स्क्रीन टाइम छोड़ शतरंज की बिसात पर बढ़े कदम: मुरादाबाद के इन नन्हें खिलाड़ियों ने नेशनल लेवल पर मचाया धमाल
मुरादाबाद में बच्चे स्क्रीन टाइम छोड़कर शतरंज की बिसात पर अपनी रणनीति बना रहे हैं, जिससे वे राष्ट्रीय स्तर तक पहचान बना रहे हैं। विश्व शतरंज दिवस के अ ...और पढ़ें

जिला शतरंज एसोसिएशन की ओर से आयोजित प्रतियोगिता में प्रतिभाग करते खिलाड़ी। सौ. आयोजक
HighLights
कोई बना स्टेट चैंपियन तो कोई राष्ट्रीय प्रतियोगिता तक पहुंचा
गौरव शुक्ला, मुरादाबाद। राजा, वजीर, ऊंट, घोड़ा और प्यादों के बीच खेली जाने वाली शतरंज की बाजी अब केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि बच्चों के मानसिक विकास का मजबूत माध्यम बन चुकी है। विश्व शतरंज दिवस (20 जुलाई) को मनाया जाता है। मुरादाबाद में भी स्कूलों, अकादमियों और घरों में इस खेल के प्रति रुचि लगातार बढ़ रही है।
भारत के विश्व चैंपियन खिलाड़ियों की सफलता ने नई पीढ़ी को शतरंज की बिसात तक पहुंचाया है। वर्तमान में शहर में लगभग 600 खिलाड़ी शतरंज खेल रहे हैं। वहीं कुछ साल पहले तक जिन नन्हें हाथों में मोबाइल फोन था, आज उन्हीं हाथों में शतरंज के मोहरे हैं। ऑनलाइन गेम और वीडियो देखने में समय बिताने वाले बच्चे अब 64 खानों की बिसात पर ऐसी रणनीति बुन रहे हैं कि राष्ट्रीय स्तर तक अपनी पहचान बना रहे हैं।
शहर में 21 साल में 20 गुणा बढ़ा शतरंज का कारवां
मुरादाबाद में शतरंज का संगठित सफर 2005 में शुरू हुआ था। जिला शतरंज स्पोर्ट्स एसोसिएशन के अध्यक्ष चंद्रकांत सरन के अनुसार उस समय जिले में महज 30 खिलाड़ी ही नियमित रूप से शतरंज खेलते थे।
लगातार प्रतियोगिताओं, प्रशिक्षण और अभिभावकों की बढ़ती रुचि के चलते आज यह संख्या 600 से अधिक पहुंच चुकी है। जिले के खिलाड़ी अब राज्य ही नहीं, बल्कि राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में भी अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा रहे हैं।
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नन्हीं चालों से अलिश्बा बढ़ा रहीं बेटियों का मान
मोबाइल से दूरी बनाने के लिए शतरंज से जुड़ीं अलिश्बा आजम आज मुरादाबाद की नई पहचान बन चुकी हैं। उत्तर प्रदेश अंडर-9 चैंपियन बनने के बाद उन्होंने 6 से 12 जुलाई तक रांची में आयोजित 39वीं राष्ट्रीय अंडर-9 गर्ल्स शतरंज चैंपियनशिप में प्रतिभाग किया।
यहां पर उन्होंने 159 खिलाड़ियों के बीच 11 में छह अंक अर्जित कर अपनी रणनीति का लोहा मनवाया। अनरेटेड होने के बावजूद दो फिडे रेटेड खिलाड़ियों को मात देकर उन्होंने साबित कर दिया कि लगन और अभ्यास किसी भी रेटिंग से बड़े होते हैं।
शतरंज की बिसात पर इनाया की सधी चाल से प्रतिद्वंदी पस्त
मुरादाबाद की इनाया आजम ने कम उम्र में ही शतरंज की बिसात पर अपनी अलग पहचान बना ली है। वह अंडर-15 राष्ट्रीय शतरंज चैंपियनशिप में उत्तर प्रदेश का प्रतिनिधित्व कर चुकी हैं।
लगातार अभ्यास और सटीक रणनीति के दम पर उन्होंने राज्य और राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में प्रभावशाली प्रदर्शन कर जिले का मान बढाया। उनका सपना अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का प्रतिनिधित्व कर मुरादाबाद का नाम रोशन करना है।
सात साल में राष्ट्रीय मंच तक पहुंचे हर्लिव सिंह खुराना
महज साढ़े चार वर्ष की उम्र में शतरंज खेलना शुरू करने वाले हर्लिव सिंह खुराना ने अंडर-7 वर्ग में उन्होंने कई जिला और फिडे रेटेड प्रतियोगिताओं में शानदार प्रदर्शन कर खिताब अपने नाम किए।
उत्तर प्रदेश अंडर-7 स्टेट चैंपियनशिप में चौथा स्थान हासिल करने के बाद 30 जून से 4 जुलाई 2026 तक नागपुर में आयोजित राष्ट्रीय अंडर-7 ओपन शतरंज चैंपियनशिप में जिले का प्रतिनिधित्व टाप-100 बोर्ड पर खेलने का अवसर मिला और पदक से सम्मानित होकर जिले का मान बढाया।
शौर्य खुद बने चैंपियन, अब गढ़ रहे नए सितारे
बिना किसी पेशेवर कोचिंग के उत्तर प्रदेश सीनियर शतरंज चैंपियन बनने वाले शौर्य प्रभाकर रस्तोगी आज मुरादाबाद में नई प्रतिभाओं को तराश रहे हैं।
पिता से सीखे इस खेल को उन्होंने मेहनत के दम पर 2023 की उत्तर प्रदेश सीनियर स्टेट शतरंज चैंपियनशिप जीती। अब उनका सपना है कि मुरादाबाद से भी एक ग्रैंडमास्टर निकले। उनकी देखरेख में कई बच्चे शतरंज की बिसात पर बड़े सपने बुन रहे हैं।