मुरादाबाद आरटीई घोटाला: दाखिले के नाम पर ही नहीं अनुदान राशि देने के नाम पर भी मांगी रिश्वत
मुरादाबाद में आरटीई दाखिलों और फीस प्रतिपूर्ति अनुदान के नाम पर तत्कालीन डीसी अमित कुमार सिंह ने रिश्वत मांगी थी। ...और पढ़ें
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HighLights
पूर्व डीसी ने आरटीई दाखिलों के लिए रिश्वत मांगी।
फीस प्रतिपूर्ति अनुदान राशि में भी गड़बड़ी का प्रयास।
पुलिस ₹4 करोड़ अनुदान राशि वापसी की जांच कर रही।
जागरण संवाददाता, मुरादाबाद। शहर के नामी स्कूलों में आरटीइ के माध्यम से गरीब बच्चों का दाखिला कराने के नाम पर एक-एक लाख रुपये लेने वाले तत्कालीन डीसी ने फीस प्रतिपूर्ति अनुदान राशि के तहत मिलने वाले रुपये में से भी रिश्वत मांगी थी।
अब तक की पुलिस जांच में यह बात सामने आई है। पुलिस उन गरीब बच्चों के अभिभावकों तक भी पहुंच गई है जिनके दाखिले कराने के नाम पर डीसी ने एक-एक लाख रुपये लिए थे। अब डीसी विभागीय जांच के साथ पुलिस की कार्रवाई में फंसते हुए नजर आ रहे हैं।
यह है पूरा मामला
15 मई को आरटीइ के अंतर्गत निजी स्कूलों के प्रबंधकों और प्रधानाचार्यों की जिलाधिकारी की अध्यक्षता में बैठक हुई थी। इसमें पीएमएस स्कूल, रानी प्रीतम स्कूल, एसएस चिल्ड्रन अकादमी, केसीएम स्कूल, सेंटमीरा एकेडमी, कांशीरामनगर, सेंट मीरा एकेडमी, टाइनी टाट्स कालेज, आर्यंस इंटरनेशनल स्कूल, गांधी नगर पब्लिक स्कूल, सीएल गुप्ता के प्रबंधकों और प्रधानाचार्यों ने शिकायत की थी कि स्कूलों में सीटों की मैपिंग यू-डायस पर पर छात्र संख्या के अनुसार 25 फीसदी सीट आवंटित न करते हुए मानक के विरुद्ध अधिक सीटें आवंटित कर दी गईं।
इसके अलावा बालिका विद्यालयों में बालकों की सीट का आवंटन कर दिया गया। कई प्रबंधकों और प्रधानाचार्यों द्वारा शिकायत की गई थी कि तत्कालीन जिला समन्वयक सामुदायिक सहभागिता अमित कुमार सिंह द्वारा रिश्वत लेकर अच्छे में मैपिंग में सीट सत्यापित करके सीट आवंटित कर दी गई। तत्कालीन डीसी सहभागिता का पूरा दायित्व था।
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यह शिकायत मिलने से पहले डीसी को तत्कालीन जिलाधिकारी अनुज सिंह ने निलंबित कर दिया था, लेकिन जब वर्तमान जिलाधिकारी डा. राजेंद्र पेंसिया को इस बड़े मामले की जानकारी मिली तो उन्होंने प्राथमिकी दर्ज कराने के आदेश दिए। इसके बाद मूंढापांडे पुलिस ने आरोपित के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की।
पुलिस की अब तक की जांच में सामने आया कि जिन बच्चों का आरटीइ के तहत दाखिला हुआ है उन्हें सरकार की तरफ से फीस प्रतिपूर्ति अनुदान राशि के तहत पांच-पांच हजार रुपये मिलते हैं। यह रुपये सीधे अभिभावकों के खाते में जाते हैं। तत्कालीन डीसी ने गरीब बच्चों को अनुदान राशि देने के नाम पर भी रिश्वत मांगी थी।
जब रिश्वत नहीं मिली तो मुरादाबाद जिले के करीब चार करोड़ रुपये वापस करा दिए थे। अब उन रुपये को दोबारा मंगाने के लिए शासन को पत्र लिखा है। सीओ वरुण कुमार ने बताया कि पूरे मामले की जांच की जा रही है। जांच के बाद अग्रिम कार्रवाई की जाएगी।
आरटीई के लिए प्रवेश प्रक्रिया
आरटीई के तहत प्रक्रिया में पोर्टल पर अभिभावकों काे अपने वार्ड के विद्यालय में प्रवेश के आवेदन करना होता है। आवेदन करने के दौरान ही अपने आय, निवास, जन्मतिथि और बैंक खाते से जुडे दस्तावेज अपलोड करने होते हैं। जिनका सत्यापन खंड शिक्षा के लागिन पर होता है।
दूसरा सत्यापन बेसिक शिक्षा अधिकारी स्तर पर होता है। आवेदन सत्यापित होने पर जिला प्रशासन की मौजूदगी में लाटरी निकाली जाती है जो कि पूरी तरह कम्प्यूटराइज होती है। मानवीय हस्तक्षेप नहीं होता है।
इस दौरान अभ्यर्थी की ओर भरे गए स्कूल के विकल्पों में से सीट की उपलब्धता के आधार स्कूल आवंटित होता है। इसके लिए आवेदन शुरू हाेने से पहले ही मैपिंग होती है जो कि जिला स्तरीय अधिकारियों की ओर से होती है। इस बार खंड शिक्षा अधिकारी स्तर से हुई थी।