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मऊ की महिलाओं ने बनाई 23 हजार हस्तनिर्मित राखियां, आत्मनिर्भरता की नई मिसाल

Published: Wed, 26 Aug 2026 10:54 PM (IST)

मऊ के घोसी ब्लॉक के पकड़ी बुजुर्ग गांव की 35 महिलाएं राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के सहयोग से जलकुंभी, मोती ...और पढ़ें

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HighLights

  1. घोसी की 35 महिलाओं ने बनाई 23 हजार से अधिक राखियां।

  2. जलकुंभी, मोती, रेशम के धागों से तैयार की जा रही राखियां।

  3. राखियों की बिक्री से 70 हजार रुपये की आय हुई।

जागरण संवाददता, मऊ। घोसी ब्लाक के पकड़ी बुजुर्ग गांव की महिलाएं इन दिनों आत्मनिर्भर बन रहीं हैं। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के सहयोग से यहां की महिलाएं स्वरोजगार की दिशा में दिन-प्रतिदिन कदम बढ़ाते हुए आगे बढ़ रही हैं। गांव में संचालित होने वाले विभिन्न स्वयं सहायता समूहों की महिलाएं जलकुंभी, मोती और रेशम के धागों से रंग बिरंगी हस्त निर्मित राखी तैयार कर रही हैं।

पकड़ी बुजुर्ग गांव में डा. भीमराव आंबेडकर, बाबा संत रविदास और जय मां नंदेई नाम से कुल तीन स्वयं सहायता समूह संचालित किए जा रहे हैं। इन तीनों समूहों से लगभग 35 महिलाएं जुड़ी हुई हैं जिन्होंने अब तक कुल 23,405 राखियां तैयार कर बाजार में बेचा है। राखियों की गुणवत्ता और सुंदरता को देखते हुए बाजार में इनकी अच्छी मांग है।

समूह की महिलाओं द्वारा प्रत्येक राखी को 30 रुपये की दर से बेचा जा रहा है। इस बिक्री से महिलाओं को अब तक लगभग 70 हजार रुपये की आमदनी प्राप्त हो चुकी है। राष्ट्रीय आजीविका मिशन द्वारा न केवल इन्हें उत्पादन के लिए प्रेरित किया जा रहा है, बल्कि बाजार उपलब्ध कराने में भी पूरा सहयोग दिया जा रहा है।

आजीविका मिशन प्रबंधक हिमांशु सिंह ने बताया कि स्वयं सहायता समूह की महिलाएं आर्थिक रूप समृद्ध हो रही हैं। सरकार की तरफ से इन्हें हर सहायता प्रदान की जा रही है। अभी स्वतंत्रता दिवस पर भी स्वयं सहायता समूह की महिलाओं ने दो लाख से अधिक तिरंगा बनाकर अच्छी आमदनी की थी।

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