कभी नहीं भूल सकता वो रात, खोया था भाई जैसा दोस्त; हत्यारों को फांसी की सजा सुन भावुक हुए बिजेंद्र सिंह
मुजफ्फरनगर कोर्ट ने किसान राज सिंह हत्याकांड के चार दोषियों सुनील, अनिल, अजीत और सूरज उर्फ काला को फांसी की सजा सुनाई है। ...और पढ़ें
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HighLights
मुजफ्फरनगर कोर्ट ने राज सिंह के चार हत्यारों को फांसी दी।
न्यायालय ने 15 साल की देरी पर न्यायिक व्यवस्था पर टिप्पणी की।
पीड़ित परिवार ने फैसले पर संतोष जताया, दोषियों की हालत बिगड़ी।
रोहिताश्व कुमार वर्मा, मुजफ्फरनगर। भोकरहेड़ी गांव के किसान राज सिंह के हत्यारों को न्यायालय ने फांसी की सजा सुनाई है। वारदात के चश्मदीद बिजेंद्र ने निर्णय पर संतोष जताया। फैसला आने के बाद उनका कहना है कि पुन: उसकी आंखों के सामने वारदात का मंजर तैर गया।
वह कभी इस खौफनाक वारदात को नहीं भूला सकते। कहा कि उसने भाई जैसा दोस्त खोया था। यह निर्णय उनके दोस्त की आत्मा को शांति तथा उनके दिल को सुकून देगा। उन्हें आस थी कि एक दिन न्याय का सूरज निकलेगा, जिसमें हत्यारों को सजा मिलेगी।
भोकरहेड़ी निवासी चौधरी बिजेंद्र सिंह पेशे से किसान हैं। खेती-किसानी और गांव का होने के कारण राज सिंह से गहरी मित्रता थी। दोनों का एक-दूसरे के यहां खूब आना-जाना था। वहीं शादी-विवाह के अलावा वह विभिन्न कार्यक्रमों में साथ ही रहते थे। 20 अगस्त 2011 की देर शाम को भी राज सिंह ने बहन के घर कोथली देने की बात कर साथ चलने को कहा तो इन्कार नहीं कर सका था।
बाइक पर दोनों साथ चले थे, लेकिन कुड़ाना में घुसने से पहले ही बदमाशों ने रास्ता रोक लिया। बदमाश दोनों को खेत में ले गए, जहां उनके साथ मारपीट की गई। इसके बाद बदमाशों ने राज सिंह को उनकी आंखों के सामने गोली मार दी। उन्हें भी बदमाशों ने गोली मारने का प्रयास किया, लेकिन फायर मिस हो गया था।
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उन्होंने कहा कि वह मनहूस रात आज भी उनकी आंखों के सामने घूम जाती है। बिजेंद्र सिंह ने भावुक होते हुए बताया कि राज सिंह उनके सबसे करीबी मित्र थे। दोनों साथ मिलकर खेतों में सिंचाई करते थे। गन्ना लेकर शुगर मिल जाते थे और रिश्तेदारी में भी हमेशा साथ ही आते-जाते थे। राजसिंह के जाने से जिंदगी का एक अहम हिस्सा छिन गया था।
स्वजन बोले, न्यायालय ने उन्हें न्याय दिया
मुजफ्फरनगर: न्यायालय ने किसान राज सिंह के हत्यारों को फांसी की सजा सुनाई है। इस पर राज सिंह की मां कलावती, पत्नी अमरेश देवी ने कहा कि न्यायपालिका पर पूरा भरोसा था। न्यायालय ने उनके वर्षों पुराने जख्मों पर मरहम लगाने का काम किया है। मां कलावती ने कहा कि बेटे को खोने का दर्द कभी कम नहीं हो सकता, लेकिन हत्यारों को फांसी की सजा मिलने से यह संतोष जरूर है कि न्याय मिला है।
पत्नी अमरेश देवी ने कहा कि इतने वर्षों तक हर तारीख पर इंसाफ का इंतजार किया। राज सिंह का बड़ा बेटा सचिन पीएसी में कांस्टेबल है। उसकी पत्नी संध्या ने भी फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि परिवार को न्याय मिलने से सभी को मानसिक राहत मिली है। दो वर्ष पहले राज सिंह के छोटे बेटे नितिन का निधन हो गया था।
नितिन की पत्नी पूजा ने कहा कि वर्षों की लंबी कानूनी लड़ाई के बाद मिला यह फैसला न्याय व्यवस्था में उनके विश्वास को और मजबूत करता है।
अब तक 17 दोषियों को फांसी की सजा सुना चुके रवि दिवाकर
जागरण संवाददाता, मुजफ्फरनगर: न्यायाधीश रवि कुमार दिवाकर ने जनपद में लंबित पत्रावलियों पर सुनवाई करने के साथ निर्णय सुनाने का रिकार्ड बनाया है। वह हत्या के मामलों को गंभीरता से परीक्षण के बाद निर्णय सुना रहे हैं। अब तक जनपद में हत्या के 17 दोषियों को फांसी की सजा सुना चुके हैं। न्यायाधीश ने ज्ञानवापी परिसर में सर्वे का आदेश सुनाया था, वहीं संभल में भी कई कड़े निर्णय सुनाए थे।
जनपद में 29 नवंबर 2025 से अपर जिला एवं सत्र न्यायालय, फास्ट ट्रैक कोर्ट-3 न्यायालय में पदभार ग्रहण करने के बाद न्यायाधीश रवि कुमार दिवाकर का लगभग साढ़े सात माह का कार्यकाल बीत चुका है। इस अवधि में वह लगभग 10 से 15 साल पुरानी पत्रावलियों पर तेजी से सुनवाई कर रहे हैं।
शुक्रवार को उन्होंने फांसी के आदेश में भी न्यायिक प्रणाली में देरी से मिलने वाले न्याय पर प्रतिक्रिया दी है। पिछले साढ़े तीन माह के भीतर वह हत्या के छह मामलों में 17 दोषियों को फांसी की सजा सुना चुके हैं, जिनमें एक महिला दोषी भी शामिल है। उनके न्यायालय में कुख्यात सुशील उर्फ मूंछ की पत्रावली भी लंबित है। वह पिछले माह एसएसपी को पत्र भेजकर सुरक्षा की मांग कर चुके हैं।
6 अप्रैल 2026
15 अक्टूबर 2019 को 40 लाख रुपये के लेन-देन के विवाद में अधिवक्ता समीर सैफी की हत्या कर दी गई थी। दोषी सिंगोल अल्वी, सोनू उर्फ रिजवान और शालू उर्फ अरबाज को मृत्युदंड सुनाया।
28 अप्रैल 2026
भौराकलां के सिसौली निवासी शेखर की वर्ष 2019 में 70 हजार रुपये के लेन-देन के विवाद में हत्या कर दी गई थी। न्यायालय ने मुकेश, प्रदीप, संदीप और सोनू को मृत्युदंड की सजा सुनाई थी।
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30 मई 2026:
चरथावल क्षेत्र में वर्ष 2011 में राजेश देवी और उनके छह वर्षीय बेटे हिमांशु की हत्या के दोषी रईस उर्फ रहीस निवासी बरेली को मृत्युदंड सुनाया था।
20 जून 2026
ककरौली निवासी राजेंद्र सैनी की वर्ष 2018 में हत्या कर शव को जलाने के दोषी रामकरण उर्फ सावन गिरी और गजेंद्र उर्फ गीलू को मृत्युदंड सुनाया गया।
2 जुलाई 2026
बुढ़ाना मोड़ पर वर्ष 2020 में गश्त के दौरान होमगार्ड रतिराम की हत्या के दोषी दीपक को मृत्युदंड की सजा सुनाई गई।
6 जुलाई 2026
प्रधान पद की रंजिश में हुई राजबीर सिंह की हत्या के मामले में पूर्व प्रधान प्रमोद कुमार और सहदेव उर्फ पप्पू को मृत्युदंड दिया गया।
17 जुलाई 2026
शामली के गांव कुड़ाना के जंगल में 11 अगस्त 2011 में किसान राज सिंह हत्याकांड के दोषी सुनील, अनिल, अजीत और सूरज उर्फ काला को सुनाया मृत्युदंड।
मृत्युदंड सुनाने के साथ कठघरे में खड़ी की न्यायिक व्यवस्था
जागरण संवाददाता, मुजफ्फरनगर: रोड होल्डअप कर लूटपाट के दौरान किसान राज सिंह की हत्या व उसके दोस्त को पीटकर बंधक बनाने के मामले में न्यायालय ने सजा सुनाई है। हत्यारों को फांसी की सजा सुनाने के साथ न्यायाधीश ने न्यायिक व्यवस्था को भी कठघरे में खड़ा कर दिया। कहा कि लूटपाट के दौरान हत्या के गंभीर मामले में न्यायालय में 15 साल मुकदमा चलना न्यायिक व्यवस्था की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगाता है।
न्यायालय ने शुक्रवार को अपने 57 पेश के आदेश में कई टिप्पणियां कीं। न्यायालय ने कहा कि रोड होल्डअप के दौरान हत्या जैसे गंभीर मामलों में 15 साल तक मुकदमा चलना निश्चित रूप से अपराधियों का मनोबल बढ़ाता है और न्याय व्यवस्था में आम जनता के विश्वास को कम करता है।
कहा कि 'न्याय में देरी, न्याय से इन्कार के समान है'। इस मूलभूत कानूनी सिद्धांत का अर्थ है कि यदि कोई कानूनी उपाय या समाधान समय पर प्रदान नहीं किया जाता है तो यह प्रभावी रूप से किसी भी उपाय के न होने के समान है। जब न्यायिक प्रक्रिया वर्षों तक खिंचती है तो इसके गंभीर परिणाम हो सकते हैं। जैसे, साक्ष्य और गवाहों की स्मृति का क्षरण हो सकता है।
गवाह के अपराधियों को पहचानने की शक्ति कम हो सकती है। इस दौरान न्यायाधीश ने एक कहानी के जरिए यह बताने की कोशिश की कि न्यायिक प्रक्रिया में देरी के कितने गंभीर परिणाम होते हैं। कहानी में उन्होंने एक कस्बे के छोटे किसान श्याम की भूमि कब्जाने के लंबे समय तक चले मुकदमे का उदाहरण दिया है।
जब किसान को न्याय मिला तो वह शारीरिक एवं आर्थिक रूप से कमजोर हो चुका था। यह कहानी दर्शाती है कि न्याय में देरी से पीड़ा होती है और अंतत: यह न्याय से वंचित होने का रूप ले लेती है। लोगों के अधिकारों और गरिमा की रक्षा के लिए त्वरित और निष्पक्ष न्याय अत्यंत आवश्यक है।
न्याय व्यवस्था लोकतांत्रिक समाज की आधारशिला
न्यायालय ने कहा कि न्याय का मूल उद्देश्य केवल विवाद का निस्तारण करना नहीं, बल्कि विधि के शासन को प्रभावी बनाए रखना है। न्याय तभी सार्थक माना जाता है जब वह निष्पक्ष होने के साथ-साथ समयोचित भी हो। न्याय व्यवस्था किसी भी लोकतांत्रिक समाज की आधारशिला है और उसकी विश्वसनीयता इस बात पर निर्भर करती है कि न्याय व निष्पक्ष, प्रभावी एवं यथासमय प्रदान किया जाए।
मृत्युदंड सुनते ही कांपी रूह... दोषियों की हालत बिगड़ी
जागरण संवाददाता, मुजफ्फरनगर: शुक्रवार को प्रात: 10:30 बजे न्यायालय में राज सिंह हत्याकांड की पत्रावली पर सुनवाई के दौरान चारों दोषियों को कठघरे में खड़ा किया गया। न्यायालय ने चारों दोषियों को सजा सुनाना आरंभ किया तो चंद रुपयों के लिए दूसरों को मौत बांटने वालों की रूह कांप गई। दो दोषी बेहोशी की हालत में पहुंच गए, जिन्हें पुलिस और अधिवक्ताओं ने संभाला। सजा सुनाते हुए न्यायाधीश ने कहा कि क्रूर कृत्यों में कड़ी सजा से बचने देना न्याय का मजाक होगा।
न्यायालय ने माना कि चारों दोषी आदतन अपराधी हैं, जिनका संगठित गिरोह है। इनके विरुद्ध गैंग्सटर एक्ट की कार्रवाई हो चुकी है। दोषी अजीत पर लूट, हत्या और हत्या के प्रयास के पांच तथा अनिल पर चार, सुनील व सूरज उर्फ काला पर भी चार-चार लूट, हत्या और हत्या के प्रयास के मुकदमे दर्ज हैं।
देवरिया से सुनील प्रजापति काम-काज के लिए यहां आया था, लेकिन अपराधियों के साथ मिलकर लूटपाट की वारदात करने लगा। शुक्रवार को जैसे ही न्यायालय में सुनवाई शुरू हुई तो चारों के चेहरों पर खौफ तैर गया। न्यायाधीश ने चारों को मृत्युदंड सुनाया तो सुनील और अनिल की हालत बिगड़ गई।
दोनों न्यायालय में बेहोशी की हालत में हो गए। दोनों को पुलिसकर्मियों और अधिवक्ताओं ने संभाला। बाद में सभी को न्यायिक अभिरक्षा में लेकर जिला कारागार में निरुद्ध कराया गया। न्यायालय ने दोषियों के विरुद्ध साफ कहा कि क्रूर कृत्यों में कड़ी सजा से बचने देना न्याय का मजाक होगा। जीवन ईश्वर देता है तो वही ले सकता है। किसी दूसरे को किसी का जीवन छीनने का अधिकार नहीं है।