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    मेरठ में अधिकारियों ने चस्पा किए 44 सील संपत्तियों पर नोटिस, ये काम ना किया तो होगा ध्वस्तीकरण

    By Anuj Sharma Edited By: Praveen Vashishtha
    Updated: Sun, 26 Jul 2026 01:31 PM (IST)

    मेरठ के शास्त्रीनगर में सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर सील 44 भवनों को ध्वस्त करने का आदेश दिया गया है, जिन पर आवास विकास ने नोटिस चस्पा कर 15 दिन में मूल आ ...और पढ़ें

    मेरठ में धरने पर बैठीं शास्त्री नगर सेक्टर-2 की महिलाएं। जागरण

    मेरठ में धरने पर बैठीं शास्त्री नगर सेक्टर-2 की महिलाएं। जागरण

    HighLights

    1. मेरठ में 44 सील भवनों पर ध्वस्तीकरण का नोटिस।

    2. 15 दिन में मूल आवासीय रूप में लाने का आदेश।

    3. मुख्यमंत्री के सलाहकार आवंटियों से करेंगे वार्ता।

    जागरण संवाददाता, मेरठ। शास्त्रीनगर में सुप्रीम कोर्ट के आदेश से सील 44 भवनों को अब कोर्ट ने ध्वस्त करने का आदेश दिया है। इन भवनों पर आवास विकास के अफसरों ने शनिवार देर शाम तक नोटिस चस्पा कर दिए। इसमें भवन को उसके मूल आवासीय रूप में लाने के लिए 15 दिन का समय दिया गया है। इसके बाद आवास विकास परिषद ने ध्वस्तीकरण की चेतावनी दी है।

    वहीं, पिछले कई दिन से इन 44 भवनों के मालिकों से मालिकाना हक संबंधी दस्तावेज प्राप्त किए जा रहे हैं। इनमें करीब 17 भवन ऐसे हैं जो बहुस्वामी हैं, जिनमें बड़ी संख्या में दुकानें और अन्य निर्माण हैं। इनमें प्रत्येक मालिक का हिस्सा निर्धारित करना मुश्किल काम है। उधर, मुख्यमंत्री के सलाहकार सोमवार को फिर मेरठ आकर आवंटियों से वार्ता करेंगे। ईडब्ल्यूएस तथा एलआइजी भवनों के आवंटियों द्वारा शुक्रवार को वार्ता में रखे गए प्रस्तावों पर भी वे चर्चा करेंगे।

    सोमवार को आएंगे अधिकारी, आनन-फानन में चस्पा किए नोटिस
    मुख्यमंत्री के सलाहकार अवनीश अवस्थी, प्रमुख सचिव आवास पी गुरु प्रसाद और आवास आयुक्त बलकार सिंह ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद 17 जुलाई को मेरठ पहुंचकर शास्त्रीनगर के प्रभावित आवंटियों और व्यापारियों से वार्ता की थी। 44 सील भवनों के ध्वस्तीकरण की दिशा में मजबूत कार्रवाई करनी थी, लेकिन अधिकारी इस दौरान इनसे वार्ता करते रहे। 44 भवनों में से 17 भवन ऐसे हैं जो बहुस्वामी हैं। इनमें काफी संख्या में दुकानें व अन्य भवन हैं। इन मालिकों की हिस्सेदारी स्पष्ट करने के लिए सभी से मालिकाना हक के दस्तावेज जमा कराए जा रहे थे।

    शनिवार तक लगभग 80 प्रतिशत लोगों के ही दस्तावेज जमा हो सके थे। दिनभर अधिकारी सोमवार से इन 44 भवनों को नोटिस जारी करने का दावा कर रहे थे, लेकिन अचानक शनिवार शाम को ही आवास विकास की टीमें निकली और सभी 44 भवनों पर देर शाम तक नोटिस चस्पा कर दिए गए। इन नोटिसों में 15 दिन में भवन को उसके मूल मानचित्र के मुताबिक आवासीय रूप में लाने के लिए कहा गया है। ऐसा न करने पर भवन का ध्वस्तीकरण करने की चेतावनी नोटिस में दी गई है। नोटिस चस्पा करने की अधिकारियों की इस जल्दबाजी को सोमवार को उच्चाधिकारियों के आगमन से जोड़कर देखा जा रहा है।

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    मुख्यमंत्री के सलाहकार के सामने रखे जाएंगे आवंटियों के प्रस्ताव
    अवनीश अवस्थी ने 27 जुलाई को फिर से मेरठ आकर आवंटियों से वार्ता करने की घोषणा 17 जुलाई को की थी। उसी के मद्देनजर प्रशासन और आवास विकास परिषद के अधिकारियों ने आवंटियों से कई बार वार्ता करके सहमति बनाने का प्रयास किया जो सफल नहीं हो सका। सेक्टर दो, तीन और चार के ईडब्ल्यूएस और एलआइजी श्रेणी के आवंटियों ने शुक्रवार को दो चरण की वार्ता में अफसरों को चार प्रस्ताव दिए हैं। इनमें दुकान के बदले निश्शुल्क दुकान देने, दुकान मिलने तक प्रभावित परिवारों को आजीविका के लिए 50 हजार रुपये प्रति माह मुआवजा देने, सेटबैक का स्थान खाली करने की कार्रवाई में ध्वस्त होने वाले मकानों के बदले में मकान देने की मांग है।

    साथ ही री-डेवलपमेंट के प्रस्ताव को उन्होंने मानने से इन्कार कर दिया है। आवास विकास परिषद के उप आयुक्त आवास अनिल सिंह ने बताया कि आवंटियों के इन प्रस्तावों को मुख्यमंत्री के सलाहकार तथा अन्य उच्चाधिकारियों के सामने रखा जाएगा। वह खुद आवंटियों से इस संबंध में सीधी बात करेंगे।

    बरसात में भी जारी रहा महिलाओं का धरना
    शास्त्रीनगर सेक्टर दो तथा गोल मंदिर के पास चल रहा महिलाओं का धरना शनिवार को भी जारी रहा। हालांकि, दिन में कई घंटे तक रुक-रुककर बरसात होती रही लेकिन महिलाएं धरने पर जमी रहीं। सेक्टर तीन और चार की महिलाओं के गोल मंदिर के पास चल रहे धरने में सुबह हनुमान चालीसा तथा शाम को अमृतवाणी का पाठ किया गया। सेक्टर दो के धरने में भी महिलाएं बैठीं रहीं। यहां भी सुबह हनुमान चालीसा और दिनभर भजनों का सिलसिला चलता रहा। धरने पर बैठी महिलाओं का कहना है कि संकट का समाधान होने तक उनका शांतिपूर्ण आंदोलन चलता रहेगा।