'Namo Bharat शहर तक लाई, घर सुरक्षित छोड़ना आपकी जिम्मेदारी,' NCRTC की कार्यशाला में महिला यात्रियों की सुरक्षा पर जोर
Meerut News : मेरठ में ई-रिक्शा, आटो व टैक्सी चालकों ने एनसीआरटीसी की कार्यशाला में महिला यात्रियों के साथ सम्मानजनक व्यवहार करने और उन्हें सुरक्षित घ ...और पढ़ें

वर्कशाप को संबोधित करतीं डा. मुक्ता अरोड़ा और उपस्थित ई-रिक्शा चालक, कैब ड्राइवर एवं मेट्रो यात्री। जागरण
HighLights
एनसीआरटीसी ने महिला सुरक्षा हेतु 'आकांक्षाओं के पंख' अभियान चलाया।
कार्यशाला में सम्मानजनक व्यवहार और लैंगिक समानता पर जोर दिया गया।
जागरण संवाददाता, मेरठ। ई-रिक्शा, आटो व टैक्सी चालकों ने सामाजिक जिम्मेदारी निभाते हुए सराहनीय पहल की है। एनसीआरटीसी के कार्यक्रम में उन्होंने महिला सुरक्षा को लेकर महत्वपूर्ण वादा किया। कहा, वे यात्रियों के साथ सम्मानजनक व्यवहार करेंगे। खासतौर पर महिला यात्रियों को स्टेशन से उनके घर तक सुरक्षित पहुंचाएंगे। न घूरेंगे न कोई आपत्तिजनक आचरण करेंगे। दिन हो या रात, सभ्य नागरिक की तरह शहर की छवि बेहतर बनाने में भी योगदान देंगे।
उनकी इस पहल से न केवल महिलाओं को अपने आसपास मजबूत सुरक्षा घेरा महसूस होगा बल्कि सार्वजनिक परिवहन के प्रति भी उनका भरोसा बढ़ेगा। उक्त चालक राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र परिवहन निगम (NCRTC) की ओर से बेगमपुल पर आयोजित कार्यशाला में पहुंचे थे। इस दौरान एनसीआरटीसी के अधिकारियों ने चालकों से आह्वान किया गया कि नमो भारत और मेरठ मेट्रो यात्रियों को दिल्ली या शहर से सुरक्षित लेकर आती हैं, लेकिन इसके बाद उन्हें घर या मुहल्ले तक पहुंचाने की जिम्मेदारी आपकी ही है।
मेट्रो और, नमो भारत के यात्रियों में महिलाएं बड़ी संख्या में शामिल हैं। रात में अंतिम ट्रेन 10 बजे के बाद पहुंचती है। एनसीआरटीसी चाहता है कि जिस तरह से विश्व की अत्याधुनिक परिवहन सेवा में नमो भारत ने पहचान बनाई है, उसी तरह यहां के आटो चालक भी अपने व्यवहार से शहर की छवि सुंदर बनाएं। एनसीआरटीसी की ओर से 24 मार्च से ‘आकांक्षाओं के पंख’ अभियान शुरू किया गया है। इसी के अंतर्गत आटो चालकों के साथ अब लगातार पांच साल तक कार्यशाला व जागरूकता कार्यक्रम किए जाएंगे। इसी कड़ी में शहर में पहली कार्यशाला बेगमपुल पर हुई। इसमें बड़ी संख्या में चालक आमंत्रित किए गए थे।
जेंडर सेंसटाइजेशन विशेषज्ञ डा. मुक्ता अरोड़ा ने कहा कि महिलाओं के साथ संवेदनशीलता और सम्मान सबसे जरूरी है। ऐसा माहौल बनाया जाए, जिसमें कोई महिला खुद को असहज महसूस न करे। महिलाओं को सुरक्षित घर तक पहुंचाना हम सभी की जिम्मेदारी है। उन्होंने रिक्शा चालकों को प्रशिक्षण देते हुए कहा कि बातचीत में शालीनता रखें और अनावश्यक टिप्पणी से बचें। महिलाओं को घूरने, स्पर्श, छेड़छाड़ जैसी हरकतें न करें। सुरक्षा को प्राथमिकता दें। कार्यशाला में सुरक्षित माहौल, संवेदनशील व्यवहार और लैंगिक समानता जैसे विषयों पर विस्तार से जानकारी दी गई।
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नुक्कड़ नाटकों से भी करेंगे जागरूक
कार्यशाला में एनसीआरटीसी के प्रतिनिधि ने बताया कि यह अभियान भारत सरकार के निर्भया फंड के अंतर्गत शुरू किया है। इसका उद्देश्य महिलाओं की सुरक्षा के प्रति संवेदनशीलता बढ़ाना और यात्रियों को जागरूक करना है। कार्यशाला के साथ ही फिल्मों, नुक्कड़ नाटकों और सामुदायिक सहभागिता कार्यक्रमों के माध्यम से जागरूकता कार्यक्रम किए जाएंगे। एनसीआरटीसी इस अभियान के माध्यम से केवल यात्री सुविधाओं को ही नहीं, बल्कि सोच और दृष्टिकोण को बदलने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठा रहा है।