ईरान युद्ध से होर्मुज बंद: कंटेनर के रेट्स 150% तक उछले, नोएडा-ग्रेटर नोएडा निर्यातक बोले- लागत हुई दोगुनी
ईरान में जारी सैन्य संघर्ष और होर्मुज जलडमरूमध्य के बंद होने से वैश्विक समुद्री व्यापार बुरी तरह प्रभावित हुआ है। शिपिंग कंपनियों को अब केप ऑफ गुड होप ...और पढ़ें

ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य को प्रभावी रूप से बंद कर दिया है। शिपिंग कंपनियां अब जहाजों को अफ्रीका के केप ऑफ गुड होप के रास्ते लंबा चक्कर लगाने को मजबूर हैं, जिससे ट्रांजिट समय 12-15 दिनों तक बढ़ गया है।

समय कम है?
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जागरण संवाददाता, ग्रेटर नोएडा। ईरान में जारी सैन्य संघर्ष ने वैश्विक समुद्री व्यापार को बुरी तरह से प्रभावित किया है। अमेरिका और इजरायल की ओर से ईरान पर हमलों के जवाब में ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य को प्रभावी रूप से बंद कर दिया है, जिससे तेल टैंकरों से लेकर कंटेनर जहाजों तक की आवाजाही ठप हो गई है।
इस कारण शिपिंग कंपनियां अब जहाजों को अफ्रीका के केप ऑफ गुड होप के रास्ते लंबा चक्कर लगाने को मजबूर हैं, जिससे ट्रांजिट समय 12-15 दिनों तक बढ़ गया है। इस व्यवधान से कंटेनर किराए में भारी उछाल आया है।
कई प्रकार की लागतों में बेतहाशा बढ़त
युद्ध से पहले जहां कंटनेर का किराया 1200 डाॅलर (1.10 लाख रुपये) लगता था वहां अब 2400 डाॅलर (2.20 लाख रुपये प्रति कंटेनर तक किराया पहुंच गया है। एशिया-यूरोप और अन्य रूटों पर स्पाट रेट में 30-50 प्रतिशत तक की तत्काल वृद्धि कर दी गई है, जबकि कुछ मामलों में यह 150 प्रतिशत तक पहुंच गई है। पुराने मार्गों की जगह लंबे रूट अपनाने से ईंधन खर्च, बीमा प्रीमियम और अन्य लागतें बढ़ी हैं।
भारतीय निर्यातकों के बड़ी चुनौती
इससे प्लास्टिक ग्रैन्यूल, खाद्य तेल, रासायनिक कच्चा माल और अन्य औद्योगिक सामग्रियों के दामों में अचानक वृद्धि हुई है, जिसने भारतीय निर्यातकों की उत्पादन लागत को और चुनौतीपूर्ण बना दिया है। नोएडा-ग्रेटर नोएडा क्षेत्र के निर्यातक इस संकट से सबसे अधिक प्रभावित हैं, क्योंकि यहां से प्लास्टिक उत्पाद, टेक्सटाइल, ऑटो कंपोनेंट्स और अन्य वस्तुओं का निर्यात होता है।
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"हमारे कंटेनर किराए पिछले कुछ दिनों में दोगुने से अधिक हो गए हैं। केप रूट से जहाजों का समय बढ़ने से ग्राहकों को डिलीवरी में देरी हो रही है, जिससे आर्डर कैंसल होने का खतरा मंडरा रहा है।"
-शुभम किरोड़ीमल अग्रवाल, अध्यक्ष चैंबर आफ एक्सपोर्टर्स ईपीआइपी ग्रेटर नोएडा।
"ईरान युद्ध के कारण वैश्विक समुद्री मार्गों में भारी अव्यवस्था पैदा हुई है, जिससे कंटेनर किराया, बीमा प्रीमियम और ट्रांज़िट समय,तीनों में तेजी से बढ़ोतरी हुई है। भारत से मध्य‑पूर्व जाने वाला कृषि और खाद्य निर्यात सबसे अधिक प्रभावित हुआ है।"
-नवेद उर रहमान, निर्यातक ईपीसीएच।
"यह संकट 2023-24 की रेड सी क्राइसिस से भी बड़ा लग रहा है। होर्मुज बंद होने से वैश्विक कंटेनर क्षमता का बड़ा हिस्सा प्रभावित हुआ है, जिससे रेट्स में और तेजी आएगी। भारतीय एमएसएमई इकाइयों के लिए यह बहुत बड़ा झटका है।"-जेड रहमान, चेयरमैन टेक्निकल आईआईए ग्रेटर नोएडा।
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