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    UP पुलिस की वर्दी में लाड़ले को देख छलकी मां की आंखें, साकार हुए पिता के सपने

    By Bhushan Pal Edited By: Praveen Vashishtha
    Updated: Mon, 27 Apr 2026 02:08 PM (IST)

    मुजफ्फरनगर में रिजर्व पुलिस लाइन में आयोजित रिक्रूट आरक्षी भर्ती परेड माता-पिता के सपनों के साकार होने का प्रतीक बन गई। वर्दी में बेटों को देख मां की ...और पढ़ें

    मुजफ्फरनगर रिजर्व पुलिस लाइन में रिक्रूट आरक्षी दीक्षांत परेड के बाद अपने-अपने अभिभावकों के साथ आरक्षी। जागरण

    मुजफ्फरनगर रिजर्व पुलिस लाइन में रिक्रूट आरक्षी दीक्षांत परेड के बाद अपने-अपने अभिभावकों के साथ आरक्षी। जागरण

    HighLights

    1. मुजफ्फरनगर रिजर्व पुलिस लाइन में आयोजित रिक्रूट आरक्षी भर्ती परेड

    2. परेड के बाद आरक्षियों की स्वजन से मुलाकात के दौरान भावुक करने वाला माहौल

    भूषण भास्कर, मुजफ्फरनगर। रिजर्व पुलिस लाइन में आयोजित रिक्रूट आरक्षी भर्ती परेड केवल एक कार्यक्रम नहीं रहा, बल्कि यह माता-पिता के सपनों का साकार होने का प्रतीक बन गया। जब मां ने अपने बेटे को वर्दी में देखा, तो उसकी आंखें खुशी से छलक गईं।

    पिता ने बेटे को गोद में उठाया, मानो वह कह रहा हो, "पापा, जो आप चाहते थे, मैंने वह कर दिखाया।" बेटे के सिर पर हाथ रखकर और आकाश की ओर देखते हुए पिता का सीना गर्व से चौड़ा हो गया। बहनें भी भाइयों को देखकर खुशी से फूली नहीं समाईं।

    रविवार का दिन सभी अभिभावकों के लिए यादगार बन गया। यह वह दिन था, जिसमें कई परिवारों के वर्षों के संघर्ष, त्याग और तपस्या का परिणाम सामने आया। जब नवनियुक्त आरक्षियों ने परेड में कदमताल की, तो हर कदम में देश सेवा का जज्बा स्पष्ट झलका।

    परेड के बाद आरक्षियों की स्वजनों से मुलाकात ने माहौल को भावुक कर दिया। आरक्षियों की कमांड की गूंज, तालबद्ध कदमों की रोमांचकारी आवाज और वर्दी की गरिमा ने माहौल को देशभक्ति से ओतप्रोत कर दिया। जैसे ही परेड समाप्त हुई, कठोर अनुशासन का वह नजारा भावनाओं के सैलाब में बदल गया। परेड के पश्चात, नवनियुक्त आरक्षी आकाश ने अपनी मां दुलारी से मिले, और मां ने उन्हें गले से लगा लिया। काफी देर तक मां और बेटा गले मिले रहे।

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    आरक्षी नितिन ने अपनी टोपी उतारकर अपनी मां कुसुम के सिर पर रख दी, जिससे मां की आंखें भर आईं। आरक्षी अरविंद ने अपनी बड़ी बहन को सैल्यूट किया, जो परिवार के अनुशासन, सम्मान और संघर्ष की झलक प्रस्तुत करता है। बहन ने खुशी में भाई पर फूल बरसाए। जवान अजय ने अपने पिता को कैप पहनाकर खुशी से गोद में उठा लिया, जिससे पिता का गर्व स्पष्ट था।

    कई आरक्षियों ने अपने माता-पिता के चरण स्पर्श कर आशीर्वाद लिया। यह केवल एक प्रतीकात्मक क्षण नहीं था, बल्कि अपने बच्चों को सफलता की सीढ़ी पर चढ़ते हुए देखने और सपने साकार होने का अहसास था। एसएसी संजय कुमार वर्मा ने कहा कि पुलिस की वर्दी के पीछे केवल एक जवान नहीं, बल्कि पूरे परिवार के सपनों, त्याग और देशभक्ति की कहानी छिपी होती है।