माता सीता की जन्मस्थली से शुरू हुई ‘प्रकृति पथ अंतरराष्ट्रीय साइकिल यात्रा’, 'मंदोदरी की जन्मस्थली' पर होगा इसका भव्य स्वागत
पद्मश्री व पद्मभूषण से अलंकृत पर्यावरणविद् डॉ. अनिल प्रकाश जोशी के नेतृत्व में 'प्रकृति पथ' अंतरराष्ट्रीय साइकिल यात्रा 14 नवंबर ...और पढ़ें

यात्रा के दौरान पर्यावरणविद् डाॅ. अनिल प्रकाश जोशी और मेरठ में यात्रा की जानकारी देते प्रोफेसर एसके चौबे, साथ हैं गिरीश शुक्ला, पवनेश गौड़ व सोमपाल। जागरण
HighLights
पद्मश्री व पद्मभूषण से अलंकृत पर्यावरणविद् डॉ. अनिल जोशी के नेतृत्व में यात्रा 14 नवंबर को मेरठ पहुंचेगी।
दो देशों और सात राज्यों से गुजरते हुए मेरठ पहुंचने पर सीसीएसयू में होगा यात्रा का भव्य स्वागत।
जागरण संवाददाता, मेरठ। हिमालय संरक्षण, पर्यावरण जागरूकता और जनभागीदारी का संदेश लेकर नेपाल के जनकपुर से निकली ‘प्रकृति पथ की अंतरराष्ट्रीय साइकिल यात्रा’ 14 नवंबर को क्रांतिधरा मेरठ पहुंचेगी। पद्मश्री व पद्मभूषण से अलंकृत पर्यावरणविद् डॉ. अनिल प्रकाश जोशी की अगुवाई में निकली यात्रा का स्वागत चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय में होगा।
यह यात्रा दो देशों और सात राज्यों से गुजरते हुए गांव-गांव लोगों को प्रकृति संरक्षण के अभियान से जोड़ रही है। 16 नवंबर को देहरादून में इसका समापन होगा, जहां उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी भी यात्रा का स्वागत करेंगे।
प्रकृति पथ यात्रा संयोजक पवनेश गौड़ ने बताया कि डॉ. जोशी के यात्रा की शुरुआत दो अक्टूबर को नेपाल के जनकपुर से हुई है, जिसे माता सीता की जन्मस्थली माना जाता है। यात्रा का उद्देश्य माता सीता की जन्मस्थली जनकपुर से मंदोदरी के जन्मस्थली मेरठ तक पर्यावरण संरक्षण और हिमालय के महत्व का संदेश पहुंचाना है।
यात्रा में 21 लोगों का दल शामिल है, जिसमें 15 साइकिल सवार हैं। यात्रा के जिला संयोजक गिरीश शुक्ला ने बताया कि विद्यार्थियों के लिए निबंध, वाद-विवाद और स्लोगन प्रतियोगिताओं सहित विभिन्न गतिविधियां आयोजित की जा रही हैं।
तीन प्रतियोगिताओं में तीन-तीन विजेता सम्मानित होंगे। कार्बन फुटप्रिंट के प्रति जागरूकता बढ़ाने पर भी विशेष जोर दिया जा रहा है, ताकि विद्यार्थी समझ सकें कि आसपास की गतिविधियों का पर्यावरण पर कितना प्रभाव पड़ता है।
‘एक पृथ्वी, एक प्रकृति, एक भविष्य’ का संदेश
पवनेश गौड़ के अनुसार इस अभियान का मूल संदेश ‘एक पृथ्वी, एक प्रकृति, एक भविष्य’ है। डॉ. अनिल प्रकाश जोशी ने प्रकृति संरक्षण को जीवन का मूल मंत्र बताते हुए ‘प्रकृति ही प्रवृत्ति का मूल मंत्र’ का विचार दिया है।
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