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मेरठ के 74 साल पुराने मंदिर की मूर्ति का पाकिस्तान और भारतीय वायुसेना से है कनेक्शन, इसमें गूंजे कन्हैया के जयकारे

By Vinay Kumar Edited By: Praveen Vashishtha
Published: Fri, 04 Sep 2026 05:04 PM (IST)

Meerut News: मेरठ के थापरनगर स्थित श्रीकृष्ण मंदिर में जन्माष्टमी धूमधाम से मनाई गई, जहां फूलों से सजी पालकी में ...और पढ़ें

मेरठ में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी महापर्व पर रोशनी से सजा श्रीकृष्ण मन्दिर थापर नगर, थापरनगर गली नंबर 5 से निकली ठाकुर जी की शोभायात्रा।

मेरठ में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी महापर्व पर रोशनी से सजा श्रीकृष्ण मन्दिर थापर नगर, थापरनगर गली नंबर 5 से निकली ठाकुर जी की शोभायात्रा।

HighLights

  1. श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर थापरनगर मंदिर से निकली शोभायात्रा।

  2. 20 फीट ऊंचे पिरामिड पर युवाओं ने फोड़ी दही हांडी।

  3. पेशावर से लाई गई थी श्रीकृष्ण जी की मूर्ति।

जागरण संवाददाता, मेरठ। शहर के थापरनगर गली नंबर पांच स्थित श्रीकृष्ण मंदिर से श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर शुक्रवार सुबह भगवान श्रीकृष्ण की शोभायात्रा निकाली गई। बैंड-बाजों की धुन व ढोल वालों की थाप पर श्रद्धालुओं ने भक्ति भाव से ठाकुर जी का गुणगान किया। शोभायात्रा में फूलों से सुसज्जित पालकी में भगवान श्रीकृष्ण की मूर्ति विराजित की गई।

ठाकुर जी के दर्शन कर श्रद्धालुओं ने जगह-जगह पुष्पवर्षा से स्वागत किया। मंदिर से शुरू होकर शोभायात्रा बच्चा पार्क, गुरुद्वारा रोड, गली नंबर दो, तीन से होते हुए वापस मंदिर पहुंचकर संपन्न हुई। इसके बाद दही हांडी का कार्यक्रम हुआ। जिसमें गोपाल, मनु, सत्यम, अमित, योगेश, हिमांशु, तुषार समेत 15 सदस्यीय युवाओं के समूह ने बाल ग्वालों के रूप में लगभग 20 फीट ऊंचा पिरामिड बनाकर दही हांडी का प्रदर्शन किया।

बाल ग्वालों का गजब संतुलन देख श्रद्धालुओं ने तालियां बजाकर उत्साहर्वधन किया। हांडी को तोड़कर माखन प्रसाद वितरण किया गया। भगवान श्रीकृष्ण के प्राकट्य पर मंदिर में दिनभर भजन, प्रवचन, कीर्तन का दौर जारी रहा। राजकुमार आनंद, मंजू आनंद, अनुज चड्ढा, अलका चड्ढा व अन्य का विशेष सहयोग रहा।

पाकिस्तान के पेशावर से लाई थी श्रीकृष्ण की मूर्ति

मंदिर की व्यवस्था देख रहे महात्मा ऋषिराज ने बताया कि थापरनगर में यह मंदिर 1952 में स्थापित हुआ था। पाकिस्तान के पेशावर से आकर बसे बाबा अर्जुनराज ने इस मंदिर की स्थापना की थी। भारत-पाक विभाजन के बाद जब पाकिस्तान में धर्म के आधार पर हिंसक घटनाएं होने लगी तो बाबा अर्जुनराज इस मूर्ति को भारत लेकर आ गए।

भारतीय वायु सेना की सहायता से मूर्ति को अंबाला तक लाया गया, उसके बाद मेरठ के थापरनगर में मूर्ति को लाकर स्थापित किया गया। मंदिर के लिए 410 स्क्वायर फीट की भूमि भी 1950 में बाबा अर्जुनराज ने खरीदी थी। 1986 में उनका निधन हो गया। इसके बाद उनके शिष्य डा. नगेंद्र मुनि ने मंदिर की व्यवस्था संभाली। 2014 में उनका भी निधन हो गया।

मंदिर में केवल विराजमान हैं ठाकुर जी और 16 शिलाखंड

74 वर्ष पुराने श्रीकृष्ण मंदिर थापरनगर में केवल श्रीकृष्ण की मूर्ति विराजमान है, यहां पर राधा जी की प्रतिमा नहीं है। श्रीकृष्ण के साथ गोवर्धन पर्वत के 16 शिलाखंड भी विराजमान हैं, जिन्हें भगवान ने इंद्र के प्रकोप से बचने के लिए अपनी अनामिका अंगुली पर उठाकर ब्रजवासियों की रक्षा की थी।

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