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राधा अष्टमी आज, सुबह 4 बजे से लाडली जी के दर्शन को उमड़े भक्त; राधे–राधे से गूंज उठा बरसाना

Published: Sat, 19 Sep 2026 08:00 AM (IST)Updated: Sat, 19 Sep 2026 08:23 AM (IST)

Radha Ashtami 2026: बरसाना के लाड़ली महल में भोर चार बजे वेदमंत्रों और जयघोष के साथ राधारानी का जन्मोत्सव मनाया ...और पढ़ें

Radha Ashtami 2026: राधा के विग्रह का अभिषेक करते सेवायत।

Radha Ashtami 2026: राधा के विग्रह का अभिषेक करते सेवायत।

HighLights

  1. भोर चार बजे लाड़ली महल में राधारानी का प्राकट्य उत्सव।

  2. वेदमंत्रों और जयघोष के साथ हुआ दिव्य जन्माभिषेक।

  3. शीश महल से भक्तों को दिए राधारानी ने दर्शन।

किशन चौहान, बरसाना (मथुरा)। Radha Ashtami 2026 ब्रह्मांचल पर्वत की भोर शनिवार को सामान्य नहीं थी। जैसे ही घड़ी की सुइयां चार बजे के शुभ मुहूर्त पर पहुंचीं, लाड़ली महल वेदमंत्रों, घंटा-घड़ियाल और राधे-राधे के जयघोष से गूंज उठा। मंदिर परिसर में सजा अष्टदल कमल मानो स्वयं खिल उठा और उसके मध्य रासेश्वरी श्रीराधारानी के प्राकट्य का दिव्य उत्सव साकार हो गया। जन्मोत्सव के इस अलौकिक क्षण को निहारने के लिए श्रद्धालुओं की आंखें लाड़लीजी के विग्रह पर टिकी रहीं। ब्रह्मांचल पर्वत से उठी भक्ति की तरंगों ने पूरे बरसाने को अपने रंग में रंग दिया।

शुक्रवार रात से ही लाड़लीजी के जन्मोत्सव की मंगल बेला शुरू हो गई थी। मंदिर में बधाई गायन के बीच दाई, मान, सवासनी, नाइन और नामकरण लीला से जुड़े पदों की प्रस्तुति हुई।

मंदिर परिसर में देर रात तक राधारानी के जन्म की बधाइयां गूंजती रहीं। भोर होते-होते श्रद्धालुओं की भीड़ बढ़ती गई और लाड़ली महल का वातावरण उत्सवमय हो उठा।

चार बजे लाड़ली महल में गूंजे वेदमंत्र, अभिषेक के साक्षी बने हजारों श्रद्धालु

शनिवार को शुभ मुहूर्त में राधारानी के प्राकट्य के साथ ही सेवायतों और आचार्यों ने विधि-विधान से जन्माभिषेक की शुरुआत की। चांदी की चौकी पर विराजमान राधारानी के प्रकट विग्रह को कमल पुष्पों से सजाया गया। वेद मंत्रों के बीच दूध, दही, शहद, गाय का घी, इत्र, बूरा, विभिन्न स्थानों की रज, जल, सप्त अनाज, मेवा और फलों समेत पूजन सामग्री से अभिषेक किया गया। कालिंदी समेत सात नदियों के जल से भी राधारानी का स्नान कराया गया। नवग्रह देवताओं का आह्वान करते हुए आचार्यों ने वैदिक मंत्रोच्चार किया।

राधे राधे के जयकारों से देर तक गूंजता रहा बरसाना

अभिषेक की प्रत्येक बूंद के साथ श्रद्धालुओं का उत्साह बढ़ता गया। मंदिर परिसर में दूध की धारा प्रवाहित होती रही और भक्त पुष्पवर्षा करते रहे। जन्माभिषेक पूर्ण होने पर लाड़लीजी को पीले रंग की फरुआनुमा पोशाक धारण कराई गई। इसके बाद सेवायतों ने युगल स्वरूप की आरती उतारी तो मंदिर परिसर राधारानी के जयकारों से गूंज उठा।

शीश महल से दिए दर्शन

जन्मोत्सव के बाद सुबह करीब आठ बजे राधारानी ने शीश महल से भक्तों को दर्शन दिए। शीश महल में लाड़लीजी के दर्शन के लिए श्रद्धालुओं की कतारें लगी रहीं। दर्शन मिलते ही भक्तों के मुख से बरसाने वाली और वृषभानुनंदिनी के जयकारे फूट पड़े। मंदिर से लेकर ब्रह्मांचल पर्वत की तलहटी तक वातावरण में एक ही स्वर सुनाई देता रहा राधे राधे।

वृषभानुजी को लाली के जन्म की बधाई देने के बाद बधाई पदों की प्रस्तुतियों पर श्रद्धालु जमकर थिरके

राधारानी के जन्मोत्सव की बधाई लेकर नंदगांव से भी श्रद्धालु बरसाना पहुंचे। वृषभानुजी को लाली के जन्म की बधाई देने के बाद बधाई पदों की प्रस्तुतियों पर श्रद्धालु जमकर थिरके। बरसाना और नंदगांव की सांझी भक्ति ने जन्मोत्सव को और रंग दे दिया। किसी के हाथ में पुष्प थे तो कोई राधारानी के नाम का गुणगान करते हुए झूम रहा था। ब्रह्मांचल पर्वत से लेकर बरसाना की गलियों तक हर ओर राधा नाम की गूंज ने जन्मोत्सव को भक्ति के विराट उत्सव में बदल दिया।

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