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    Data Center: देश का प्रमुख डेटा सेंटर हब बनेगा गौतमबुद्धनगर, अब तक 24 प्लॉट हो चुके आरक्षित

    Updated: Mon, 02 Feb 2026 08:28 AM (IST)

    गौतमबुद्धनगर भारत को डेटा सेंटर हब बनाने में अग्रणी भूमिका निभा रहा है। डेटा सेंटर उद्योग 2029-30 तक राष्ट्रीय आय का 20% योगदान देगा, कृषि और विनिर्मा ...और पढ़ें

    वित्तीय वर्ष 2029-30 तक कृषि और विनिर्माण को पीछे छोड़ राष्ट्रीय आय का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा बनने की उम्मींद।

    वित्तीय वर्ष 2029-30 तक कृषि और विनिर्माण को पीछे छोड़ राष्ट्रीय आय का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा बनने की उम्मींद।

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    कुंदन तिवारी, नोएडा। डेटा सेंटर उद्योग में वृद्धि डिजिटल अर्थव्यवस्था की विकास गति को दर्शाती है, जो पहले से ही 500 बिलियन डालर या जीडीपी का करीब 13 प्रतिशत का योगदान करती है। वित्तीय वर्ष 2029-30 तक कृषि और विनिर्माण को पीछे छोड़ते हुए राष्ट्रीय आय का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा बनने की उम्मीद है।

    भारत के डेटा सेंटर देश की डिजिटल अर्थव्यवस्था का मूल आधार हैं, जो ई-गवर्नेंस और फिनटेक से लेकर मीडिया स्ट्रीमिंग, ई-कामर्स और उन्नत एआई वर्कलोड तक हर चीज को आधार प्रदान करते हैं। इसलिए केंद्र सरकार ने विकसित भारत के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए भारत को वर्ष 2047 तक डाटा सेंटर हब के रूप में विकसित करने के लिए इनकम टैक्स नहीं का निर्णय लिया है। इससे देश में डेटा सेंटर इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार होगा, विदेशी निवेश बढ़ेगा, रोजगार की संभावनाएं प्रबल होगी। देश का डेटा देश के अंदर ही सुरक्षित रहेगा।

    2030 तक लगभग 8 गीगावाट होने का अनुमान

    बता दें कि आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 के अनुसार डेटा की खपत में वृद्धि, क्लाउड को तेजी से अपनाने और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के बढ़ते उपयोग के कारण, भारत की डेटा सेंटर क्षमता 2025 की दूसरी तिमाही तक लगभग 1.4 गीगावाट से बढ़कर 2030 तक लगभग 8 गीगावाट होने का अनुमान है।

    एआई डेटा सेंटर विशेषीकृत, उच्च-प्रदर्शन वाली सुविधाएं हैं जिन्हें कृत्रिम बुद्धिमत्ता, मशीन लर्निंग और डीप लर्निंग वर्कलोड की गहन कम्प्यूटेशनल आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए डिज़ाइन किया गया है। हालांकि दुनिया के लगभग 20 प्रतिशत डेटा का उत्पादन करने के बावजूद भारत में वैश्विक डेटा केंद्रों का केवल तीन प्रतिशत ही स्थित है।

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    इसलिए भारत को डेटा सेंटर हब के रूप में विकसित करने में गौतमबुद्धनगर अग्रणी भूमिका निभा सकता है। यहां पर तीन प्राधिकरण ने डेटा सेंटर के लिए भूखंड आवंटन शुरू कर दिया है। हाल ही में पांच भूखंड यमुना एक्सप्रेसवे प्राधिकरण ने आवंटित किया है।

    ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण ने 13 भूखंड आवंटन की योजना निकाली है। जबकि नोएडा प्राधिकरण ने डाटा सेंटर के लिए छह भूखंड का एक सेक्टर की आरक्षित कर दिया है। नोएडा एंटरप्रिनियोर्स एसोसिएशन अध्यक्ष विपिन कुमार मल्हन ने कहा कि भारत की डेटा-सेंटर कैपेसिटी 2030 तक पांच गुना बढ़कर लगभग 8 गीगावाट हो जाएगी।

    इसका मतलब है कि उसके अगले 5 सालों में लगभग 6.4 गीगावाट नई कैपेसिटी भारत की डेटा सेंटर क्षमता 2035 तक 14 गीगावाट तक पहुंचने का अनुमान है, ऐसे में केंद्रीय बजट 2026 ऐसे समय में आया है जब सरकार रियायती भूमि, कर छूट और टैरिफ में छूट के माध्यम से हाइपरस्केल सुविधाओं को वर्तमान में, भारत की स्थापित क्षमता लगभग 1.5 गीगावाट है, जिसके 2035 तक बढ़कर लगभग 14 गीगावाट तक पहुंचने का अनुमान है। इस वृद्धि के लिए 70 अरब डालर से अधिक के निवेश की आवश्यकता होगी।

    गौतमबुद्धनगर देश का डेटा सेंटर का हब बन सकता है, भारत की डेटा सेंटर क्षमता 2025 की दूसरी तिमाही तक लगभग 1.4 गीगावाट से बढ़कर 2030 तक लगभग 8 गीगावाट होने का अनुमान है।


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    -डॉ. पीयूष कुमार द्विवेदी, चेयरमैन, उत्तर प्रदेश उद्योग व्यापार मंडल