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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Jun 16, 2019 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

पानी की कमी से हो रही गुर्दे में इंजरी, पेशाब कम आना और भी खतरनाक Meerut News

By Taruna TayalEdited By:
Published: Sun, 16 Jun 2019 04:25 PM (IST)Updated: Sun, 16 Jun 2019 04:40 PM (IST)

शरीर में पानी की कमी से गुर्दो को घातक नुकसान हो रहा है। चिकित्सकों की मानें तो जरा सी इंजरी ...और पढ़ें

पानी की कमी से हो रही गुर्दे में इंजरी, पेशाब कम आना और भी खतरनाक Meerut News
पानी की कमी से हो रही गुर्दे में इंजरी, पेशाब कम आना और भी खतरनाक Meerut News

मेरठ, [संतोष शुक्ल]। तपती धूप में उल्टी-दस्त को हल्के में लेना भारी भूल होगी। शरीर में पानी की कमी से गुर्दो को घातक नुकसान हो रहा है। ब्लडप्रेशर लो होने पर गुर्दे में खून की कमी होने से कई मरीजों को डायलसिस पर रखना पड़ा। उधर, धूप में कड़ा शारीरिक श्रम करने वालों की मांसपेशियां फटकर गुर्दे में घुस रही हैं। चिकित्सकों की मानें तो जरा सी इंजरी भी गुर्दे को पूरी तरह तबाह कर देगी। शुगर, थायरायड व पथरी के मरीज रिस्क जोन में हैं।
मांसपेशियों के टुकड़े फंस सकते हैं गुर्दे में
भारी शारीरिक परिश्रम करने वालों में पानी की कमी होने से तापमान बढ़ता है। मांसपेशियां फटने से ‘एक्यूट टयूबलर नेक्रोसिस’ हो जाता है, जिसमें मॉयोग्लोबिन का प्रोटीन गुर्दे में फंसकर इंजरी करता है। इससे सीकेडीयू-‘क्रानिक किडनी डिसीज आफ अननोन रीजन’ का खतरा बढ़ता है। जिमखानों में देर तक व्यायाम करने वाले युवकों के गुर्दे में इंजरी ज्यादा मिल रही है। खासकर, डायरूटिक-‘मूत्र बढ़ाने वाला’ कैप्सूल लेने वालों में गुर्दा बैठने का खतरा ज्यादा है। पानी की कमी से टयूबलर इंजरी होती है।
ये हैं गुर्दे में खराबी के लक्षण

  1. पेशाब का कम आना
  2. शरीर में सूजन का बढ़ना
  3. सांस फूलना, मरीज का गफलत में जाना

बरतें एहतियात

  • रोजाना कम से कम 10 ग्लास पानी पिएं।
  • दही, नारियल पानी, छाछ व नमक भी लें।
  • धूप में कड़ा परिश्रम देर तक न करें।
  • उल्टी-दस्त होते ही ओआरएस घोल लें।
  • गुर्दे के मरीज चिकित्सक के संपर्क में रहें।

गुर्दे में कम पहुंच रहा खून
गुर्दा रोग विशेषज्ञ डा. संदीप गर्ग के अनुसार, मेरठ में पारा 40 डिग्री पार पहुंचने से शरीर में नमक और पानी की कमी हो रही है। हीटस्ट्रोक के मरीजों में गुर्दे में खून न पहुंचने से यह काम करना बंद कर देती है। पथरी एवं गुर्दे के पुराने रोगियों में संक्रमण फैलने के साथ ही किडनी बैठ सकती है। स्थिति बिगड़ने पर शरीर में यूरिया क्रिटनिन का स्तर बढ़ने लगता है। शुगर, थायरायड, एवं पथरी के मरीजों में गुर्दा फेल का खतरा ज्यादा है। बुजुर्गो और बच्चों में भी रिस्क है। 

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