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    यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Oct 12, 2023 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

    Greater Noida: बिल्डर ने तीन साल में कब्जा देने का किया था वादा, 10 साल बाद भी नहीं मिला फ्लैट

    By Praveen SinghEdited By: Abhishek Tiwari
    Updated: Thu, 12 Oct 2023 09:04 PM (IST)

    रिपोर्ट में बीटा दो सेक्टर में रहने वाले अरविंद श्रीवास्तव ने कहा है कि उन्होंने 17 जनवरी 2013 को एचडीएफसी बैंक से लोन लेकर मैसर्स रेडिकान इंफ्रास्ट्र ...और पढ़ें

    Greater Noida: तीन साल में था कब्जे का वादा, 10 साल बाद भी नहीं मिला फ्लैट
    Greater Noida: तीन साल में था कब्जे का वादा, 10 साल बाद भी नहीं मिला फ्लैट

    HighLights

    1. बीटा दो सेक्टर में रहने वाले अरविंद श्रीवास्तव के साथ हुई धोखाधड़ी
    2. बिसरख कोतवाली पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज कर शुरू की मामले की जांच

    जागरण संवाददाता, ग्रेटर नोएडा। ग्रेटर नोएडा में रहने वाले अरविंद श्रीवास्तव की तहरीर पर मैसर्स रेडिकान इंफ्रास्ट्रक्चर के दो निदेशक, बैंक प्रबंधक व अन्य के खिलाफ धोखाधाड़ी की धारा में रिपोर्ट दर्ज की गई है।

    यह केस कोर्ट के आदेश पर दर्ज किया गया है। आरोप है कि बिल्डर ने तीन साल में कब्जे का वादा किया था जबकि दस साल बाद भी उनको फ्लैट नहीं मिला। मामले में बिसरख कोतवाली पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

    क्या है पूरा मामला ?

    दर्ज कराई गई रिपोर्ट में बीटा दो सेक्टर में रहने वाले अरविंद श्रीवास्तव ने कहा है कि उन्होंने 17 जनवरी 2013 को एचडीएफसी बैंक से लोन लेकर मैसर्स रेडिकान इंफ्रास्ट्रक्चर की परियोजना में 44.68 लाख का फ्लैट बुक कराया था।

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    फ्लैट बुक कराते दौरान कहा गया था कि तीन साल में फ्लैट पर कब्जा मिल जाएगी। आरोप है कि बिल्डर को ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण से ओसी सर्टिफिकेट नहीं मिला। इस वजह से 2015 में निर्माण कार्य रूक गया।

    अरविंद ने राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निस्तारण विवाद आयोग में अर्जी दाखिल की। सात अक्तूबर 2022 को आयोग ने बिल्डर को दो महीने के अंदर खरीदार को नौ फीसदी ब्याज समेत सारी रकम लौटाने के लिए कहा।

    बिल्डर ने नहीं माना आयोग का निर्देश

    बिल्डर ने आयोग का निर्देश नहीं माना। 28 अगस्त 2023 को अरविंद कुमार श्रीवास्तव अपने फ्लैट पर गए तो उन्होंने देखा कि वहां कोई अन्य व्यक्ति गृहप्रवेश कर रहा है। अरविंद ने स्टे की जानकारी देते हुए गृह प्रवेश करने वाले से बात की, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला। आरोप है कि बिल्डर ने बाउंसर को बुला लिया।

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    मामले में मैसर्स रेडिकान इंफ्रास्ट्रक्चर के निदेशक आलोक कुमार, निदेशक अमित कुमार, अर्पित गौतम, आफिस इंचार्ज रंजना चौधरी, शेयर होल्डर राजीव वर्मा, अजीत सिंह, बैंक प्रबंधक मानस कुमार पाठक, नुपुर किशोर पर रिपोर्ट दर्ज की गई है। बिसरख कोतवाली प्रभारी अनिल राजपूत ने बताया कि मामले की जांच की जा रही है।

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