Ganga Expressway से सटाकर विकसित हो रहे इंडस्ट्रियल कॉरिडोर में अड़चन, भूमि के सत्यापन में चौंकाने वाले तथ्य उजागर
मेरठ में औद्योगिक गलियारा के दूसरे चरण का भूमि क्रय प्रस्ताव डेढ़ साल से अटका है। कमिश्नर के 9 बिंदुओं पर सत्यापन कार्य शुरू हुआ तो चौंकाने वाले तथ्य ...और पढ़ें

इंडस्ट्रियल कॉरिडोर का प्रस्ताव अटका (AI Generated Image)
HighLights
औद्योगिक गलियारा के दूसरे चरण के लिए तीन गांवों की 292 हेक्टेयर जमीन है चिह्नित।
कमिश्नर ने लगाई थी क्रय प्रस्ताव पर नौ आपत्तियां, उन्हीं की जांच में सामने आया खेल।
जागरण संवाददाता, मेरठ। गंगा एक्सप्रेसवे से सटाकर विकसित किए जा रहे औद्योगिक गलियारा के दूसरे चरण के लिए चिह्नित तीन गांवों की 292 हेक्टेयर भूमि का क्रय प्रस्ताव डेढ़ साल में भी तैयार नहीं हो सका है। उसके रास्ते में तालाब और अन्य श्रेणी की सरकारी भूमि पर निजी नाम दर्ज हो जाना बाधा बन गया है।
जिला प्रशासन से मिले क्रय प्रस्ताव पर मंडलायुक्त ने 9 आपत्तियां लगाते हुए उनकी जांच का आदेश दिया था। इस जांच में ही सामने आया है कि कई स्थानों पर तालाबों की भूमि में निजी नाम दर्ज कर दिए गए हैं। प्रस्ताव में शामिल प्रत्येक भूमि के मालिकाना हक का सत्यापन किया जा रहा है। जिसमें चकबंदी विभाग से भी रिपोर्ट मांगी गई है।
उत्तर प्रदेश एक्सप्रेसवेज औद्योगिक विकास प्राधिकरण ने मेरठ में औद्योगिक गलियारा (Industrial Corridor) के दूसरे चरण के तहत तीन गांवों खड़खड़ी, गोविंदपुर और छतरी की 292 हेक्टेयर जमीन को चिह्नित किया था। इस जमीन का क्रय प्रस्ताव लगभग डेढ़ साल पहले दिसंबर 2024 में जिला प्रशासन से मांगा गया था। किसानों के विरोध के चलते यह प्रस्ताव तैयार करने में विलंब हुआ।
दिसंबर 2025 में क्रय प्रस्ताव तैयार करके मेरठ मंडलायुक्त (Commissioner Meerut) के पास भेजा गया तो उन्होंने क्रय प्रस्ताव में शामिल भूमि के मालिकाना हक के सत्यापन को लेकर 9 आपत्तियां लगाई और प्रस्ताव को वापस भेज दिया।
उन्होंने 1359 फसली और 12 साला रिकार्ड का सत्यापन कराने का आदेश दिया था। कमिश्नर के 9 बिंदुओं पर सत्यापन कार्य शुरू हुआ तो चौंकाने वाले तथ्य सामने आ रहे हैं। कई स्थानों पर नियम विरुद्ध तालाब की भूमि पर पट्टे काटकर उन पर निजी नाम दर्ज कर दिए गए।
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नए सिरे से हो रहा मालिकाना हक का सत्यापन, चकबंदी से भी मांगी रिपोर्ट
तालाब की भूमि पर नाम दर्ज करने के मामले सामने आते ही क्रय प्रस्ताव में शामिल सभी प्रकार की भूमि के मालिकाना हक का नए सिरे से सत्यापन किया जा रहा है। जिला प्रशासन ने तहसील प्रशासन और चकबंदी विभाग से सत्यापन के बाद रिपोर्ट मांगी है।सत्यापन के दौरान सामने आया है कि 1359 फसली में तालाब के रूप में दर्ज सरकारी भूमि पर वर्तमान में निजी नाम दर्ज हैं।
जिन्हें पट्टे के आधार पर दर्ज किए जाने का विवरण मिला है। जबकि तालाब की भूमि पर पट्टे आवंटित नहीं किए जा सकते हैं। चकबंदी विभाग की रिपोर्ट अभी जिला प्रशासन को नहीं मिली है।
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किसने दर्ज किए नाम, हो रही जांच
सत्यापन के साथ साथ इस बात की भी जांच की जा रही है कि सरकारी भूमि पर निजी नाम किस अधिकारी ने दर्ज किए। ऐसे अधिकारियों के नाम की सूची भी तैयार की जा रही है।जिससे अधिकारियों और कर्मचारियों में खलबली मची है।
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इन्होंने कहा.....
औद्योगिक गलियारा के दूसरे चरण की भूमि के क्रय प्रस्ताव में शामिल भूमि के मालिकाना हक का सत्यापन कराया जा रहा है। इसमें तालाब की भूमि भी शामिल है।ऐसे प्रकरणों की जांच चल रही है। मंडलायुक्त के बिंदुओं के मुताबिक भूमि का क्रय प्रस्ताव तैयार कराकर जल्द भेजा जाएगा।
-डा. वीके सिंह, जिलाधिकारी