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खांसी और सांस फूलने को न करें नजरअंदाज, हो सकते हैं स्वाइन फ्लू के लक्षण; बढ़ते मामलों के बीच डॉक्टरों की चेतावनी

Published: Mon, 07 Sep 2026 12:59 PM (IST)

स्वाइन फ्लू के बढ़ते मामलों के बीच स्वास्थ्य विभाग ने मरीजों की पहचान का तरीका बदला है। अब तेज बुखार ...और पढ़ें

प्रतीकात्मक तस्वीर

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HighLights

  1. स्वास्थ्य विभाग ने स्वाइन फ्लू पहचान के तरीके बदले।

  2. सांस फूलना अब स्वाइन फ्लू का प्रमुख संकेत।

  3. गंभीर मरीजों की पहचान कर समय पर इलाज।

जागरण संवाददाता, मुरादाबाद। स्वाइन फ्लू के बढ़ते मामलों के बीच स्वास्थ्य विभाग ने मरीजों की पहचान का तरीका और सतर्क कर दिया है। अब केवल तेज बुखार को ही स्वाइन फ्लू का प्रमुख संकेत मानकर नहीं चला जाएगा। सांस फूलना, सांस लेने में परेशानी और सांस से जुड़ी गंभीर शिकायत वाले मरीजों पर भी विशेष नजर रखी जा रही है।

ऐसे मरीजों की अलग से स्क्रीनिंग कर उनकी स्थिति का आकलन किया जा रहा है। जिला अस्पताल में स्वाइन फ्लू की आशंका वाले मरीजों को लक्षणों के आधार पर चिन्हित किया जा रहा है। अब तक सामने आए स्वाइन फ्लू संक्रमितों में 16 मरीज को खांसी थी और सांस फूलने की भी परेशानी थी।

इसको देखते हुए चिकित्सक बुखार के साथ सांस लेने में परेशानी है या सामान्य स्थिति में भी सांस फूल रही है, उन्हें गंभीर श्रेणी में रखकर जांच और निगरानी की जा रही है। इसका मकसद ऐसे मरीजों को समय रहते पहचानना है, जिनमें संक्रमण फेफड़ों तक पहुंचने का खतरा हो सकता है।

फिजिशियन डॉ. आशीष कुमार के अनुसार, स्वाइन फ्लू में हर मरीज में एक जैसे लक्षण दिखाई देना जरूरी नहीं है। कुछ मरीजों में बुखार प्रमुख हो सकता है, जबकि गंभीर स्थिति में सांस लेने में परेशानी भी मजबूत संकेत बन सकती है। इसलिए सांस फूलने को नजरअंदाज करना मरीज के लिए दिक्कत पैदा कर सकता है। इसमें कुछ चिकित्सक सीटी चेस्ट भी कराकर देख रहे हैं कि कहीं संक्रमण फेफड़ों तक तो नहीं पहुंचा है।

खांसी और गले के संक्रमण को न करें नजरअंदाज

स्वाइन फ्लू के बढ़ते मामलों के बीच खांसी और गले में संक्रमण को सामान्य समझकर नजरअंदाज करना भारी पड़ सकता है। शुरुआत में मरीज को गले में खराश, खांसी, बुखार और बदन दर्द जैसे लक्षण दिखाई देते हैं।

कमजोर प्रतिरोधक क्षमता वाले मरीजों में संक्रमण तेजी से फेफड़ों तक पहुंच सकता है और सांस लेने में परेशानी बढ़ सकती है। फिजिशियन डॉ. सौभाग्य मिश्रा ने बताया कि बुजुर्ग, छोटे बच्चे, गर्भवती महिलाएं और पहले से सांस की बीमारी से पीड़ित मरीजों को स्वाइन फ्लू में जटिलता का खतरा अधिक रहता है। इसके अलावा मधुमेह, हृदय रोग और कमजोर प्रतिरोधक क्षमता वाले मरीजों को भी विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है।

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