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    बाहर सरकारी ताला, अंदर चल रहा था खेल! मुरादाबाद में झोलाछाप डॉक्टर का खौफनाक दुस्साहस

    Updated: Fri, 23 Jan 2026 10:33 PM (GMT+05:30)

    मुरादाबाद में झोलाछाप डॉक्टरों का दुस्साहस सामने आया है, जहाँ सील किए गए अस्पताल भी मरीजों का इलाज कर रहे हैं। कुंदरकी के आरव हेल्थ केयर में सील तोड़न ...और पढ़ें

    जांच करते अध‍िकारी

    जांच करते अध‍िकारी

    HighLights

    1. आरव हेल्थ केयर अस्पताल व एमए हेल्थ केयर का मामला

    2. बिलारी के अस्पताल में आपरेशन के बाद महिला की बिगड़ी हालत

    3. स्वास्थ्य विभाग की टीम ने मुख्य द्वार पर दोबारा सील लगाकर की खानापूर्ति

    जागरण संवाददाता, मुरादाबाद। जिले में झोलाछाप को खूब बढ़ावा मिल रहा है। कुंदरकी में भी ऐसा ही एक मामला सामने आया है। पिछले माह एडी हेल्थ डा. आशु अग्रवाल ने अस्पताल को सील किया था। लेकिन, संचालक ने सील तोड़कर मरीजों का उपचार शुरू कर दिया। यह मामला तब खुला, जब शुक्रवार को एक मरीज की हालत बिगड़ने पर हंगामा हुआ। हंगामे की खबर पर पहुंची स्वास्थ्य विभाग की टीम ने फिर खानापूर्ति कर दी।

    अंदर मरीज थे, मुख्य द्वार को सील कर दिया। साइड वाले छोटे रास्ते को न तो बंद कराया और न ही वहां से मरीजों को शिफ्ट किया गया। इस कार्रवाई ने स्वास्थ्य विभाग की कार्य प्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। वहीं पाकबड़ा में भी यही स्थिति है। कई बार हंगामे के बाद भी मरीजों की जिंदगी से झोलाछाप खिलवाड़ कर रहे हैं। झोलाछाप के अस्पताल पर सील की कार्रवाई व्यवस्था को ठेंगा दिखा रही है।

    कुंदरकी-डींगरपुर संपर्क मार्ग स्थित आरव हेल्थ केयर अस्पताल को 23 दिसंबर 2025 को एडी हेल्थ डा. आशु अग्रवाल ने सील कराया था। लेकिन फिर भी वहां मरीजों का उपचार जारी रहा। बिलारी निवासी विकास कुमार के अनुसार, एक जनवरी 2026 को उसकी पत्नी संजना का बिलारी स्थित एमए हेल्थ केयर में कथित डा. आदिल ने आपरेशन किया था जो, गलत हुआ। इसके बाद भी महिला की हालत में सुधार नहीं हुआ।

    फिर, झोलाछाप ने महिला को कुंदरकी स्थित सील अस्पताल में बुलाया, जहां उपचार जारी रखा। फिर भी उसकी हालत में कोई सुधार नहीं हुआ। शुक्रवार को महिला की हालत गंभीर होने पर स्वजन ने हंगामा किया। इसकी सूचना पर प्रभारी चिकित्सा अधीक्षक डा. सौरभ बरतारिया टीम के साथ मौके पर पहुंचे। टीम को सील अस्पताल में तीन मरीज भर्ती मिले। इस मामले में स्वास्थ्य विभाग ने आरोपित झोलाछाप के विरुद्ध कुंदरकी थाने में शिकायत करने का दावा किया है।

    खबरें और भी

    सील लगने के बाद बदलते हैं नाम, मरीजों की जिंदगी से कर रहे खिलवाड़

    स्वास्थ्य विभाग द्वारा अपंजीकृत डाक्टर और झोलाछापों के विरुद्ध की जा रही सील की कार्रवाई जमीनी स्तर पर ठेंगा साबित हो रही है। क्लीनिक या अस्पताल सील किए जाते हैं, लेकिन झोलाछाप नाम बदलकर, सील तोड़कर और बोर्ड हटाकर दोबारा संचालन शुरू कर देते हैं। गांव मोहनपुर, भीकनपुर कुलवाड़ा, बरेली वाली गली, भुर्जी वाली गली, हरियाना संपर्क मार्ग, अहमदनगर जैतवाड़ा, चकफाजलपुर, डींगरपुर संपर्क मार्ग और गुलड़ तिराहा जैसे क्षेत्रों में मेडिकल, लैब और क्लीनिक के नाम पर झोलाछाप इलाज कर रहे हैं।

    केस एक- जच्चा-बच्चा की मौत के बाद हंगामा : नगर क्षेत्र में नौ जनवरी को एक अपंजीकृत क्लीनिक पर झोलाछाप के इलाज से इमरतपुर सिरसी निवासी जच्चा-बच्चा की मौत हो गई थी। इस घटना के बाद विभागीय कार्रवाई हुई, लेकिन कुछ समय बाद दूसरे स्थान पर फिर से इलाज शुरू होने की चर्चाएं सामने आईं।

    केस दो- एक साल पहले जेल जा चुका संचालक: नगर के डींगरपुर मार्ग पर स्थित अपंजीकृत क्लीनिक में बिलारी निवासी एक पीड़ित महिला का कथित डा. आदिल द्वारा अनैतिक और गलत तरीके से आपरेशन किया गया। मामले में पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज कर आरोपी को जेल भेजा, लेकिन सवाल यह है कि ऐसे झोलाछाप इतने लंबे समय तक खुलेआम इलाज कैसे करते रहे।

    केस तीन- अस्पताल सील होने के बाद बदल दिया नाम: नगर के जीरो प्वाइंट पर सेवा अस्पताल नाम से संचालित एक अपंजीकृत अस्पताल को कार्रवाई के बाद बंद कराया गया, लेकिन बाद में वही अस्पताल नाम बदलकर दोबारा संचालित पाया गया। इस पर स्वास्थ्य विभाग को दोबारा कानूनी कार्रवाई करनी पड़ी।

     

    अब तक उपचार में 50 हजार रुपये से अधिक खर्च हो चुके हैं, फिर भी पत्नी को राहत नहीं मिली। ऐसे लोगों के विरुद्ध कार्रवाई होनी चाहिए।

    - विकास कुमार, मरीज का पति

     

     

    हंगामे की सूचना पर हम लोग पहुंचे थे। सील अस्पताल खुला देखा तो उसे दोबारा सील किया गया। इस संबंध में संबंधित थाने में तहरीर देकर प्राथमिकी भी दर्ज कराई जाएगी।

    - डा. सौरभ बरतारिया, प्रभारी चिकित्सा अधिकारी, कुंदरकी सीएचसी


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