मेरठ वाले ध्यान दें! मेट्रो और नमो भारत ट्रेन में न हो कंफ्यूज, इन आसान तरीकों से पहचानें दोनों में अंतर
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने रविवार को देश की प्रथम रीजनल रैपिड रेल नमो भारत के शेष हिस्से और मेरठ मेट्रो ...और पढ़ें

Namo Bharat Train और Meerut Metro में अंतर (AI की मदद से तैयार तस्वीर)
HighLights
दाेनों ट्रेनें एक ही कारिडोर पर संचालित।
दोनों का प्लेटफार्म अलग-अलग।
जागरण संवाददाता, मेरठ। देश की राजधानी के पड़ोसी शहर अब 45 किमी की औसत गति से दौड़ने वाली मेट्रो से नहीं बल्कि 160 किमी की गति से दौड़ने वाली नमो भारत ट्रेनों से जुड़ेंगे। दिल्ली से गाजियाबाद व मेरठ को जोड़ने के लिए इसकी शुरुआत हो गई है।
रविवार को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने मेरठ से देश के पहले रीजनल रैपिड रैपिड ट्रांजिट सिस्टम आरआरटीएस पर नमो भारत को हरी झंडी दिखाई। इसके साथ ही एक इंफ्रास्ट्रक्चर में देश ने नई क्रांति की। सेमी हाईस्पीड ट्रेन के ट्रैक पर ही मेरठ मेट्रो भी दौड़ेगी, जिसकी अधिकतम गति 120 किमी है।
मेरठ मेट्रो देश की पहली ऐसी मेट्रो बन गई है जो इतनी अधिक गति से दौड़ रही है। दिल्ली समेत अन्य शहरों के मेट्रो की अधिकतम गति 90 किमी प्रति घंटे है।
राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र परिवहन निगम एनसीआरटीसी ने पहला कारिडोर दिल्ली-गाजियाबाद-मेरठ तैयार किया है जिसकी लंबाई 82 किमी है। कुछ वर्षों में दो नए कारिडोर भी तैयार हो जाएंगे जिनमें दिल्ली-गुरुग्राम और दिल्ली-पानीपत शामिल हैं।
ऐसे पहचाने मेट्रो और नमो भारत ट्रेन
दाेनों ट्रेनें एक ही कारिडोर पर संचालित हो रही हैं हालांकि दोनों का प्लेटफार्म अलग-अलग है। फिर भी इन्हें पहचानने में समस्या हो सकती है। इसलिए इस तरह से पहचानें कि नमो भारत ट्रेन में छह कोच हैं, जिनमें पहला कोच प्रीमियम है और दूसरा कोच महिलाओं के लिए आरक्षित है।
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वहीं, मेरठ मेट्रो में तीन कोच हैं। यात्रियों के पहचानने के लिए इनके बाहरी रंग को भी अलग किया गया है। नमो भारत में जहां बाहरी बाडी पर मरून रंग की धारी है तो वहीं मेट्रो पर पैरट ग्रीन (तोतई) रंग की धारी हैं। मेट्रो के दरवाजों पर धारियों जैसा ही रंग है और फ्रंट पर तिरंगा बना है।
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दिल्ली मेट्रो, रेलवे स्टेशनों और बस अड्डों से जोड़े गए नमो भारत के स्टेशन
नमो भारत स्टेशनों को एयरपोर्ट, रेलवे स्टेशन, बस टर्मिनल, दिल्ली मेट्रो स्टेशन और एक्सप्रेसवे जैसे पब्लिक ट्रांसपोर्ट से जोड़ा गया है। इससे यात्री एक मोड से दूसरे मोड पर आसानी से आ-जा सकेंगे। इसे दिल्ली मेट्रो की सभी सात लाइनों के साथ जोड़ा गया है। एक ओर जहां नमो भारत रीजनल ट्रांसपोर्ट के लिए बैकबोन का काम करेगा, वहीं दिल्ली मेट्रो लाइनें फीडर और डिस्पर्सल सर्विस देकर इसे सहयोग करेंगी।
कुल बिजली उपयोग में 60 प्रतिशत होगा सौर ऊर्जा का योगदान
इस परियोजना में कुल बिजली आवश्यकता का लगभग 60 प्रतिशत सौर ऊर्जा से पूरा किया गया जाएगा। इसके लिए सोलर प्लाटं की स्थापना की जा रही है। छतों पर भी सोलर प्लेट स्थापित किए गए हैं। प्रतिवर्ष लगभग 1.77 लाख टन कार्बन डाइआक्साइड उत्सर्जन को कम करेगी।
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