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    यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Sep 21, 2018 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

    मेरठ: ट्रैफिक सेंस के‍ लिए किया जाएगा जागरूक, अब हरेक शख्‍स बनेगा 'ड्राइवर'

    By Krishan KumarEdited By:
    Updated: Thu, 20 Sep 2018 06:03 AM (GMT+05:30)

    मेरठ का रोड सेफ्टी क्लब अक्टूबर महीने में सभी विभागों के ड्राइवरों को ट्रेनिंग देगा। ...और पढ़ें

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    जागरण संवाददाता, मेरठ : ट्रैफिक सेंस मौजूदा वक्त की जरूरत है, यह हर उस व्यक्ति में होना चाहिए जो वाहन चला लेता है या सीख रहा है। वाहन चलाने का दावा तो ज्यादातर लोग कर देते हैं लेकिन कम ही लोग ऐसे हैं जिन्हें ट्रैफिक नियमों की जानकारी होती है। दुर्घटनाओं को रोकने और दूसरों की मुसीबत कम करने के लिए ट्रैफिक सेंस विकसित करने की शुरुआत की गई है।

    'दैनिक जागरण' के 'माय सिटी माय प्राइड' अभियान के तहत शहर को संवारने के लिए 11 लक्ष्य तय किए गए थे। उसमें एक लक्ष्य यह भी है कि ट्रैफिक सेंस विकसित किया जाएगा। इसकी जिम्मेदारी 'रोड सेफ्टी क्लब' को दी गई थी । क्लब के संचालक अमित नागर वैसे तो इस क्षेत्र में पहले से कार्य कर रहे हैं मगर जब इसे एक विशेष लक्ष्य के रूप में चुना गया तो इसके विस्तार की योजना बनाई गई। जिसमें तय किया गया कि अक्टूबर महीने में सभी विभागों के ड्राइवरों को ट्रेनिंग दी जाएगी। इसमें अधिकारियों की गाड़ी चलाने वाले, बस ड्राइवर या अन्य विभागीय वाहन चलाने वाले शामिल होंगे।

    स्‍कूल कॉलेजों में दिलाई जाएगी शपथ
    अक्टूबर महीने में ही प्रत्येक स्कूल में सुबह स्कूल-कॉलेजो में शपथ दिलाई जाएगी। प्रत्येक स्कूल से कुछ छात्र चयनित किए जाएंगे और उन्हें डीएन कॉलेज स्थित ट्रैफिक पार्क लाकर ट्रेनिंग दी जाएगी। ये छात्र सीखने के बाद वापस जाकर अपने सहपाठियों को जानकारी साझा करेंगे। प्रदेश के परिवहन मंत्री ने इस अभियान में साथ देने के लिए प्रति दिन शपथ के समय ट्रैफिक पुलिस या परिवहन विभाग के एक अधिकारी को उपस्थित रहने का आदेश कर दिया है।

    अक्टूबर महीने में विभागीय ड्राइवरों की ट्रेनिंग पूरी होने के बाद सितंबर में ऐसे लोगों की ट्रेनिंग होगी जो स्वयं के वाहन से ऑफिस आते हैं। इस लक्ष्य के पूरा होने पर शहर के अधिकांश ऐसे लोग जो गाड़ी चला लेते हैं वे एक अच्छे ड्राइवर भी बन जाएंगे। जिनमें ट्रैफिक सेंस होगा। नियमों के प्रति जागरूकता होगी। इससे सड़क दुर्घटनाओं में कमी आएगी।

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