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मथुरा-वृंदावन में उमड़ा आस्था का सैलाब, जन्माष्टमी से पहले कान्हा की नगरी पहुंचे देश भर के श्रद्धालु

Published: Fri, 04 Sep 2026 01:05 AM (IST)

जन्माष्टमी से पहले मथुरा-वृंदावन में आस्था का सैलाब उमड़ पड़ा है, जहाँ देश भर से श्रद्धालु कान्हा के दर्शन और ...और पढ़ें

मथुरा-वृंदावन में उमड़ा आस्था का सैलाब (एआई जेनरेटेड तस्वीर)

मथुरा-वृंदावन में उमड़ा आस्था का सैलाब (एआई जेनरेटेड तस्वीर)

HighLights

  1. जन्माष्टमी से पहले मथुरा-वृंदावन में उमड़ा श्रद्धालुओं का सैलाब।

  2. युवा, महिलाएं और बुजुर्ग सभी कृष्ण भक्ति में लीन।

  3. लड्डू गोपाल को साथ लेकर दर्शन करने पहुंचे भक्त।

अंबुज उपाध्याय, मथुरा। ब्रज की रज में जाने कैसी पुकार है... जिसे सुनकर कदम अपने आप कान्हा की नगरी की ओर बढ़ने लगते हैं। यहां आने वाले श्रद्धालु केवल मंदिरों के दर्शन करने नहीं आते, वे अपने भीतर बसे कृष्ण को तलाशने आते हैं। किसी के अधरों पर राधे-राधे है तो किसी के मोबाइल में कृष्ण भजन गूंज रहे हैं। कोई लड्डू गोपाल को गोद में उठाए चला आ रहा है तो कोई पहली बार अकेले ही कान्हा की जन्मभूमि तक पहुंच गया। 

जन्माष्टमी से पहले मथुरा-वृंदावन में उमड़ रही आस्था में महिलाओं और बुजुर्गों के साथ युवाओं की बड़ी संख्या भी दिखाई दे रही है। दूर शहरों से आए इन श्रद्धालुओं की आंखों में एक ही चमक है, कान्हा के दर्शन की और उनकी जन्मभूमि की रज माथे से लगाने की। 

भजन सुनते आए, लड्डू गोपाल को साथ ले गए

जोधपुर से आए 19 वर्षीय यश चांदी की पायल के डिजाइनर हैं। श्रीकृष्ण के प्रति मन में लंबे समय से आस्था थी। इस बार भाव जागा तो अकेले ही ब्रज की ओर निकल पड़े। ट्रेन में पूरे रास्ते मोबाइल पर कृष्ण भजन सुनते रहे और सीधे वृंदावन पहुंचे। बांके बिहारी के दर्शन किए तो मन यहीं रम जाने को हुआ, लेकिन पारिवारिक जिम्मेदारियों ने वापस लौटने की याद दिलाई। 

अपने आराध्य के बाल स्वरूप लड्डू गोपाल को साथ ले लिया। कान्हा के जन्मस्थान के दर्शन की इच्छा हुई तो मथुरा आ गए। लड्डू गोपाल को दर्शन स्थल के भीतर ले जाने की अनुमति नहीं मिली तो कुछ पल मन उदास हुआ, लेकिन सुरक्षा व्यवस्था को समझते हुए उन्हें कमरे में छोड़कर जन्मस्थान के दर्शन करने चले गए।  

पिता की भक्ति ने मन में जगाया भाव

अजमेर के केशव वैष्णव के लिए कृष्ण भक्ति की डोर घर से जुड़ी है। तिहारी कनपुरा के रघुनाथ मंदिर में उनके पिता सेवा करते हैं। पिता को प्रतिदिन ठाकुर जी की भक्ति में लीन देखते-देखते उनके मन में भी श्रद्धा जागी। 

पहली बार अकेले ब्रज आने का भाव बना। पहले वृंदावन पहुंचे, फिर द्वारकाधीश के चरणों में हाजिरी लगाई और जन्मस्थान पर माथा टेका। जन्माष्टमी का उत्सव कई बार टीवी पर देखा है।  

तीन दिन से ब्रज में, जन्मोत्सव घर में मनाएंगे

कोटा से परिवार के साथ आईं अंतिमा के लिए ब्रज की यात्रा नई नहीं है, लेकिन जन्माष्टमी से ठीक पहले जन्मस्थान के दर्शन की अभिलाषा इस बार पूरी हुई। तीन दिन से कान्हा की नगरी में हैं। 

बांकेबिहारी लाल से लेकर द्वारकाधीश और जन्मस्थान तक दर्शन कर चुकी हैं। उनके साथ बहन प्रीति और भाई विशाल भी हैं। अंतिमा कहती हैं कि जन्माष्टमी पर ठाकुर जी का जन्मोत्सव अपने लड्डू गोपाल के साथ घर में ही मनाएंगे।

दस साल से साथ हैं लड्डू गोपाल

मुरादाबाद से आईं राजकुमारी के लिए लड्डू गोपाल परिवार के सदस्य की तरह हैं। दस वर्ष पहले उन्हें वृंदावन से अपने साथ ले गई थीं। तब से हर वर्ष ठाकुर जी को बांके बिहारी के दर्शन कराने की इच्छा रहती है। इस बार बस से ब्रज आईं और पूरे रास्ते लड्डू गोपाल को कृष्ण की ही वैभव गाथा सुनाती रहीं।