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    दो नंबरों से JEE एडवांस से चूके संकेत ने नहीं हारी हिम्मत, सेल्फ स्टडी व YouTube से तैयारी कर बने इसरो में साइंटिस्ट

    By Amit Tiwari Edited By: Praveen Vashishtha
    Updated: Wed, 17 Jun 2026 03:27 PM (IST)

    मेरठ के संकेत कुमार जेईई एडवांस में दो अंकों से चूक गए थे, अब अपनी मेहनत और योग्यता से इसरो में साइंटिस्ट-इंजीनियर बन गए हैं। ...और पढ़ें

    संकेत कुमार ।

    संकेत कुमार ।

    HighLights

    1. मेरठ के संकेत कुमार का चयन इसरो प्रोपल्शन काम्प्लेक्स में साइंटिस्ट-इंजीनियर पद पर।

    2. बोले- एआई कभी कोर मैकेनिकल इंजीनियरिंग की जगह नहीं ले सकता।

    जागरण संवाददाता, मेरठ। कभी जेईई एडवांस परीक्षा में मात्र दो अंकों से सफलता से चूकने वाले मेरठ के होनहार युवा संकेत कुमार ने अपने दृढ़ संकल्प, आत्मविश्वास और निरंतर मेहनत के बल पर वह मुकाम हासिल कर लिया है, जिसका सपना देश के लाखों युवा देखते हैं।

    दीवान पब्लिक स्कूल के वर्ष 2021 बैच के पूर्व छात्र संकेत कुमार का चयन भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के प्रतिष्ठित इसरो प्रोपल्शन काम्प्लेक्स (आईपीआरसी) में साइंटिस्ट-इंजीनियर (एससी ग्रेड) पद पर हुआ है। उनकी इस उपलब्धि से विद्यालय परिवार, शिक्षक, अभिभावक और पूर्व छात्र गौरवान्वित हैं।

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    संकेत कुमार ने अपनी स्कूली शिक्षा दीवान पब्लिक स्कूल से पूरी की। वर्ष 2021 में उन्होंने जेईई मेन उत्तीर्ण किया और जेईई एडवांस परीक्षा में शामिल हुए, लेकिन केवल दो अंकों से सफलता नहीं मिल सकी। अधिकांश छात्र ऐसी स्थिति में निराश हो जाते हैं, लेकिन संकेत ने हार नहीं मानी।

    माता-पिता के सहयोग और आत्मविश्वास के बल पर उन्होंने एक वर्ष का ड्राप लिया और बिना किसी कोचिंग के स्वाध्याय, यूट्यूब लेक्चर और पिछले वर्षों के प्रश्नपत्रों के सहारे तैयारी जारी रखी।

    वर्ष 2022 में उन्होंने जेईई मेन और जेईई एडवांस दोनों परीक्षाएं सफलतापूर्वक उत्तीर्ण कर लीं। इसके बाद उन्हें देश के प्रतिष्ठित इंडियन इंस्टीट्यूट आफ स्पेस साइंस एंड टेक्नोलाजी (IIST) में एयरोस्पेस इंजीनियरिंग में प्रवेश मिला। यहीं से उनके भीतर अंतरिक्ष विज्ञान और इसरो से जुड़ने का सपना स्पष्ट रूप से आकार लेने लगा।

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    बैच में अकेले चुना वाइब्रेशन और एकास्टिक्स का क्षेत्र

    संकेत ने बताया कि उनके 160 विद्यार्थियों के बैच में अधिकांश छात्र प्रोपल्शन और एयरोडायनामिक्स जैसे लोकप्रिय विषयों की ओर गए, लेकिन उन्होंने वाइब्रेशन एवं एकास्टिक्स जैसी विशेष और कम चुनी जाने वाली डोमेन को अपना प्रमुख विषय बनाया। पूरे बैच में वे इस क्षेत्र को चुनने वाले अकेले छात्र थे।

    यही निर्णय बाद में इसरो के इंटरव्यू में उनके लिए सबसे बड़ा सकारात्मक पक्ष साबित हुआ। उन्होंने बताया कि इंटरव्यू पैनल उनके विषय चयन से काफी प्रभावित हुआ। इंटरव्यू के दौरान उनसे कंपन, ध्वनिकी और राकेट प्रणालियों में इनके उपयोग से जुड़े तकनीकी प्रश्न पूछे गए।

    8.2 सीजीपीए पर मिला इंटरव्यू का अवसर

    संकेत ने बताया कि आइआइएसटी का इसरो से सीधा संबंध होने के कारण 8.2 सीजीपीए प्राप्त करने पर उन्हें सीधे इसरो सेंट्रलाइज्ड रिक्रूटमेंट बोर्ड (ICRB) इंटरव्यू में बैठने का अवसर मिला। चयन प्रक्रिया के दौरान उन्हें 10 से 12 विभिन्न इंटरव्यू पैनलों का सामना करना पड़ा। कठिन तकनीकी और शोध आधारित प्रश्नों के बावजूद उन्होंने उत्कृष्ट प्रदर्शन किया और अंततः वैज्ञानिक पद के लिए चयनित हो गए।

    जापान में किया रिसर्च प्रोजेक्ट पर काम

    संकेत की रुचि शोध और तकनीकी नवाचारों में लगातार बढ़ती रही। वर्ष 2025 में उन्हें तरंगा वाइब्रोएकास्टिक में सवेतन इंटर्नशिप मिली, जहां उन्होंने कंपन और ध्वनि विज्ञान से जुड़ी उन्नत तकनीकों पर कार्य किया। इसके बाद वर्ष 2026 में उनका चयन सिनरा इंक. द्वारा अंतिम वर्ष की परियोजना के लिए किया गया।

    इस परियोजना के तहत उन्होंने जापान में तीन माह तक उन्नत इंजीनियरिंग परियोजनाओं पर कार्य किया और अंतरराष्ट्रीय स्तर का अनुभव प्राप्त किया। इस दौरान उनके तकनीकी कौशल, अनुसंधान क्षमता और वैश्विक दृष्टिकोण में उल्लेखनीय वृद्धि हुई।

    महेंद्रगिरि में होती है राकेट की अंतिम परीक्षा

    संकेत ने बताया कि उनका चयन इसरो प्रोपल्शन काम्प्लेक्स, महेंद्रगिरि (तमिलनाडु) के लिए हुआ है। उन्होंने कहा कि श्रीहरिकोटा से किसी भी राकेट के प्रक्षेपण से पहले उसकी अंतिम परीक्षण प्रक्रिया महेंद्रगिरि स्थित प्रोपल्शन काम्प्लेक्स में होती है। यहां सभी प्रणालियों की गहन जांच के बाद ही राकेट को लांचिंग के लिए मंजूरी मिलती है।

    उन्होंने बताया कि इसरो में कार्य अत्यंत गोपनीय और जिम्मेदारीपूर्ण होता है। गगनयान जैसे मिशनों में एक छोटे से पुर्जे या स्क्रू की जांच के लिए भी अलग टीम काम करती है, क्योंकि बहुत छोटी त्रुटि भी पूरे मिशन को प्रभावित कर सकती है।

    भारत का अंतरिक्ष स्टेशन बने, यही सपना

    संकेत का मानना है कि भारत का अंतरिक्ष क्षेत्र तेजी से आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि आज ध्रुव स्पेस, एलएंडटी, ब्रह्मोस सहित कई निजी कंपनियां और स्टार्टअप अंतरिक्ष क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य कर रहे हैं। इसरो इन संस्थानों को अपनी परीक्षण और प्रक्षेपण सुविधाएं उपलब्ध कराता है, जिससे देश में स्पेस इकोसिस्टम मजबूत हो रहा है।

    उन्होंने कहा कि भारत सरकार वर्ष 2036 तक अपना अंतरिक्ष स्टेशन स्थापित करने की दिशा में कार्य कर रही है और इस लक्ष्य की प्राप्ति में निजी क्षेत्र की महत्वपूर्ण भूमिका होगी। उनका सपना है कि आने वाले वर्षों में भारत अंतरिक्ष क्षेत्र में नासा और स्पेसएक्स जैसी संस्थाओं को कड़ी प्रतिस्पर्धा दे और पूरी दुनिया इसरो की उपलब्धियों को नए सम्मान के साथ देखे।

    एआइ नहीं ले सकता मैकेनिकल इंजीनियरिंग की जगह

    युवाओं को संदेश देते हुए संकेत ने कहा कि आज अधिकांश छात्र रोजगार के लिए कंप्यूटर साइंस की ओर आकर्षित हो रहे हैं, लेकिन आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस कभी भी कोर मैकेनिकल इंजीनियरिंग की जगह नहीं ले सकता।
    उन्होंने कहा कि एआइ कोड लिख सकता है, लेकिन मशीनों की वास्तविक परीक्षण प्रक्रिया, विफलताओं से सीखने का अनुभव और इंजीनियरिंग निर्णय मानव मस्तिष्क ही ले सकता है। इसलिए युवाओं को अपनी रुचि के अनुसार कोर इंजीनियरिंग क्षेत्रों में भी आगे बढ़ना चाहिए।

    खेल, संगीत और डूडलिंग हैं पसंद
    पढ़ाई और शोध कार्यों के अलावा संकेत को बैडमिंटन खेलना, शारीरिक फिटनेस बनाए रखना, संगीत सुनना और डूडलिंग करना पसंद है। उनका मानना है कि तकनीकी क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए मानसिक और शारीरिक संतुलन दोनों आवश्यक हैं।

    संकेत कुमार की सफलता के पड़ाव

    - 2021 : जेईई मेन उत्तीर्ण, जेईई एडवांस में दो अंकों से चूके
    - 2022 : ड्राप लेकर जेईई मेन व एडवांस दोनों में सफलता
    - आइआइएसटी में एयरोस्पेस इंजीनियरिंग में प्रवेश
    - वाइब्रेशन एवं एकॉस्टिक्स को बनाया विशेषज्ञता का क्षेत्र

    - 2025 : तरंगा वाइब्रोएकास्टिक में इंटर्नशिप
    - 2026 : जापान में तीन माह का इंजीनियरिंग प्रोजेक्ट
    - आइसीआरबी इंटरव्यू में सफलता
    - इसरो प्रोपल्शन काम्प्लेक्स में साइंटिस्ट-इंजीनियर (एससी) पद पर चयन।

    विद्यालय परिवार ने जताया गर्व
    दीवान पब्लिक स्कूल के निदेशक एचएम राउत ने कहा कि संकेत की उपलब्धि केवल उनकी व्यक्तिगत सफलता नहीं, बल्कि विद्यालय के मूल्यों, अनुशासन और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की भी सफलता है।
    प्रधानाचार्य वीके मिश्रा ने कहा कि संकेत वर्तमान विद्यार्थियों के लिए प्रेरणा के स्रोत हैं और उनकी सफलता यह साबित करती है कि असफलता कभी अंतिम नहीं होती।विद्यालय प्रबंधन ने कहा कि संकेत कुमार की उपलब्धि आने वाली पीढ़ियों को बड़े सपने देखने और उन्हें साकार करने का साहस देगी। विद्यालय परिसर में उनकी सफलता की चर्चा गर्व और उत्साह के साथ की जा रही है।