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मौत की सुरंग बने कोचिंग सेंटर! न फायर एनओसी, न निकलने का रास्ता; मुरादाबाद में बड़ा खुलासा

Published: Tue, 23 Jun 2026 06:15 AM (GMT+05:30)

लखनऊ अग्निकांड के बाद मुरादाबाद में कोचिंग सेंटरों की पड़ताल में सुरक्षा खामियां सामने आईं। अग्निशमन यंत्रों की कमी, तारों का जाल और संकरे रास्ते छात्रों के लिए खतरा हैं।

हिमगिरि और कांठ रोड नया गांव में स्थित तंग जगह में बना कंप्यूटर इंस्टिट्यूट में अग्निशमन यंत्र दिखाई नही दिए

हिमगिरि और कांठ रोड नया गांव में स्थित तंग जगह में बना कंप्यूटर इंस्टिट्यूट में अग्निशमन यंत्र दिखाई नही दिए

HighLights

  1. लखनऊ अग्निकांड के बाद मुरादाबाद में दैनिक जागरण की पड़ताल में सामने आई खामियां

  2. आग लगने की स्थिति में छात्रों की जान पर बन सकती है आफत

जागरण संवाददाता, मुरादाबाद। लखनऊ के एक कोचिंग सेंटर में हुए भीषण अग्निकांड ने कोचिंग संस्थानों की सुरक्षा व्यवस्थाओं पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सोमवार को दैनिक जागरण की पड़ताल में सामने आया कि हजारों विद्यार्थियों के भविष्य को संवारने का दावा करने वाले कई संस्थानों में आग से बचाव की मूलभूत व्यवस्थाएं तक नहीं हैं।

कहीं अग्निशमन यंत्र नदारद मिले तो कहीं बिजली के तारों का खतरनाक जाल लटका मिला। कई संस्थानों में छात्रों के आने-जाने के लिए सिर्फ एक संकरा रास्ता है, जो किसी भी आपात स्थिति में मौत की सुरंग साबित हो सकता है।

शहर के हिमगिरि क्षेत्र में एसडीएम स्कूल के निकट संचालित एक कंप्यूटर इंस्टीट्यूट में तीन मंजिलों पर कोचिंग और लाइब्रेरी संचालित है। यहां प्रतिदिन करीब 160 विद्यार्थी आते हैं, लेकिन पूरी इमारत में अग्निशमन की व्यवस्था नहीं दिखाई दी। भवन तक पहुंचने के लिए संकरी गली और बाहर निकलने के लिए सीमित रास्ता है।

राष्ट्रीय भवन संहिता (NBC) के अनुसार कोचिंग सेंटरों में सुरक्षा नियम

श्रेणी (Category) सुरक्षा नियम और मानक (Safety Rules & Standards)
निकास एवं सीढ़ियां (Exit & Stairs)

* प्रत्येक बड़े क्लासरूम या हॉल में कम से कम दो निकास द्वार होने चाहिए।


* आपातकालीन सीढ़ियां खुली, अवरोध रहित और कम से कम 1.5 मीटर चौड़ी होनी चाहिए।


* निकास मार्गों पर स्पष्ट और चमकदार 'EXIT' (निकास) संकेतक लगाए जाएं।


* आपातकालीन स्थिति में निकासी योजना (Evacuation Plan) भवन में साफ दिखाई देने वाली जगह पर प्रदर्शित हो।

फायर फाइटिंग सिस्टम (Fire Fighting)

* प्रत्येक मंजिल और कक्ष के बाहर पर्याप्त क्षमता वाले अग्निशामक यंत्र (Fire Extinguishers) लगाए जाएं।


* भवन में स्मोक डिटेक्टर एवं फायर अलार्म सिस्टम स्थापित होना जरूरी है।


* आग लगने की स्थिति में स्वतः सक्रिय होने वाला स्प्रिंकलर सिस्टम उपलब्ध होना चाहिए।

इलेक्ट्रिकल सुरक्षा (Electrical Safety)

* भवन में केवल फ्लेम-रेटार्डेंट (आग प्रतिरोधी) एवं मानक के अनुरूप वायरिंग हो।


* खुले, लटकते या अव्यवस्थित बिजली के तार बिल्कुल नहीं होने चाहिए।


* विद्युत पैनल और मीटर सुरक्षित स्थान पर स्थापित हों तथा उनकी नियमित जांच कराई जाए।

भवन संरचना व क्षमता (Building & Capacity)

* बिना पर्याप्त वेंटिलेशन और निकास व्यवस्था के बेसमेंट में कोचिंग या लाइब्रेरी संचालित नहीं की जा सकती।


* भवन की तय क्षमता के अनुरूप ही छात्रों की संख्या (Overcrowding रोकने के लिए) सुनिश्चित की जाए।

कानूनी कागजात व ट्रेनिंग (NOC & Training)

* संस्थान के पास अग्निशमन विभाग से जारी वैध फायर एनओसी (Fire NOC) होना अनिवार्य है।


* इस फायर एनओसी का समय-समय पर नवीनीकरण (Renewal) कराया जाए।


* छात्रों एवं स्टाफ के लिए प्रत्येक छह माह में मॉक ड्रिल आयोजित की जाए ताकि आपातकाल से निपटा जा सके।

हादसे की स्थिति में छात्रों को सुरक्षित निकालना बड़ी चुनौती बन सकता है। कांठ रोड पर पीएसी स्थित एक बड़े कोचिंग संस्थान के बाहर विद्युत मीटरों के पास तारों का जाल लटका मिला। यहां प्रतिदिन करीब 1300 विद्यार्थी भविष्य में डाॅक्टर बनने का सपना लेकर तैयारी के लिए आते हैं।

अधिक लोड या शाॅर्ट सर्किट की स्थिति में यह तार बड़ा हादसा पैदा कर सकते हैं। संस्थान दूसरे और तीसरे तल पर संचालित है तथा छात्रों के आवागमन के लिए मुख्य रूप से एक ही सीढ़ी का सहारा है। नयागांव क्षेत्र में अनिल परचून दुकान के पास संचालित एक कोचिंग संस्थान में भी अग्निशमन यंत्र नहीं मिले।

वहीं हिमगिरि तिराहा स्थित एक लाइब्रेरी में प्रवेश और निकास के लिए बनी संकरी सीढ़ियां चिंता का विषय बनी हुई हैं। नवीन नगर स्थित एक स्टडी प्वाइंट में भी विद्यार्थियों के लिए केवल एक तंग प्रवेश द्वार है। बड़ी संख्या में छात्रों के एक साथ बाहर निकलने की स्थिति में यहां भगदड़ जैसी स्थिति बन सकती है।

फायर ब्रिगेड की पहुंच भी चुनौती

नयागांव और हिमगिरि क्षेत्र के कुछ कोचिंग संस्थान ऐसे स्थानों पर संचालित हैं जहां तक संकरी गलियों के कारण अग्निशमन विभाग के बड़े वाहन आसानी से नहीं पहुंच सकते। ऐसे में शुरुआती कुछ मिनटों में हालात बेकाबू होने का खतरा बढ़ जाता है।

पड़ताल में सामने आए बड़े खतरे

  • कई संस्थानों में अग्निशमन यंत्र नहीं मिले।
  • बिजली के खुले और उलझे तार हादसे को न्योता दे रहे हैं।
  • अधिकांश भवनों में वैकल्पिक निकास मार्ग नहीं।
  • कई कोचिंग दूसरे और तीसरे तल पर संचालित।
  • संकरी सीढ़ियां और तंग गलियां बचाव कार्य में बाधा बन सकती हैं।
  • 5 से 10 मिनट लगते हैं एक छात्र को सड़ियों से उतरने में।

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