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महाभारत के 'युधिष्ठिर' पहुंचे संत के दरबार, प्रेमानंद महाराज को सुनाया संवाद तो मिला आशीर्वाद

By Vipin Parashar Edited By: Prateek Gupta
Updated: Mon, 02 Feb 2026 06:37 PM (IST)

दूरदर्शन के महाभारत में युधिष्ठिर का किरदार निभाने वाले गजेंद्र चौहान वृंदावन में संत प्रेमानंद से आशीर्वाद लेने पहुंचे। संत प्रेमानंद ने चौहान के अभि ...और पढ़ें

संत प्रेमानंद से एकांतिक वार्ता के दौरान अभिनेता गजेंद्र चौहान।

संत प्रेमानंद से एकांतिक वार्ता के दौरान अभिनेता गजेंद्र चौहान।

संवाद सहयोगी, जागरण, वृंदावन। दूरदर्शन पर प्रसारित महाभारत सीरियल महाभारत में युधिष्ठिर गजेंद्र चौहान सोमवार को संत प्रेमानंद से आशीर्वाद लेने पहुंचे। संत प्रेमानंद ने कहा आपने हमारे धर्म के स्वरूप का अभिनय किया है। युधिष्ठिर साक्षात धर्म के अंश से ही प्रकट हुए थे। गजेंद्र चौहान ने संत प्रेमानंद को महाभारत का संवाद भी सुनाया।

परिक्रमा मार्ग स्थित श्रीराधा केलिकुंज में सोमवार की सुबह लगभग साढ़े सात बजे महाभारत सीरियल में युधिष्ठिर का अभिनय करने वाले गजेंद्र चौहान संत प्रेमानंद के दर्शन व आशीर्वाद लेने को पहुंचे थे। संत प्रेमानंद ने चौहान का स्वागत करते हुए कहा आपने हमारे धर्म के सबसे बड़े स्वरूप का अभिनय किया है।

युधिष्ठिर तो साक्षात धर्म के अंश अवतार ही थे। इसके बाद गजेंद्र चौहान ने महाभारत सीरियल का एक संवाद सुनाने की अनुमति मांगी तो संत प्रेमानंद की अनुमति मिलने के बाद चौहान ने कहा ये संवाद उस समय का है जब पांचाली ने वनवास जाने से मना कर दिया।

धर्मराज युधिष्ठिर ने अपने भाइयों और माता को समझाते हुए कहा था कि श्रीराम ये जानते थे कि मृग सोने का नहीं होता, फिर भी उसके आखेट पर चले गए, तो क्या वह केवल लोभ था? क्या स्वयं सीताजी ये नहीं जानती थीं कि स्वर्ण मृग जैसा कोई पशु नहीं होता।

चौहान ने पूर्व प्रधानमंत्री स्व. अटलबिहारी वाजपेयी का प्रिय संवाद भी सुनाया जो इस तरह था, कि कोई भी पुत्र, कोई भी पिता, कोई भी परिवार, कोई भी प्रतीक्षा, कोई भी परंपरा हो। राष्ट्र से ऊपर नहीं हो सकती। संत प्रेमानंद ने गजेंद्र चौहान को श्रीजी का प्रसादी अंगवस्त्र व प्रसाद भेंट किया।