बेजुबान से प्रेम की अनोखी मिसाल, बुजुर्ग बैल की मौत पर किसान ने बेटे की तरह किया अंतिम संस्कार; तेरहवीं की तैयारी
Muzaffarnagar News: किसान चौधरी ब्रजवीर सिंह ने अपने खेत में एक बुजुर्ग बैल का वैदिक मंत्रोच्चार के साथ अंतिम संस्कार ...और पढ़ें
HighLights
वर्ष 2011 में कटान से मुक्त कराकर गोशाला में छोड़े गए थे बैल।
किसान ने छह साल तक परिवार के सदस्य की तरह की सेवा।
संवाद सूत्र, मोरना (मुजफ्फरनगर)। आज के दौर में जब इंसान अपने स्वार्थ में अपनों तक से दूरी बना लेता है, वहीं किसान चौधरी ब्रजवीर सिंह ने एक बुजुर्ग बैल की मौत के बाद इंसानियत और संवेदना की मिसाल पेश की।

बैल का फाइल फोटो।
परिवार के सदस्य की तरह छह वर्षों तक सेवा करने के बाद बैल की मृत्यु पर उन्होंने खेत में वैदिक मंत्रोच्चार के बीच विधि-विधान से उसका अंतिम संस्कार कराया। साथ ही आगामी नौ सितंबर को तेरहवीं पर हवन कराने का निर्णय लिया है।

बैल की अंतिम यात्रा शुरू होने से पूर्व श्रद्धांजलि देते किसान ब्रजवीर सिंह दाएं और उनके बराबर में खड़े स्वामी विश्वानंद महाराज व ग्राम सुधार सेवा समिति के अध्यक्ष ऋषिपाल सिंह। जागरण
वर्ष 2011 में पुलिस ने कटान को ले जाते समय मुक्त कराया था ये बैल
मोरना-शुकतीर्थ स्थित राठी कृषि फार्म हाउस के किसान ब्रजवीर सिंह ने बताया कि वर्ष 2011 में पुलिस ने कटान के लिए ले जाए जा रहे कुछ बैलों को मुक्त कराया था। बाद में इन्हें शुकतीर्थ स्थित गोशाला में भेज दिया गया।
ब्रजवीर ने गोशाला से पांच हजार रुपये की दान रसीद कटवाकर दो बैलों को अपने खेतों में जुताई के लिए ले आए। दोनों बैल वर्ष 2020 तक खेतों में जुताई करते रहे और धीरे-धीरे परिवार का हिस्सा बन गए। उम्र बढ़ने के साथ जब दोनों बैल खेती के काम के योग्य नहीं रहे तो किसान ने उन्हें बेचने या बेसहारा छोड़ने के बजाय उनकी सेवा करने का निर्णय लिया।

पिछले छह वर्षों से वह स्वयं उनके चारे-पानी और देखभाल की जिम्मेदारी निभा रहे थे। गुरुवार रात इनमें से एक बैल की मृत्यु हो गई। शुक्रवार सुबह गुरुकुल आश्रम के स्वामी विश्वानंद महाराज के सानिध्य में छात्र सुदामा, कार्तिक, चिंटू व अनु ने वैदिक मंत्रों का उच्चारण किया।
इसके बीच किसान ने अपने खेत में बैल का विधि-विधान से अंतिम संस्कार कराया तथा तेरहवीं पर हवन कराया जाएगा। इस दौरान गोशाला के रामसहोदर मिश्रा, ग्राम सुधार सेवा समिति के अध्यक्ष ऋषिपाल सिंह, सनी, बबलू आदि मौजूद रहे।
