उत्तर प्रदेश में देर से जन्म-मृत्यु पंजीकरण के लिए नियम सख्त, अब रजिस्ट्रार या एसडीएम का आदेश जरूरी
जन्म-मृत्यु रजिस्ट्रीकरण अधिनियम, 1969 में संशोधन के बाद विलंबित पंजीकरण के लिए नए प्रावधान लागू किए गए हैं।

तस्वीर- फाइल।
HighLights
विलंबित जन्म-मृत्यु पंजीकरण के लिए नए प्रावधान लागू।
एक से दो वर्ष में रजिस्ट्रार/एसडीएम का आदेश आवश्यक।
दो वर्ष बाद न्यायिक मजिस्ट्रेट का आदेश अनिवार्य।
जागरण संवाददाता, मीरजापुर। जन्म-मृत्यु रजिस्ट्रीकरण अधिनियम, 1969 की धारा 13 (3) में संशोधन के बाद विलंबित पंजीकरण के लिए नया प्रावधान किया गया है।
उप जिला निर्वाचन अधिकारी विनोद कुमार सिंह ने बताया कि जन्म या मृत्यु की सूचना घटना के एक वर्ष बाद, लेकिन दो वर्ष के भीतर रजिस्ट्रार को दी जाती है तो पंजीकरण रजिस्ट्रार, उप विभागीय मजिस्ट्रेट या जिला मजिस्ट्रेट द्वारा अधिकृत कार्यकारी मजिस्ट्रेट के आदेश पर ही होगा।
उन्होंने बताया कि घटना के दो वर्ष बाद सूचना देने पर पंजीकरण केवल प्रथम श्रेणी न्यायिक मजिस्ट्रेट के आदेश पर किया जाएगा।
मुख्य चिकित्साधिकारी, सभी उप जिलाधिकारियों, खंड विकास अधिकारियों और अधिशासी अधिकारियों को इस संबंध में निर्देश जारी किए हैं।