Trending

    विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

    मेरठ का आबूनाला ढकने की तैयारी, जापान की कंपनी से संपर्क; इस खास तकनीक से होगा निर्माण

    By Dileep Patel Edited By: Praveen Vashishtha
    Updated: Thu, 29 Jan 2026 01:52 PM (IST)

    Meerut News : मेरठ में आबूनाला को ढकने की प्रक्रिया शुरू हो गई है, जो लंबे समय से गंदगी और दुर्गंध का स्रोत था। प्री-कास्ट तकनीक से नाले को ढककर ऊपर स ...और पढ़ें

    मेरठ का आबूनाला

    मेरठ का आबूनाला

    HighLights

    1. नगर निगम ने एनडीएमए को पत्र भेजकर मांगा सहयोग

    2.  एक एजेंसी के माध्यम से तैयार कराया जाएगा प्रस्ताव

    जागरण संवाददाता, मेरठ। शहर के बीचोंबीच गुजरने वाले आबूनाला के ढकने की कवायद शुरू हो चुकी है। यह नाला लंबे समय से गंदगी और दुर्गंध का पर्याय बन चुका है। इस योजना को अमलीजामा पहनाने के लिए नगर निगम ने राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण ( NDMA) को पत्र भेजकर अनुमति और सहयोग मांगा है। इसके लिए प्री कास्ट तकनीक अपनाई जाएगी।

    आबूनाला शहर की जलनिकासी का प्रमुख नाला है। ढकने के बाद जलभराव की स्थिति न बने, इसके लिए राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण की तकनीकी सलाह और अनापत्ति आवश्यक है। नगर आयुक्त सौरभ गंगवार का कहना है कि कैंट क्षेत्र से लेकर नगर निगम क्षेत्र के आबादी वाले हिस्से को प्री-कास्ट तकनीक से कवर्ड करने का खाका एनडीएमए में पेश किया गया है। केंद्र सरकार से इसके लिए बजट की मांग की जाएगी।

    नाला ढकने और उसके ऊपर सड़क निर्माण में आने वाले खर्च का आंकलन एजेंसी के माध्यम से कराया जाएगा। एक जापान की कंपनी से संपर्क किया गया है। जल्द एनडीएमए की टीम नाले का सर्वे करेगी। नाले के किनारे से सफाई के लिए मैनहोल दिए जाएंगे।

    नगर आयुक्त ने यह स्पष्ट किया कि अब नगर निगम प्री-कास्ट तकनीक से नाले को कवर्ड करने का काम करेगा। प्री-कास्ट तकनीक में स्लैब पहले से फैक्ट्री में तैयार किए जाते हैं। मौके पर लाकर उनको एक के बाद एक जोड़ते हुए नाला बनाया जाता है। दिल्ली रोड के नाले को प्री-कास्ट तकनीक से ढकने के लिए 32 करोड़ रुपये स्वीकृति किए जा चुके हैं।

    खबरें और भी

    लंबे समय से खुले नाले को ढकने की हो रही मांग

    चाहे आबूलेन व्यापार संघ हो या बेगमपुल से लेकर कचहरी पुल तक, मोहनपुरी और फूलबाग कालोनी के लोग हों, नाले को ढककर उसके ऊपर सड़क, पार्किंग, स्ट्रीट वेंडिंग बनाने की मांग लंबे समय से चल रही है। खुले नाले में आबादी क्षेत्र में आए दिन कोई न कोई गिरता रहता है। गत दिनों कैंट क्षेत्र में काठ पुल के पास एक ई-रिक्शा चालक की मौत भी इसी नाले में गिरने से हो चुकी है।

    पांच लाख आबादी की जलनिकासी का है नाला

    आबूनाला बेगमपुल वाला नगला ताशी कंकरखेड़ा से शुरू होता है। कैंट क्षेत्र से होते हुए नगर निगम के क्षेत्र में बेगमपुल के पास प्रवेश करता है। रंगोली मंडप के पास तक आबादी क्षेत्र है। इसके बाद आगे काली नदी में जाकर गिरता है। लगभग 14 किमी लंबा है। इमसें छोटे-बड़े लगभग 50 से ज्यादा नाले जुड़े हैं। लगभग पांच लाख आबादी की जलनिकासी इस पर निर्भर है।

    नाले किनारे कैंट क्षेत्र में हनुमान चौक वाली रोड की पुलिया से लेकर बेगमपुल तक सड़क है। बेगमपुल से दयानंद नर्सिंग होम होते हुए कचहरी पुल, मोहनपुरी विक्टोरिया पुल, फूलबाग कालोनी होते हुए मंगलपांडे नगर तक नाले किनारे सड़क है। जिस पर काफी आवागमन है।