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    आखिर क्यों 20 से 50 साल की महिलाएं छोड़ रही हैं भरा-पूरा घर? इन आंकड़ों ने उड़ा दी सबकी नींद!

    Updated: Wed, 21 Jan 2026 12:42 AM (IST)

    मुरादाबाद में ममता शर्मसार! साल 2025 में 57 विवाहित महिलाएं अपने 81 मासूम बच्चों को बिलखता छोड़ प्रेमी संग फरार हो गईं। सोशल मीडिया के 'मायाजाल' और भा ...और पढ़ें

    प्रतीकात्‍मक च‍ित्र

    प्रतीकात्‍मक च‍ित्र

    HighLights

    1. जिले में साल 2025 में 81 बच्चों को छोड़ प्रेमी संग फरार हुई 57 महिला

    2. एक साल में 81 बच्चों को अपने आंचल से दूर कर गई मां, प्रेमी की हुई

    जागरण संवाददाता, मुरादाबाद। बच्चों से भरा घर। पति साथ है, फिर भी मन सूना। लंबे वक्त बाद जीवन में कोई ऐसा आया जिसने आंखों में देखा। मन व हृदय को झकझोरा। भावनाएं समझीं। इन्हीं के वशीभूत होकर सात जन्मों का बंधन व मां की ममता भूल कदम चल दिए उसकी ओर। भावनाएं समझने वाले उस शख्स ने जैसा कहा- उसी के बताए राह पर चलकर लांघ दी घर की दहलीज।

    यह महिला का विद्रोह नहीं था, बल्कि उस जीवन की तलाश थी, जो घर के भीतर कहीं खो गया था। जी हां! जिले में पिछले कुछ समय से विवाहित महिलाओं के घर छोड़ने के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। यह दर्शा रहा है कि घर से अपनत्व दूर होता जा रहा है, ऐसे में जहां अपनापन मिल रहा है, महिलाएं उस ओर चल दे रहीं हैं। यह है बदलते सामाजिक परिवेश और भागमभाग भरी जिंदगी का सच।

    बढ़ते इंटरनेट मीडिया के प्रभाव और बदलती सामाजिक सोच के बीच जिले में 81 बच्चे अपनी मां के आंचल से वंचित हो गए। पुलिस रिकार्ड के अनुसार, साल 2025 में 57 महिलाएं अपने पति और बच्चों को छोड़कर प्रेमी के साथ फरार हो गईं, जिनके पीछे 81 बच्चे रह गए। जिन्हें लंबे समय तक मां का सान्निध्य नहीं मिल सका।

    फरार होने वाली महिलाओं की वास्तविक संख्या इससे अधिक हो सकती है, लेकिन कई मामलों में पुलिस ने सक्रियता दिखाते हुए महिलाओं को तलाश कर परिवार के पास वापस पहुंचा दिया। इसके बावजूद 57 महिलाओं ने न केवल अपने पति, बल्कि अपने मासूम बच्चों को भी छोड़कर प्रेमी के साथ नया जीवन चुन लिया।

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    इनमें 20 वर्ष से लेकर 50 वर्ष तक की महिलाएं शामिल हैं, जो यह दर्शाता है कि यह समस्या किसी एक आयु वर्ग तक सीमित नहीं है। जांच में सामने आया है कि अधिकांश मामलों में इंटरनेट मीडिया और मोबाइल फोन के जरिए प्रेम संबंध बने। धीरे-धीरे बातचीत गहरी होती गई और पारिवारिक जिम्मेदारियां पीछे छूटती चली गईं। कई बच्चों के पिता अब अकेले बच्चों की परवरिश करने को मजबूर हैं, जबकि कुछ मामलों में दादा-दादी या अन्य रिश्तेदारों ने बच्चों की जिम्मेदारी संभाली है।

    असुरक्षा और पहचान के संकट से गुजर रहीं मह‍िलाएं

    मंडलीय मनोवैज्ञान‍ि क डा. रीना तोमर ने बताया क‍ि यह समस्या केवल नैतिक या पारिवारिक नहीं, बल्कि गहरी मानसिक और सामाजिक वजहों से जुड़ी है। इंटरनेट मीडिया और मोबाइल के अत्यधिक प्रयोग से भावनात्मक जुड़ाव बहुत तेजी से बन रहा है। कई महिलाएं अपने वैवाहिक जीवन में उपेक्षा, संवाद की कमी, भावनात्मक असुरक्षा और पहचान के संकट से गुजर रही होती हैं।

    ऐसे में जब उन्हें बाहर से थोड़ी भी भावनात्मक स्वीकृति और अपनापन मिलता है, तो वे बिना परिणामों के बारे में सोचे निर्णय ले लेती हैं। परिवारों को चाहिए कि वे संवाद बढ़ाएं, महिलाओं की भावनात्मक जरूरतों को समझें और समय रहते काउंसलिंग की मदद लें, ताकि ऐसे टूटते रिश्तों और बच्चों के मानसिक आघात को रोका जा सके।

     

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