India-A के लिए खेलेगी UP के गांव की बेटी रिया भाटी, क्रिकेटर बिटिया के सपने को पूरा करने में सहयोग कर रहे किसान पिता
मेरठ की क्रिकेटर रिया का चयन भारतीय महिला इंडिया-ए टीम के लिए हो गया है। यह उनकी छह साल की ...और पढ़ें

पिता के साथ रिया भाटी।
HighLights
छह साल की कड़ी मेहनत से राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाई।
बाएं हाथ की बल्लेबाज, कवर ड्राइव है पसंदीदा शाट।
जागरण संवाददाता, मेरठ। क्रिकेट के मैदान पर छह साल की लगातार मेहनत, अनुशासन और शानदार बल्लेबाजी के दम पर गांव ऐंची खुर्द निवासी क्रिकेटर रिया भाटी ने एक और बड़ी उपलब्धि हासिल की है। उनका चयन भारतीय महिला इंडिया-ए टीम में हुआ है। इस उपलब्धि के साथ ही रिया ने राष्ट्रीय स्तर पर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया है।
उत्तर प्रदेश की महिला टी-20 टीम और चैलेंजर ट्राफी के लिए टीम-डी की ओर से दमदार बल्लेबाजी प्रदर्शन करने वाली रिया के कदम इंडिया-ए टीम में पड़ चुके हैं। अब उनकी नजर भारतीय अंडर-19 टीम में जगह बनाने पर है। वहां से टीम इंडिया तक पहुंचने का रास्ता खुलेगा।
रिया भाटी के लिए यह चयन किसी सपने के सच होने से कम नहीं है। उनका कहना है कि वह पिछले कई वर्षों से इस मुकाम तक पहुंचने के लिए मेहनत कर रही हैं। इस अवसर को लेकर वह बेहद उत्साहित हैं। रिया ने बताया कि उनका अगला लक्ष्य देश के लिए खेलना है।
इंडिया-ए की इस सीरीज में बेहतर प्रदर्शन कर वह अंडर-19 भारतीय टीम में अपनी जगह पक्की करना चाहती हैं। रिया ने बताया कि इंडिया-ए टीम के खिलाड़ी पहले बेंगलुरु में इंडिया-ए और इंडिया-बी के बीच मुकाबले खेलेंगे। इसके बाद नेपाल की टीम के साथ सीरीज प्रस्तावित है। इसी प्रदर्शन के आधार पर आगे के अवसरों पर उनकी नजर रहेगी।
निरंतर अच्छे प्रदर्शन ने चयनकर्ताओं का ध्यान खींचा
रिया भाटी की पहचान एक प्रतिभाशाली बाएं हाथ की बल्लेबाज के रूप में है। इस सीजन में उनके बल्ले से निकले रनों और निरंतर अच्छे प्रदर्शन ने चयनकर्ताओं का ध्यान खींचा। महिला क्रिकेट में वह स्मृति मंधाना को पसंद करती हैं, जबकि पुरुष क्रिकेट में युवराज सिंह उनके आदर्श हैं। युवराज की बल्लेबाजी उन्हें सबसे ज्यादा प्रभावित करती है। रिया का पसंदीदा शाट कवर ड्राइव और स्क्वायर ड्राइव है।
रिया ने जीसीए क्रिकेट एकेडमी में कोच यजुवेंद्र कृष्ण आत्रे के मार्गदर्शन में क्रिकेट की बारीकियां सीखी हैं। कोच आत्रे वर्तमान में झारखंड रणजी टीम के साथ हैं। उन्होंने रिया के चयन को लगातार मेहनत, अनुशासन और खेल के प्रति समर्पण का परिणाम बताया। उन्होंने कहा कि रिया में शुरुआत से ही प्रतिभा, आत्मविश्वास और सीखने की ललक रही है।
उनकी सबसे बड़ी खूबी दबाव में भी अपने खेल पर भरोसा बनाए रखना और गलतियों से सीखकर लगातार सुधार करना है। सकारात्मक सोच और प्रदर्शन में निरंतरता ने उन्हें इस मुकाम तक पहुंचाया है।
बेटी के सपने के लिए पिता ने छोड़ा स्कूल का काम
रिया भाटी की सफलता के पीछे परिवार का भी बड़ा योगदान है। उनके पिता सोनू कुमार पहले गांव में निजी स्कूल चलाते थे, लेकिन बेटी के क्रिकेट करियर को आगे बढ़ाने के लिए उन्होंने स्कूल का काम छोड़ दिया। अब वह खेतीबाड़ी करते हुए बेटी के सपनों को पूरा करने में सहयोग कर रहे हैं।
मां कविता गृहिणी हैं। परिवार के इसी सहयोग और रिया की मेहनत ने उन्हें इस मुकाम तक पहुंचाया है। क्रिकेट के साथ रिया अपनी पढ़ाई भी जारी रखे हुए हैं। 12वीं की पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने मेरठ कालेज में बीपीईएस प्रथम वर्ष में प्रवेश लिया है।
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