दुष्कर्म-हत्या के दोषी को फांसी की सजा: मथुरा में बहन ने कहा- मेरा भाई कातिल जरूरी था ये दंड
मथुरा में रिश्ते की बहन से दुष्कर्म में असफल होने पर उसे जलाकर मारने वाले दोषी उमेश को जिला जज ने फांसी की सजा सुनाई है। दोषी की बहन ने भी इस फैसले का ...और पढ़ें

जिला जज की अदालत में मृत्यु दंड की सजा पाने के बाद उमेश।
HighLights
मथुरा में दुष्कर्म-हत्या के दोषी उमेश को फांसी की सजा।
दोषी की बहन ने भी न्यायालय के फैसले का किया स्वागत।
जिला जज ने समाज में संदेश देने के लिए सुनाई कठोरतम सजा।
जागरण संवाददाता, मथुरा। रिश्ते की बहन से दुष्कर्म में असफल होने पर उसकी जलाकर हत्या करने के दोषी को जिला जज की अदालत ने मंगलवार को फांसी की सजा सुनाई। दोषी उमेश को अपने किए का कतई पछतावा नहीं हुआ। पूरे कक्ष में कुछ पल के लिए सन्नाटा छा गया। कुछ देर बाद वह न्यायालय का फैसला पढ़ता रहा।
दोषी की बहन ने अदालत के निर्णय का स्वागत किया। कहा कि जो भी हुआ, अच्छा हुआ। यह हमारा भाई जरूर है, वह कातिल है, इसके किए की सजा फांसी से कम नहीं हो सकती।
हत्या के मामले में फांसी की सजा सुनाने का मामला
फरह थाना क्षेत्र के एक में 11 मार्च 2025 की दोपहर घर पर टीवी देख रही महिला को उसके ही प्रेमी हरियाणा पलवल के हसनपुर निवासी उमेश ने दुष्कर्म करने का प्रयास किया। विरोध जताने पर उसने पेट्रोल छिड़ककर महिला जला दिया। मामले की सुनवाई कर रहे जिला जज विकास कुमार ने 30 अप्रैल को उमेश के खिलाफ दोष सिद्ध किया था। मंगलवार को सजा पर निर्णय सुनाया गया। जिला जज ने जब दोषी उमेश को फांसी की सजा सुनाई गई तो अदालत परिसर में कुछ पल के लिए सन्नाटा छा गया।
हत्या के आदेश को न्यायालय के अंदर ही पढ़ता रहा उमेश
अदालत में मौजूद लोगों की निगाहें उमेश के चेहरे पर टिक गईं। फांसी की सजा सुनाए जाने के बाद उसके चेहरे पर न कोई शिकन दिखाई दी। न घबराहट और न ही अपने किए पर कोई पछतावा दिखाई दिया। न्यायालय के आदेश की कापी मिलने के बाद उमेश जमीन पर बैठकर उसे पढ़ता रहा। इधर फरह क्षेत्र में रहने वाली उसकी सगी बहन ने न्यायालय के इस फैसले का स्वागत किया।
30 अप्रैल को ही न्यायालय ने किया था दोष सिद्ध
जिस महिला की उमेश ने हत्या की, वह उमेश की बहन की देवरानी थी। एक ही घर में उमेश की दो सगी बहनों का विवाह हुआ है। जब न्यायालय ने निर्णय सुनाया तो एक बहन कोर्ट में मौजूद थी। उसने कहा कि हम न्यायालय के निर्णय से खुश हैं, मेरे भाई ने जो किया, उसके लिए शर्मिंदा भी। इसकी सजा फांसी से कम नहीं हो सकती।
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30 वर्ष में पहली फांसी की सजा
जिला जज की अदालत में 30 वर्ष में पहली फांसी की सजा सुनाई है। जिला शासकीय अधिवक्ता शिवराम सिंह तरकर ने बताया कि इससे पूर्व वर्ष 1995 में एक मामले में जिला जज की अदालत में फांसी की सजा सुनाई गई थी।
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आधे घंटे तक घर के पास खड़े होकर किया था इंतजार
लहंगा पहनकर आरोपित उमेश महिला के घर आ रहा था, लेकिन पति को देखकर वह रास्ते में ही रुक गया था। पति के घर से निकलते ही वह घर में घुस गया था। ग्रामीणों का कहना था कि उनको बिलकुल भी अंदाजा नहीं था कि लहंगा के पीछे आरोपित है। वरना वह उसे पकड़ लेते और वारदात होने से बचा लेते।
पुलिस की प्रभावी पैरवी से कम समय में आया निर्णय
पेट्रोल से जलाकर महिला की हत्या करने के मामले में पुलिस की पैरवी भी प्रभावी रही। इसके चलते अदालत को निर्णय सुनाने में कम समय लगा। मानिटरिंग सेल के प्रभारी अरविंद कुमार निर्वाल ने बताया कि फरह के अलावा राया में हत्या के मामले में दो को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई है। इस घटना की विवेचना फरह के तत्कालीन थाना प्रभारी संजय पांडेय ने की थी। विवेचना में कई महत्वपूर्ण बिंदुओं को शामिल किया गया है।
दस गवाहों ने पहुंचाया सजा तक
दोषी उमेश को रिपोर्ट दर्ज होने के बाद न्यायालय में दस लोगों की गवाही ने फांसी की सजा तक पहुंचा दिया। उमेश के विरुद्ध मृतक महिला के पति ने बयान दिया। परिवार के दो अन्य लोगों की भी गवाही हुई। फरह थाने के तत्कालीन थाना प्रभारी संजय पांडेय, दारोगा आरती देवी, सिपाही टीकम सिंह,दारोगा तेजेंद्र सिंह, डॉक्टर प्रवेंद्र वर्मा, डॉक्टर अंकित कुमार, मजिस्ट्रेट नायब तहसीलदार शुभा अवस्थी ने उमेश के विरुद्ध बयान दि।
समाज में संदेश जाए, इसलिए फांसी जरूरी
अपनी टिप्पणी में जिला जज विकास कुमार ने कहा कि अदालत के समक्ष यह स्पष्ट हुआ कि दोषी पूर्व में भी इसी प्रकार के गंभीर अपराध में संलिप्त रहा था, लेकिन उसके आचरण में कोई सुधार नहीं आया। उसने पुनः उसी प्रवृत्ति का जघन्य अपराध किया। ऐसे मामलों में नरमी बरतना समाज और न्याय, दोनों के हित में नहीं होगा। अपराधियों के मन में कानून का भय पैदा करने, पीड़ित पक्ष को न्याय दिलाने और समाज में यह स्पष्ट संदेश देने के लिए कि ऐसे अमानवीय अपराध किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किए जाएंगे, कठोरतम दंड यानी फांसी की सजा आवश्यक है।