मऊ में पहलगाम आंतकी हमले में होने का भय दिखाकर किया डिजिटल अरेस्ट, 20.50 लाख कराया ट्रांसफर
मऊ के घोसी में एलआईसी सर्वेयर एहतरामुल हक डिजिटल अरेस्ट का शिकार हुए। ठगों ने खुद को एनआईए अधिकारी बताकर उन्हें चार दिनों तक ऑनलाइन बंधक बनाए रखा और 2 ...और पढ़ें

मऊ में एलआईसी सर्वेयर से डिजिटल अरेस्ट कर 21 लाख की ठगी, साइबर पुलिस जांच में जुटी।
HighLights
एलआईसी सर्वेयर एहतरामुल हक से 21 लाख की ठगी।
ठगों ने खुद को एनआईए अधिकारी बताकर डिजिटल अरेस्ट किया।
चार दिनों तक ऑनलाइन बंधक बनाकर पैसे ट्रांसफर कराए।
जागरण संवाददाता, मऊ। आधार नंबर पर जारी सिम कार्ड का प्रयोग जम्मू कश्मीर के पहलगाम में आतंकी हमले में होने की बात कहकर घोसी कोतवाली के कस्बा निवासी दंपती को साइबर ठगों ने डिजिटल अरेस्ट कर लिया। इसके बाद जेल भेजने की धमकी देकर 20.50 लाख रुपये आरटीजीएस के माध्यम से ट्रांसफर्मर करा लिए।
घोसी कोतवाली के कस्बा निवासी एहतरामुल को एक साइबर ठग ने 19 फरवरी को लखनऊ पुलिस हेडक्वाटर से रंजित कुमार का एक व्यक्ति निरीक्षक बनकर फोन किया। उसने पहलगाम हमले में आधार नंबर द्वारा जारी सिम कार्ड का प्रयोग होने और आतंकी अफजल खान व करीम मुसा द्वारा बयान देने की बात कहकर डराया गया। इसके बाद मनी लांड्रिंग में शामिल होने का आरोप लगाकर जांच के लिए बैंक खातों की जानकारी मांगी।
इसके बाद साइबर ठग ने पीड़ित को 19 फरवरी को सिंगल एप डाउनलोड कराकर बातचीत, मैसेज व वीडियो काल किया गया। साथ ही वीडियो काल करके डराया धमकाया गया और कहा गया कि किसी को बताने पर देश के गद्दार कहे जाओगे। इससे बचने के लिए पीड़ित ने उप्र ग्रामीण बैंक व स्टेट बैंक के खाता से 20 फरवरी को 11 लाख रुपये व एमडी तोड़कर 23 फरवरी को साढ़े नौ लाख रुपये कुल 20.50 लाख रुपये तीन अलग-अलग खातों में भेजा गया।
इसके बाद एक साइबर ठग ने एनआइए चीफ बनकर सिंगल एप पर काल किया और धनराशि का सत्यापन होने के बाद वापस खाता में भेजने की बात कहीं। देर शाम तक खाता में धनराशि वापस नहीं आने पर पीड़ित ने साइबर सेल में तहरीर दी। इस मामले में साइबर क्राइम थाना ने 26 फरवरी को केस दर्ज कर लिया। केस दर्ज करने के बाद से साइबर पुलिस मामले की जांच के लिए पीड़ित के खाता और भेजे के खातो की जांच के लिए टीम का गठन किया है।