मेरठ में बंदरों के आतंक से निजात दिलाने को विकसित होंगे कपि वन, इससे उन्हें जंगल में ही मिलेगा पर्याप्त भोजन
मेरठ में गंगा किनारे कब्जामुक्त 130 हेक्टेयर भूमि पर 'अविरल धारा वन' बनेगा, जो नदी के प्रवाह और भूमि कटाव को रोकेगा। बंदरों के आतंक से निजात दिलाने के ...और पढ़ें

नर्सरी में तैयार किए गए पौधे, बंदर का फाइल फोटो। जागरण
HighLights
कब्जामुक्त कराई गई भूमि पर वन विभाग बनाएगा 'अविरल धारा वन'।
पौधारोपण के लिए औषधीय, फलदार, छायादार व शोभाकार वृक्षों का चयन।
सचिन गोयल, हस्तिनापुर (मेरठ)। गंगा के पास खेडी कलां के जंगल में हाल ही में कब्जामुक्त कराई गई भूमि पर वन विभाग अब 'अविरल धारा वन' बनाएगा। भू-माफिया के चंगुल से छुड़ाई गई इस बेशकीमती 130 हेक्टेयर भूमि पर विशेष वन विकसित किया जाएगा, जो गंगा नदी की जलधारा को बिना किसी अवरोध के निरंतर बहने में तो सहयोगी होगा ही, तटीय इलाकों में होने वाले भूमि कटान को रोकने में भी मददगार साबित होगा। भूमि को समतल कर गड्ढे खोदकर पौधारोपण के लिए तैयार कर दिया गया है।
लोगों को बंदरों से निजात दिलाने के लिए हस्तिनापुर कौरवान वन ब्लाक व राजकीय पशुधन एवं कृषि प्रक्षेत्र में चिन्हित की गई भूमि पर कपि वन और अन्नपूर्णा वन बनाए जाएंगे।
इन वनों में बंदरों के अनुकूल फलदार व कंदमूल के पौधे लगाए जाएंगे, ताकि उन्हें जंगल के अंदर ही पर्याप्त भोजन मिल सके। भोजन की उपलब्धता होने से बंदर आबादी वाले इलाकों और किसानों की फसलों का रुख नहीं करेंगे।
वन क्षेत्राधिकारी खुशबू उपाध्याय ने बताया कि वृहद पौधारोपण को अमलीजामा पहनाने के लिए वन विभाग ने अपनी पांडव नर्सरी, वन विभाग कार्यालय, एएस कालेज नर्सरी, ढिकौली नर्सरी में लगभग साढ़े छह लाख पौधे तैयार कर लिए हैं। गंगा किनारे पौधारोपण के लिए खेड़ी कलां के साथ-साथ बधवा में भी 28 हेक्टेयर भूमि को अवैध कब्जे से मुक्त कराकर तैयार कर लिया गया है।
पौधारोपण के लिए औषधीय, फलदार, छायादार व शोभाकार वृक्षों का चयन किया गया है। जिसमें शहजन, जंगल जलेबी, नीम, कंजी, अर्जुन, शीशम, खैर, बेर, पीपल, अर्जुन, आंवला, बरगद, पाकड़, अनार, अमरूद, शहतूत, जामुन, अमलताश, गुलमोहर आदि के पौधे शामिल है।
खबरें और भी
पारंपरिक व बीज रोपण विधि से सजेंगे वन
हस्तिनापुर कौरवान और राजकीय पशुधन प्रक्षेत्र को मिलाकर लगभग 1 लाख 45 हजार पौधे पारंपरिक तरीके से गड्ढे खोदकर रोपित किए जाएंगे। खादर की अनुकूल मिट्टी को देखते हुए 1 लाख 37 हजार पौधे सीधे बीज रोपण विधि द्वारा उगाए जाएंगे। दोनों विधियों को मिलाकर कुल 2 लाख 83 हजार पौधे रोपित करने का लक्ष्य रखा गया है।