ठाकुर बांकेबिहारी मंदिर में 6.19 करोड़ का सर्वाधिक चढ़ावा, रास्ते में ही साफ हो जाता था धन
वृंदावन के ठाकुर बांकेबिहारी मंदिर में ढाई महीने में रिकॉर्ड 6.19 करोड़ रुपये का दान मिला है। यह बढ़ोतरी सुप्रीम ...और पढ़ें
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बांकेबिहारी मंदिर में दर्शन को उमड़ी भीड़।
HighLights
सुप्रीम कोर्ट के आदेश से दान व्यवस्था में आई पारदर्शिता।
पहले सेवायत और भंडारी दानराशि अपने पास रख लेते थे।
संवाद सहयोगी, वृंदावन। ठाकुर बांकेबिहारी के दरबार में भक्तों की आस्था का खजाना लगातार बढ़ रहा है। मंदिर में चढ़ावे को लेकर हुई सख्ती के बाद मंदिर के खजाने में इस बार रिकार्ड दानराशि आई है। ढाई माह के दौरान गुल्लक में दी गई दानराशि की गणना गुरुवार को पूरी हो गई। 32 गुल्लक में 6.19 करोड़ रुपये दानराशि निकली। यह अब तक की सर्वाधिक दानराशि है।
इससे पहले मई में 4.90 करोड़ रुपये की सबसे अधिक दानराशि प्राप्त हुई थी। अगस्त में खोली गई गुल्लक में करीब चार करोड़ रुपये प्राप्त हुए।ठाकुर बांकेबिहारी मंदिर में वर्तमान में व्यवस्था है कि मंदिर के जगमोहन में जो दान श्रद्धालु अर्पित करते हैं वह सेवायत का होता है। गुल्लक या फिर ऑनलाइन माध्यम से जो दान मंदिर को दिया जाता है, वही मंदिर खजाने में जाता है।
पिछले वर्ष अगस्त में सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर उच्चाधिकार प्राप्त प्रबंधन समिति ने मंदिर की व्यवस्था संभाली। चढ़ावे की व्यवस्था में बदलाव के लिए इसी वर्ष 25 अगस्त को समिति ने सुप्रीम कोर्ट में इसकी शिकायत एक हलफनामा दाखिल कर की। इसमें फोटो दिखाए कि सेवायतों की सहायता के लिए लगाए गए भंडारी गुल्लक में श्रद्धालुओं को दानराशि नहीं अर्पित करने देते हैं। भंडारी खुद ही अपने पास ही दानराशि रख लेते हैं।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद भंडारियों की संख्या सीमित की गई। मंदिर में नोटिस बोर्ड लगाया गया कि श्रद्धालु गुल्लक में ही दानराशि अर्पित करें। समिति के अध्यक्ष अशोक कुमार ने बताया कि इसका भी सीधा असर दिखा और अब तक की सर्वाधिक दानराशि प्राप्त हुई। इससे मंदिर की व्यवस्थाओं में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने की दिशा में किए जा रहे प्रयासों को भी बल मिला है।