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मेरठ में सुप्रीम कोर्ट के कड़े रुख के बाद मेडा सचिव पर गिरी गाज, पद से हटाए गए

Published: Thu, 24 Sep 2026 03:14 AM (IST)

सुप्रीम कोर्ट की सख्ती के बाद मेरठ में अवैध निर्माण और व्यावसायिक गतिविधियों पर कार्रवाई तेज हो गई है, जिसके ...और पढ़ें

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HighLights

  1. सुप्रीम कोर्ट की सख्ती के बाद मेडा सचिव अर्पित गुप्ता हटाए गए।

  2. मेरठ जोन-ए में 16,726 अवैध संपत्तियों को सील करने का आदेश।

  3. अन्य जोनों में भी अवैध व्यावसायिक गतिविधियों वाली संपत्तियां चिह्नित होंगी।

जागरण संवाददाता, मेरठ। सेंट्रल मार्केट में अवैध निर्माण और आवासीय संपत्तियों में व्यावसायिक गतिविधियों के मामले में सुप्रीम कोर्ट की सख्ती के बाद अब कार्रवाई पूरे शहर की तरफ बढ़ रही है। हाल ही में सुप्रीम कोर्ट में सर्वे रिपोर्ट प्रस्तुत करने के दौरान अपना पक्ष ठीक से न रख पाने पर शासन ने मेरठ विकास प्राधिकरण (मेडा) के सचिव अर्पित गुप्ता को हटाकर लखनऊ से संबद्ध कर दिया है।

सचिव का कार्यकाल करीब तीन महीने ही रहा।सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को जोन-ए में मेडा द्वारा चिह्नित 16,726 ऐसी संपत्तियों को सील करने के आदेश दिए, जिनमें अवैध रूप से व्यावसायिक गतिविधियां संचालित होने की बात सामने आई है। कोर्ट ने जोन-बी, सी और डी में भी इसी तरह की संपत्तियों को चिह्नित करने के निर्देश दिए हैं। मामले की अगली सुनवाई नौ दिसंबर को होगी।

न्यायमूर्ति जेबी पार्डीवाला और न्यायमूर्ति केवी विश्वनाथन की पीठ के समक्ष हुई सुनवाई में मेरठ में अवैध निर्माण और अवैध कालोनियों को लेकर अधिकारियों से जवाब मांगा गया। आधिकारिक सूत्रों के अनुसार मेडा सचिव अर्पित गुप्ता से सुप्रीम कोर्ट ने जब यह पूछा कि जोन ए में अवैध निर्माण कितने पुराने हैं तो सचिव संतोषजनक जवाब नहीं दे पाए।

वह कोर्ट को यह भी स्पष्ट नहीं कर पाए कि शहरी नियोजन अधिनियम के तहत अवैध निर्माण करने वालों को पहले नोटिस देकर सुनवाई का मौका दिया जाता है और फिर निर्माणकर्ता द्वारा संतोषजनक जवाब न देने पर सीलिंग की कार्रवाई होती है। इस बारे में शासन के उच्च अधिकारियों ने मंडल के एक वरिष्ठ अधिकारी से फीडबैक लिया तो उन्होंने सचिव द्वारा कोर्ट के समक्ष मेडा का पक्ष सही से न रख पाने की बात कही।

माना जा रहा है कि इन्हीं सब के चलते सचिव को हटाया गया है। मामला अब हजारों संपत्तियों तक पहुंचाशास्त्रीनगर सेंट्रल मार्केट में आवासीय संपत्तियों के व्यावसायिक इस्तेमाल और स्वीकृत मानचित्र के विपरीत निर्माण के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने 44 संपत्तियों में कार्रवाई के आदेश दिए थे। आवास एवं विकास परिषद की ओर से पेश अनुपालन रिपोर्ट में बताया गया कि 44 में से 20 संपत्तियों में पूरी तरह अवैध निर्माण हटाया जा चुका है।

शेष 24 संपत्तियों के अवैध निर्माण भी हटाए जा रहे हैं। सोमवार की सुनवाई में मामला और व्यापक हो गया। मेडा के जोन-ए में आवासीय क्षेत्र में चल रही व्यावसायिक गतिविधियों पर 16,726 संपत्तियों की सीलिंग के निर्देश दिए गए। अदालत ने दूसरे जोन में भी ऐसी संपत्तियों की पहचान करने को कहा है। हजारों संपत्तियों से जुड़े इस मामले में कार्रवाई का असर भवन स्वामियों और व्यापारियों पर भी पड़ना तय माना जा रहा है।

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