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    मऊ में सरयू की कटान को रोकने के लिए 7.24 करोड़ की परियोजनाएं शुरू, नहीं में बह चुके हैं 21 ठोकर

    Updated: Mon, 13 Jul 2026 03:15 PM (IST)

    मऊ के दोहरीघाट में सरयू नदी के बढ़ते जलस्तर और कटान को रोकने के लिए 7.24 करोड़ रुपये की नई परियोजना शुरू की गई है। यह परियोजना उपजाऊ भूमि और धरोहरों क ...और पढ़ें

    7.24 करोड़ की परियोजनाएं रोकेंगी सरयू की कटान।

    7.24 करोड़ की परियोजनाएं रोकेंगी सरयू की कटान।

    HighLights

    1. मऊ में सरयू कटान रोकने को 7.24 करोड़ की परियोजना।

    2. उपजाऊ भूमि और धरोहरों को कटान से बचाने का लक्ष्य।

    3. जियो बैग, क्रेटेड वॉल जैसी आधुनिक तकनीकों का उपयोग।

    जागरण संवाददाता, दोहरीघाट (मऊ)। शहर के उत्तरी छोर पर बहने वाली सरयू नदी का जलस्तर अब तेजी से बढ़ने लगा है। ऐसे में कटान भी तेजी से होगी। अब प्रशासन की तरफ से बनाई गई 7.24 करोड़ की परियोजनाएं सरयू की कटान को रोकेंगी। इससे कटान का निदान भी होगा और सरयू में कटकर विलीन हो रही उपजाऊ जमीन पर ब्रेक लग जाएगा। यही नहीं शेष बचे धरोहरों का अस्तित्व भी बचेगा।

    सरयू नदी में प्रत्येक वर्ष आने वाली बाढ़ से कटान का खतरा मंडराता रहता है। सरयू नदी तेजी से आजमगढ़-गोरखपुर रोड की तरफ बढ़ रही है। सरयू मात्र इस मार्ग से 100 मीटर दूर पर बह रही है। कटान को रोकने के लिए सरयू नदी के तट पर स्थित धनौली गांव से मुक्तिधाम श्मशान घाट तक करीब 400 मीटर तक कटानरोधी कार्य किया गया है।

    इसके लिए 7.24 करोड़ रुपये खर्च किया गया है। इससे लोगों को कटान के रूकने और धरोहरों के सुरक्षित रहने की उम्मीद जगी है। पांच वर्ष पूर्व नदी की धारा मोड़ने के लिए विभिन्न स्थानों पर 21 ठोकरों का निर्माण किया गया था।

    बाढ़ के दौरान नदी की तेज धारा में सभी ठोकर कटकर विलीन हो गए। नई बाजार से लेकर औझौली तक फोरलेन रोड व पुल का निर्माण होने से नदी की सीधी धारा धनौली से लेकर मुक्तिधाम तक टकराने लगी। इसके कारण बैकरोलिंग होने से नदी गहराई प्रत्येक वर्ष बढ़ती जा रही है।

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    सिंचाई विभाग के अवर अभियंता प्रिंस कुमार सिंह ने बताया कि सवा सात करोड़ रुपये से सरयू नदी के दाएं तट पर स्थित धनौली से लेकर मुक्तिधाम श्मशान घाट की सुरक्षा के लिए सबसे पहले नदी की तह पर जीओ बैग भरकर डाला गया है।

    उसके बाद लोहे की जाली में बोल्डर भरकर क्रेटेड वाल किया गया है। तीन लेयर में अपरन व बोल्डर की पीचिंग करीब चार सौ मीटर तक की गई है। परकूपाइन विधि से कटान रोकने का प्रयोग किया गया है। इससे कटान पर काबू पाया जा सकता है।

    मानसून के साथ नदी का जलस्तर बढ़ना शुरू हो गया है। इस बार कटानरोधी परियोजना वरदान साबित होने की उम्मीद है। धनौली से लेकर मुक्तिधाम तक कटान रोधी परियोजना पर अब तक करोड़ों रुपये का कार्य कराया जा चुका है। इसके बावजूद कटान का स्थानीय समाधान नहीं निकल सका।

    लगातार कटान होने के बाद तीन दशक में लगभग तीन हजार एकड़ किसानों की ऊपजाऊ भूमि नदी में समाहित हो चुकी है। कटानरोधी कार्य होने से किसानों की उपजाऊ भूमि के बचने की संभावना है।

    सरयू की प्रलयंकारी विभीषिका व बाढ़ से निबटने के लिए प्रशासन पूरी तरह से मुस्तैद है। दोहरीघाट मधुबन में कटानरोधी कार्य कराए जा चुके हैं। यह कटानरोधी परियोजनाएं संजीवनी का काम करेगी। इससे न सिर्फ किसानों को लाभ होगा, बल्कि धरोहरों का अस्तित्व भी बचा रहेगा। -आनंद वर्द्धन, जिलाधिकारी मऊ।