार बदलवाया, इससे उसके द्वार को बंद नहीं किया जा सकता।
पहले हुई चोरी
बीते वर्ष अप्रैल में केनरा बैंक के कर्मचारी अभिनव सक्सेना ने दान पेटिका से निकली दानराशि गिनते समय 9.38 लाख रुपये चोरी कर लिए। बाद में उसे गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया। बैंक ने भी उसे बर्खास्त कर दिया। इससे पूर्व तीन बार मंदिर के भंडारी भी रुपये चोरी करते पकड़े गए, तो उन्हें मंदिर से हटा दिया गया।
हम चढ़ावे में पारदर्शिता के लिए लगातार आनलाइन दान के लिए लोगों को जागरूक कर रहे हैं। अब उसका असर भी दिख रहा है। लेकिन अभी भी लोगों को जागरूक करने की आवश्यकता है। इसके प्रयास हम कर रहे हैं।
अशोक कुमार, अध्यक्ष: उच्चाधिकार प्राप्त प्रबंधन समिति।