लापरवाही ने ली महिला की जान, कुत्ता काटने पर नहीं लगवाई वैक्सीन; दाे साल बाद रेबीज के लक्षण उभरने के अगले दिन मौत
Muzaffarnagar News: मुजफ्फरनगर में दो साल पहले कुत्ते के काटने के बाद एंटी रेबीज वैक्सीन न लगवाने से महिला की रेबीज से मौत हो गई। ...और पढ़ें

HighLights
वैक्सीन न लगवाने के कारण हुई रेबीज।
लक्षण दिखने पर उपचार के दौरान मौत।
संवाद सूत्र, जानसठ (मुजफ्फरनगर)। दो साल पहले गांव में घूम रहे आवारा कुत्ते ने 50 वर्षीय महिला के पैर में काट लिया था। तब उन्होंने कोई एंटी रेबीज वैक्सीन नहीं लगवाई। इसका नतीजा हुआ कि एक दिन पहले उसमें रेबीज के लक्षण दिखने शुरू हुए। मंगलवार को जिला अस्पताल में उनकी मौत हो गई।
मेरठ के थाना बहसूमा क्षेत्र के गांव मोड़ निवासी 50 वर्षीय संतोष पत्नी बलिराम सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र जानसठ में पहुंची। जांच करने पर चिकित्सकों ने उनमें रेबीज के संभावित लक्षण बताए। डाक्टर ने प्राथमिक उपचार देकर जिला अस्पताल रेफर कर दिया। जिला अस्पताल में उपचार के दौरान महिला की मौत हो गई।
महिला के स्वजन ने बताया कि लगभग दो साल पहले गांव में घूम रहे आवारा कुत्ते ने उनके पैर में काट लिया था। उसने कोई एंटी रेबीज वैक्सीन नहीं लगवाई थी। उन्होंने बताया कि तब से लेकर सोमवार तक महिला को किसी भी प्रकार का कोई लक्षण दिखाई नहीं दिया था। सोमवार को अचानक उसकी तबीयत खराब हुई तो डाक्टर को दिखाया लेकिन उसे कोई आराम नहीं लगा।
मंगलवार को स्वजन उसे लेकर अंधविश्वास के चलते मीरापुर में किसी झाड़-फूंक करने वाले को दिखाने पहुंचे। वहां पर झाड़-फूंक करने के बाद उसके कहने पर ही स्वजन उसे लेकर सीएचसी जानसठ पहुंचे। वहां से डाक्टरों ने उसमें रेबीज के संभावित लक्षण देखकर उसे प्राथमिक उपचार देकर जिला अस्पताल के लिए रेफर कर दिया।
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सीएचसी प्रभारी डा. अर्जुन सिंह ने बताया कि महिला संतोष बीमारी के उपचार के लिए सीएचसी जानसठ में आई थी। उसमें रेबीज के संभावित लक्षण प्रतीत हो रहे थे। प्राथमिक उपचार देकर उन्हें जिला अस्पताल रेफर कर दिया था।
उन्होंने बताया कि जिला अस्पताल में उपचार के दौरान महिला संतोष की मौत हो गई है। डा. अर्जुन सिंह ने क्षेत्रवासियों से अपील करते हुए कहा कि यदि किसी को कुत्ता काट लेता है तो सीएचसी पर आकर एंटी रेबीज की वैक्सीन जरूर लगवाएं। यह सीएचसी पर निश्शुल्क लगाई है। रेबीज लाइलाज बीमारी है।
ये होते हैं रेबीज के लक्षण
डा. अर्जुन सिंह ने बताया कि रेबीज के शुरुआती लक्षणों में बुखार, सिरदर्द, थकान, मांसपेशियों में दर्द, काटी हुई जगह पर खुजली, दर्द या झुनझुनी, बलगम, गले में खराश, मितली या उल्टी, डायरिया है।
न्यूरोलाजिकल स्टेज में पहुंचने पर मरीज को बेचैनी, हेलुसिनेशन (मति भ्रम-जिसमें व्यक्ति को ऐसी चीजें दिखती या महसूस होती हैं, जो वास्तव में होती नहीं), हाइड्रोफोबिया (पानी से डर लगना), ज्यादा लार आना, निगलने में कठिनाई, मांसपेशियों में ऐंठन, हिंसक व्यवहार, कोमा में जाने, लकवा जैसी समस्या हो सकती है।
रेबीज का वायरस धीरे-धीरे नर्वस सिस्टम पर असर डालते हुए दिमाग तक पहुंचता है। लक्षण दिखने में कई सप्ताह और महीने लग सकते हैं।
कुत्ता काटने पर तात्कालिक उपचार
- घाव को बहते पानी में 15 मिनट तक साबुन से धोएं।
- अगर घाव गहरा है तो पानी की तेज धारा का इस्तेमाल करें।
- एंटीसेप्टिक जैसे बेटाडाइन या अल्कोहल लगाकर घाव को संक्रमणरहित करें।
- काटने पर जितना जल्दी हो सके (24 से 72 घंटों में) वैक्सीन लगवाएं।
- घाव अधिक गहरा हो तो आरआइजी लगवाएं।
- टिटनेस का टीका भी लगा सकते हैं।