सरधना के ऐतिहासिक चर्च में ध्वजारोहण के साथ कृपाओं की माता महोत्सव शुरू, देशभर से पहुंच रहे श्रद्धालु
सरधना के ऐतिहासिक चर्च को माइनर बसिलिका का दर्जा प्राप्त है। यहां कृपाओं की माता की वार्षिक तीर्थयात्रा ध्वजारोहण के ...और पढ़ें

सरधना स्थित चर्च परिसर में ध्वजारोहण के साथ कृपाओं की माता महोत्सव शुरू।
HighLights
पवित्र मिस्सा बलिदान व नौरोजी की हुई प्रार्थना।
बेगम समरू ने कराया था इस चर्च का निर्माण।
चर्च को माइनर बसिलिका का दर्जा है प्राप्त।
जागरण संवाददाता, सरधना (मेरठ)। सरधना स्थित एतिहासिक चर्च के परिसर में गुरुवार को विशेष प्रार्थना के साथ धूमधाम से ध्वजारोहण के साथ कृपाओं की माता के महोत्सव का शुभारंभ हुआ। इसके बाद फादर ने माला विनती एवं पवित्र मिस्सा बलिदान करवाया।

गुरुवार को चर्च परिसर में श्रद्धालु तय समय से पहले पहुंचने शुरू हो गए थे। शाम करीब चार बजे मेरठ धर्मप्रांत के धर्माध्यक्ष भास्कर जेसुराज, चर्च प्रबंधक फादर वेलेरियन पिंटो, फादर मार्टिन रावत सहित आदि ने विशेष प्रार्थना की। इसके बाद ध्वजारोहण किया।

वहीं, श्रद्धालुओं ने चर्च परिसर में ही जुलूस निकाला और परिसर से होकर चर्च में गए। जहां फादर ने माला विनती एवं पवित्र मिस्सा बलिदान की प्रार्थना करवाई। उधर, भजनों का सिलसिला भी जारी रहा।
श्रद्धालुओं ने चमत्कारिक तस्वीर के किए दर्शन
चर्च में प्रार्थना के बाद श्रद्धालुओं ने कृपाओं की माता की चमत्कारिक तस्वीर के दर्शन किए। साथ ही परिवार की सलामती की कामना की। इसके बाद चर्च परिसर में जमकर सेल्फी ली। इस दौरान श्रद्धालु दिल्ली, हरियाणा व मेरठ सहित अन्य जिलों से भी आए हुए थे।
फादर मार्टिन रावत ने बताया कि सात नवंबर तक प्रतिदिन शाम चार बजे माला विनती, नौरोजी प्रार्थना और पवित्र मिस्सा बलिदान किया जाएगा। सात नवंबर को सुबह आठ और 10 बजे तथा शाम चार बजे हिंदी भाषा में पवित्र मिस्सा बलिदान होगा। शाम छह बजे पंजाबी भाषा में मिस्सा बलिदान और रात आठ बजे प्रार्थना सभा आयोजित की जाएगी।
आठ नवंबर को सुबह छह और आठ बजे पवित्र मिस्सा बलिदान होगा। इसके बाद सुबह 10 बजे धर्माध्यक्षीय समारोही मिस्सा बलिदान का मुख्य आयोजन किया जाएगा। इसके मुख्य अनुष्ठाता प्रयागराज धर्मप्रांत के धर्माध्यक्ष लुईस मैस्करेन्हास रहेंगें।
हर वर्ष नवंबर माह में मनाया जाता है महोत्सव
सरधना चर्च को माता मरियम का तीर्थस्थान बनाने की परिकल्पना वर्ष 1954 में की गई थी। वर्ष 1950 में ही श्रद्धालुओं ने चर्च को तीर्थस्थान घोषित करने की मांग उठाई थी। वर्ष 1955 में आगरा के सहायक आर्चबिशप जेबी इवान्जेलिस्टी इटली के लैघोर्न शहर के पास स्थित मौनटेनैरो तीर्थस्थान पहुंचे।
यहां कृपाओं की माता की प्रसिद्ध चमत्कारिक तस्वीर की प्रतिकृति सरधना चर्च के लिए मंगवाई गई। लकड़ी पर विशेष रंगों से तैयार तस्वीर में माता मरियम बालक यीशु को गोद में लिए बैठी हैं। तस्वीर में माता और बालक के सिर पर सोने के मुकुट भी लगाए गए थे। जिन्हें लैघोर्न के लोगों ने भेंट किया था। वर्ष 1972 में ये मुकुट चोरी हो गए थे।
वर्ष 1956 में मेरठ धर्मप्रांत के बिशप बनने के बाद आर्चबिशप इवान्जेलिस्टी ने सात नवंबर 1957 को तीर्थस्थान का शुभारंभ तय किया। इस दिन पवित्र तस्वीर को वाहनों के लंबे काफिले के साथ मेरठ से सरधना लाया गया और चर्च के अंदर बाईं ओर बने चैपल में स्थापित किया गया। तभी से हर वर्ष नवंबर में कृपाओं की माता का महोत्सव मनाया जाता है और देशभर से लाखों श्रद्धालु मन्नत मांगने पहुंचते हैं।
बेगम समरू ने बनवाया था यह चर्च
बेगम समरू ने इस ऐतिहासिक चर्च का निर्माण कराया था। चर्च की इमारत की वास्तुकला बहुत आकर्षक है। बताया जाता है कि चर्च का निर्माण कार्य 1809 में शुरू हुआ था। गिरिजाघर के दरवाजे के पास स्थित इमारत का निर्माण काल 1822 दर्शाया गया है।
इस चर्च को पोप जान (23वें) ने 1961 में माइनर बसिलिका का दर्जा प्रदान किया था। इसमें चर्च की भव्यता का काफी योगदान है। ऐतिहासिक और भव्य गिरिजाघरों को ही यह दर्जा मिलता है। यहां लगी कृपाओं की माता की चमत्कारी तस्वीर के कारण हर वर्ष इस चर्च में विशेष प्रार्थना और मेले की परंपरा शुरू हुई।
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