विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

पितृ पक्ष 2026: शुकतीर्थ के गंगा घाटों पर उमड़ेंगे श्रद्धालु, बोले स्वामी ओमानंद- यह केवल केवल कर्मकांड नहीं...

By Rohitash Verma Edited By: Praveen Vashishtha
Published: Fri, 25 Sep 2026 06:13 PM (IST)

Pitru Paksha 2026: पितृपक्ष शनिवार को पूर्णिमा श्राद्ध से शुरू होकर 10 अक्टूबर को सर्वपितृ अमावस्या पर समाप्त होगा, जिसमें श्रद्धालु अपने दिवंगत पूर्वजों के प्रति श्रद्धा व्यक्त करेंगे।

शुकतीर्थ में पितरों का तर्पण करते श्रद्धालु। स्वामी ओमानंद महाराज, पीठाधीश्वर, शुकदेव पीठ, शुकतीर्थ:  जागरण आर्काइव

शुकतीर्थ में पितरों का तर्पण करते श्रद्धालु। स्वामी ओमानंद महाराज, पीठाधीश्वर, शुकदेव पीठ, शुकतीर्थ:  जागरण आर्काइव

HighLights

  1. पितृपक्ष का 26 सितंबर से पूर्णिमा श्राद्ध के साथ होगा आरंभ।

  2. शुकतीर्थ के गंगा घाटों पर श्रद्धालु करेंगे तर्पण, पिंडदान।

संवाद सूत्र, मोरना (मुजफ्फरनगर)। सनातन धर्म में पितृपक्ष को पूर्वजों के प्रति श्रद्धा और कृतज्ञता प्रकट करने का विशेष अवसर माना जाता है। यह पर्व कल शनिवार को पूर्णिमा श्राद्ध से आरंभ होकर 10 अक्टूबर को सर्वपितृ अमावस्या के साथ समाप्त होगा। मुख्य प्रतिपदा श्राद्ध रविवार से शुरू होगा।

इस दौरान श्रद्धालु अपने दिवंगत पूर्वजों का स्मरण कर उनके निमित्त तर्पण, पिंडदान, श्राद्ध और दान-पुण्य करेंगे। तीर्थनगरी शुकतीर्थ में गंगा तट पर पितरों के निमित्त धार्मिक अनुष्ठान करने के लिए श्रद्धालुओं का आगमन शुरू होगा।

पूर्वजों के प्रति श्रद्धा भारतीय संस्कृति की महत्वपूर्ण परंपरा: स्वामी ओमानंद महाराज

श्री शुकदेव आश्रम के पीठाधीश्वर स्वामी ओमानंद महाराज ने बताया कि पितृपक्ष केवल कर्मकांड नहीं, बल्कि अपनी जड़ों और पूर्वजों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का अवसर है। पूर्वजों के प्रति श्रद्धा और उनके सद्कर्मों का स्मरण भारतीय संस्कृति की महत्वपूर्ण परंपरा है।

पितृपक्ष में श्रद्धापूर्वक तर्पण और श्राद्ध करने से मन में कृतज्ञता का भाव जागता है तथा परिवार में संस्कारों की परंपरा आगे बढ़ती है। पितृपक्ष में जिन पूर्वजों की मृत्यु तिथि ज्ञात होती है, उनका श्राद्ध उसी तिथि को करने की परंपरा है। जिनकी मृत्यु तिथि ज्ञात नहीं होती अथवा जिनका श्राद्ध किसी कारण से नहीं हो पाता, उनके लिए सर्वपितृ अमावस्या का विशेष महत्व माना जाता है।

श्रद्धालु इस अवधि में जल, तिल और पुष्प अर्पित कर पितरों का तर्पण करते हैं तथा ब्राह्मणों को भोजन कराने के साथ जरूरतमंदों को अन्न-वस्त्र आदि का दान करते हैं। श्री गंगा सेवा समिति के महामंत्री महकार सिंह ने बताया कि पितृपक्ष में शुकतीर्थ के गंगा घाटों पर विशेष धार्मिक गतिविधियां देखने को मिलती हैं।

यह भी पढ़ें- शुकतीर्थ आने वालों के लिए अच्छी खबर: 3 मंजिला TFC तैयार; यहां एक छत के नीचे मिलेंगी ठहरने, भोजन व पार्किंग की सुविधाएं

श्रद्धालु गंगा स्नान के बाद पुरोहितों के निर्देशन में पितरों के निमित्त तर्पण और पिंडदान करते हैं। तीर्थस्थल पर किए गए श्राद्ध कर्म का विशेष महत्व माना जाता है। पितृपक्ष के दौरान शुकतीर्थ में आसपास के जिलों के साथ ही दूर-दराज से भी श्रद्धालुओं के पहुंचने की उम्मीद है।

श्रीदंडी आश्रम के आचार्य मोहित वैदिक बताते हैं कि पितृपक्ष में पितरों के निमित्त तर्पण के साथ जरूरतमंदों की सेवा और अन्नदान को भी परंपरा में विशेष स्थान दिया गया है। पूर्वजों को याद करने का सबसे सार्थक भाव यही है कि उनके संस्कारों को जीवन में उतारा जाए और समाज के प्रति सेवा का भाव रखा जाए।

देश और दुनिया की ताजा खबरों के लिए Hindi News देखें। Live Cricket Score , IPO Listings, Shiv Chalisa, राशिफल और दुर्गा चालीसा पर अन्य जानकारी पाएं।