16 लाख के भवन में सिर्फ एक छात्र, नहीं है एक भी टीचर; यूपी के इस सरकारी स्कूल की हैरान करने वाली तस्वीर
मीरजापुर के राजगढ़ ब्लॉक में 16 लाख रुपये की लागत से बने प्राथमिक विद्यालय में शिक्षक न होने से पढ़ाई ठप है, जबकि इसमें केवल एक बच्चे का नामांकन है।

मीरजापुर: राजगढ़ ब्लॉक के बड़ागांव ग्राम पंचायत में बंद पड़े प्राथमिक विद्यालय बड़गांव रामसरोवर के आस पास उगा झाड़ झंखाड़
HighLights
16 लाख में बना स्कूल, शिक्षक नदारद, एक छात्र।
बच्चों को अब भी 1.5 किमी दूर जाना पड़ता है।
खंड शिक्षा अधिकारी ने कार्रवाई की चेतावनी दी।
जागरण संवाददाता, मीरजापुर। प्राथमिक शिक्षा व्यवस्था को चुस्त-दुरुस्त करने के दावों के बीच चुनार तहसील क्षेत्र के राजगढ़ विकास खंड के बड़ागांव स्थित नई बस्ती में सरकारी व्यवस्था की तस्वीर चौंकाने वाली है। दलित बस्ती में वर्ष 2022-23 में करीब 16 लाख रुपये की लागत से प्राथमिक विद्यालय बड़ागांव रामसरोवर का भवन बनवाया गया।
भवन के साथ सोलर सिस्टम, पेयजल के लिए सबमर्सिबल पंप और अन्य सुविधाएं भी उपलब्ध कराई गईं। करीब 95 हजार रुपये खर्च कर दिव्यांग शौचालय भी बनवाया गया, लेकिन विद्यालय में पढ़ाने के लिए शिक्षक की तैनाती ही नहीं की गई।
मजे की बात यह है कि विद्यालय को यू डायस कोड भी आवंटित है और वर्तमान शैक्षिक सत्र में विद्यालय में महज एक बच्चे का नामांकन है। शिक्षक की तैनाती नहीं होने के कारण यह बच्चा भी नजदीक स्थित उच्च प्राथमिक विद्यालय बड़ागांव में जाकर शिक्षा ग्रहण कर रहा है।
यानी जिस बस्ती के बच्चों को घर के पास प्राथमिक शिक्षा उपलब्ध कराने के लिए लाखों रुपये खर्च कर विद्यालय खड़ा किया गया, वहां न कक्षा संचालित हो रही है और न ही बच्चों को पढ़ाने के लिए शिक्षक मौजूद है।
उच्च प्राथमिक विद्यालय बड़ागांव में तैनात सहायक अध्यापक बृजेश पटेल की देखरेख में विद्यालय भवन का निर्माण कराया गया था। निर्माण के साथ विद्यालय में सोलर सिस्टम और पेयजल के लिए सबमर्सिबल पंप की व्यवस्था भी की गई। इसके बावजूद विद्यालय आज अपनी उपयोगिता तलाश रहा है।
एक तरफ विलय, दूसरी तरफ लाखों का निर्माण
शिक्षा विभाग कम नामांकन वाले विद्यालयों के विलय की कवायद कर रहा है। ऐसे में सवाल उठना स्वाभाविक है कि जिस विद्यालय में वर्तमान सत्र में केवल एक बच्चे का नामांकन है और वहां शिक्षक तक नहीं है, उसके निर्माण पर 16 लाख रुपये क्यों खर्च किए गए। यदि विभाग के पास विद्यालय संचालन और शिक्षक तैनाती की ठोस योजना नहीं थी तो सरकारी धन से भवन निर्माण का औचित्य क्या था।
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बच्चों को अब भी डेढ़ किलोमीटर पैदल जाना पड़ रहा
नई बस्ती के आसपास रहने वाले धीरज, जमुना, आशा आदि का कहना है कि विद्यालय भवन बनने के बाद उन्हें उम्मीद थी कि आसपास बच्चों को घर के पास ही प्राथमिक शिक्षा मिलेगी। लेकिन बस्ती के बच्चों को अभी भी करीब एक से डेढ़ किलोमीटर दूर स्थित प्राथमिक विद्यालय तक पैदल जाना पड़ता है। ग्रामीणों का कहना है यहां के लिए शिक्षक और नियमित शिक्षण व्यवस्था भी जरूरी है।
संबंधित प्रधानाध्यापक को सख्ती से निर्देश दिए गए हैं कि किसी भी दशा में विद्यालय का संचालन उसी भवन में कराया जाए। साथ ही नामांकन बढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं। यदि विद्यालय का संचालन बंद पाया गया तो संबंधित के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
संजय कुमार, खंड शिक्षा अधिकारी राजगढ़-मीरजापुर
