PHOTO: आस्था व भक्ति के 'महाकुंभ' पर उमड़े शिवभक्त; मेरठ के औघड़नाथ मंदिर समेत अन्य शिवालयों में जलाभिषेक शुरू
कांवड़ यात्रा में लाखों शिवभक्त गंगाजल लेकर अपने गंतव्य की ओर लौटे। मंगलवार को शिवरात्रि पर्व पर जलाभिषेक शुरू हो ...और पढ़ें

जागरण संवाददाता, मेरठ। हरिद्वार से गंगाजल लेकर चले लाखों शिवभक्त अब अपने-अपने गंतव्य की ओर लौट रहे हैं। मंगलवार को औघड़नाथ मंदिर समेत अन्य शिवालयों में जलाभिषेक शुरू हो गया। इससे पूर्व श्रावण मास के दूसरे सोमवार को शहर के विभिन्न मंदिरों में श्रद्धालुओं ने जलाभिषेक किया।

श्रावण मास के दूसरे सोमवार को बाबा श्री बिल्वेशवर नाथ महादेव मन्दिर मे जलाभिषेक करते श्रद्धालुगण।

बाबा श्री बिल्वेशवर नाथ महादेव मन्दिर मे अपने आराध्य को जलाभिषेक करते श्रद्धालुगण
मंगलवार सुबह ब्रह्म मुहूर्त में 4:54 बजे से चतुर्दशी का जलाभिषेक शुरू हुआ। चतुर्दशी तिथि रात 12:53 बजे तक रहेगी। अधिकांश कांवड़िये त्रयोदशी व चतुर्दशी दोनों तिथियों का जलाभिषेक करते हैं। शिवरात्रि पर भगवान शिव की पूजा, अर्चना, जाप, अनुष्ठान व रुद्राभिषेक का विशेष महत्व है।

औघड़नाथ मंदिर का गरुड़ द्वार, जहां से कांवडियों का प्रवेश होगा।
औघड़नाथ मंदिर समेत शहर के सभी शिवालयों में शिवरात्रि पर्व को लेकर तैयारी की गई। शिवरात्रि पर शिवालयों को लाइटों से सजाया गया है। मुख्य रूप से औघड़नाथ मंदिर के शिखर को सुनहरे रंग की रोशनी से जगमग किया गया है। मंदिर प्रांगण से लेकर बाहर सड़क तक लोहे के पाइपों से बैरिकेडिंग की गई है।
गरुड़ द्वार पर दो कतारों से शिवभक्त बाबा औघड़दानी के दरबार में प्रवेश करेंगे और जलाभिषेक करने के बाद मंदिर कार्यालय के पास नंदी द्वार से निकासी की जाएगी। मंदिर के बाहर निश्शुल्क चिकित्सा शिविर, खोया-पाया केंद्र, पुलिस-प्रशासनिक कैंप स्थापित किया गया है।

बाबा श्री औघड़नाथ मन्दिर आए शिवभक्तों की सेवा करते सेना के जवान व पुलिस।
औघड़नाथ मंदिर प्रांगण स्थित सत्संग भवन में कांवड़ियों के विश्राम की व्यवस्था की गई है। स्थानीय कांवड़ियों के आने का सिलसिला शुरू हो गया है। श्री बाबा औघड़नाथ शिव मंदिर समिति के अध्यक्ष सतीश सिंघल ने बताया कि चतुर्दशी के जल के लिए सुबह साढ़े चार बजे आरती होगी और उसके बाद जलाभिषेक शुरू कर दिया जाएगा। सुबह से लेकर दोपहर तक सबसे पहले कांवड़िये जलाभिषेक करेंगे, इसके बाद श्रद्धालु दर्शन कर सकते हैं।

सरलता से प्रसन्न होते हैं भगवान शिव
औघड़नाथ मंदिर के पुजारी पंडित सारंग त्रिपाठी कहते हैं कि भगवान शिव बेहद सरल हैं। इसलिए उन्हें भोले भी कहा जाता है। वह भक्त के भाव से भी प्रसन्न हो जाते हैं। लेकिन कुछ विशेष पदार्थ व द्रव्य हैं, जिनसे महादेव को अर्पित कर उनकी कृपा प्राप्त होती है। शिवलिंग पर गंगाजल, दूध, घी, चंदन, बेलपत्र, धतूरा, अक्षत आदि को ओम नम: शिवाय जाप के साथ अर्पित करें।

शिवभक्त कंधों पर कांवड़ लिए आगे बढ़ रहे हैं। आस्था का जोश है इसलिए थकान चेहरे पर स्पष्ट नहीं हो पा रही है। सड़कों पर जगह-जगह सेवा शिविर लगे हैं। कहीं भोजन की तो कहीं चिकित्सा की व्यवस्था है। सेवा में जुटे लोग भोजन परोस रहे हैं तो कहीं पैरों में मालिश कर रहे हैं। स्थानीय लोग और सामाजिक संगठन सेवा में समर्पित दिखाई दे रहे हैं।

उधर, सुरक्षा व्यवस्था के अंतर्गत ड्रोन से निगरानी हो रही है। जगह-जगह बैरिकेडिंग है और पुलिस बल तैनात है। मंगलवार को शिवरात्रि पर्व पर अभिषेक होगा, जिसके लिए मंदिरों को को फूलों और रोशनी से सजाया गया है।

हरिद्वार से जल लेकर आते शिवभक्त को प्रसाद देते पुलिसकर्मी।
घंटियों की गूंज पूरे वातावरण को भक्तिमय बना रही है। औघड़नाथ मंदिर में लाखों शिवभक्त जलाभिषेक करेंगे, जिसके लिए जिलाधिकारी व एसएसपी ने निरीक्षण किया। बम निरोधक दस्ते ने भी परिसर का निरीक्षण किया। मंदिर के बाहर मेला सज चुका है। चिकित्सा कैंप लगे हैं। सावन का दूसरा सोमवार होने के कारण इस दिन भी यहां पर भक्तों ने जलाभिषेक किया।
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