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AI बनेगी 'आंख': रास्ता पहचानेंगे और कंप्यूटर-किचन संभालेंगे दृष्टिबाधित, मेरठ में लाइव डेमो ने दिखाई तकनीक की ताकत

By Amit Tiwari Edited By: Praveen Vashishtha
Published: Thu, 10 Sep 2026 02:01 PM (IST)

कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) अब दृष्टिबाधित लोगों को आसपास की दुनिया समझने और अकेले आगे बढ़ने में मददगार बन रही है। ...और पढ़ें

एनएबी मेरठ के पुनर्वास एवं संसाधन केंद्र के शुभारंभ के दौरान लाइव डेमो।

एनएबी मेरठ के पुनर्वास एवं संसाधन केंद्र के शुभारंभ के दौरान लाइव डेमो।  

HighLights

  1. AI दृष्टिबाधितों को आसपास की दुनिया समझने में मदद कर रही है।

  2. विशेष गोगल्स और मोबाइल ऐप से रास्ता पहचानने में मिलती है सहायता।

  3. एनएबी मेरठ ने 3500 से अधिक दृष्टिबाधितों को कंप्यूटर शिक्षा दी।

जागरण संवाददाता, मेरठ। कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) अब दृष्टिबाधित लोगों के लिए आसपास की दुनिया को समझने और अकेले आगे बढ़ने में मददगार बन रही है। सामने कौन है, रास्ते में क्या है, आसपास का वातावरण कैसा है और किसी स्थान पर क्या मौजूद है, इन सवालों के जवाब अब दृष्टिबाधित व्यक्ति एआइ से बातचीत कर आवाज के माध्यम से हासिल कर सकते हैं।

गुरुवार को वेस्टर्न कचहरी रोड स्थित ऐतिहासिक त्यागी छात्रावास में एनएवी मेरठ के पुनर्वास एवं संसाधन केंद्र (RARCB) के शुभारंभ के दौरान हुए लाइव डेमो में तकनीक के इस इस्तेमाल ने सभी का ध्यान खींचा।

दृष्टिबाधितों ने बताया कि वे विशेष गोगल्स का भी इस्तेमाल कर रहे हैं। यह गोगल्स मोबाइल फोन से ब्लूटूथ के माध्यम से कनेक्ट रहता है और एक विशेष एप्लिकेशन के साथ काम करता है। गोगल्स में लगा कैमरा सामने की दुनिया को देखता है और एप्लिकेशन व एआइ की मदद से उस जानकारी को दृष्टिबाधित व्यक्ति तक आवाज के रूप में पहुंचाता है।

अकेले घर से निकलने में बनेगा सहारा

डेमो में समझाया गया कि यह तकनीक खासतौर पर उस समय उपयोगी होती है, जब दृष्टिबाधित व्यक्ति अपने घर से बाहर अकेले निकलता है। चलते समय डिवाइस आसपास की चीजों और रास्ते से संबंधित जानकारी आवाज में बताने में मदद करता है। इससे रास्ते को समझने और आसपास की परिस्थितियों के अनुसार आगे बढ़ने में सहूलियत मिलती है। यानी जिस दुनिया को देखने के लिए आंखों की जरूरत होती है, उसे एआइ अब आवाज के जरिए समझने का माध्यम उपलब्ध करा रहा है।

संस्था की ओर से समीर ने लाइव प्रदर्शन कर बताया कि किस तरह दृष्टिबाधित व्यक्ति मोबाइल और एआइ से बातचीत कर अपने आसपास की जानकारी हासिल कर सकता है। उन्होंने एआइ से अलग-अलग सवाल पूछकर दिखाया और एआइ ने उनके जवाब आवाज के माध्यम से दिए। उनके साथ आस्था एंड अमन भी प्रस्तुति में शामिल रहे। साथ से जुड़े एक किशोर विराट ने भी ब्रेल लिपि से किताब पढ़कर सुनाया।

विराट कंप्यूटर चलने में दक्ष हैं और उनके हुनर को देखते हुए की उनको दिल्ली स्थित एक डीपीएस स्कूल में दाखिला मिला है। इससे कार्यक्रम में मौजूद लोगों को यह प्रत्यक्ष अनुभव मिला कि तकनीक किस तरह दृष्टिबाधित व्यक्ति की रोजमर्रा की जिंदगी को आसान बना सकती है।

मोबाइल और कंप्यूटर में आवाज बनी आंख

लाइव डेमो में मोबाइल और कंप्यूटर के वायस माड्यूल का भी प्रदर्शन किया गया। अमन ने स्क्रीन पर मौजूद सामग्री को आवाज के माध्यम से समझना, कमांड देकर विभिन्न कार्य करना और डिजिटल माध्यमों का इस्तेमाल करना दृष्टिबाधितों के लिए आसान होमें की।प्रस्तुति दी।

कार्यक्रम में वरिष्ठ आइएएस अधिकारी, सैन्य अधिकारी, सरकारी अधिकारी, त्यागी छात्रावास के बोर्ड सदस्य और सामाजिक क्षेत्र से जुड़े प्रतिनिधि मौजूद रहे। उन्होंने इन गतिविधियों में भाग लेकर दृष्टिबाधित व्यक्तियों के दैनिक जीवन की चुनौतियों को करीब से समझने का प्रयास किया।

3500 से ज्यादा दृष्टिबाधितों को दी कंप्यूटर शिक्षा

एनएबी मेरठ के अनुसार संस्था के ‘एक भारत-एक क्लासरूम आनलाइन’ अभियान के माध्यम से देशभर में 3500 से अधिक दृष्टिबाधित शिक्षार्थियों को निश्शुल्क कंप्यूटर शिक्षा दी जा चुकी है। यह अभियान जम्मू-कश्मीर से कन्याकुमारी तक सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के 2200 से अधिक गांवों तक पहुंचा है। आरआरसीबी के माध्यम से आनलाइन शिक्षा के साथ प्रत्यक्ष प्रशिक्षण की सुविधाओं का भी विस्तार किया जाएगा।

एनएबी मेरठ की संस्थापक निदेशक पूनम त्यागी ने कहा कि पुनर्वास एवं संसाधन केंद्र सुलभता और समावेशिता की दिशा में नया अध्याय है। आधुनिक तकनीकी शिक्षा के साथ व्यावहारिक जीवन कौशल को जोड़कर दृष्टिबाधितों को आत्मनिर्भर बनाने का प्रयास किया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि दृष्टि बाधित व्यक्ति के आसपास दृष्टि वाले व्यक्ति असहज महसूस करने लगते हैं जबकि दृष्टिबाधित व्यक्ति सहजता से अपना काम कर सकते हैं। उन्होंने बताया कि दृष्टिबाधित व्यक्ति अब रसोई बहुत अच्छे से संभालते हैं और भविष्य में पूर्ण रूप से दृष्टिबाधित लोगों द्वारा संचालित बेकरी भी मेरठ में संचालित करने की परिकल्पना है। इसके लिए समाज को व्यापक सोच रखने की जरूरत है। संस्था 2011 से दृष्टिबाधित समुदाय के शिक्षा, पुनर्वास और सशक्तीकरण के लिए कार्य कर रही है।

केंद्र में अंग्रेजी और गणित के आनलाइन पाठ्यक्रमों के साथ निम्नलिखित कौशल सिखाए जाएंगे।

  • कंप्यूटर प्रशिक्षण
  • ब्रेल शिक्षा
  • मोबिलिटी एवं ओरिएंटेशन
  • अनुकूलित कुकिंग
  • दैनिक जीवन से जुड़े आवश्यक कौशल