नोएडा में डूब क्षेत्र की रजिस्ट्री में बड़ा घोटाला, गलत पैन कार्ड से 3035 करोड़ का लेनदेन
नोएडा में डूब क्षेत्र की जमीनों की रजिस्ट्री में बड़े पैमाने पर धोखाधड़ी का खुलासा हुआ है। गलत पैन कार्ड और फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल कर 3500 से अध ...और पढ़ें

नोएडा में डूब क्षेत्र की जमीनों की रजिस्ट्री में बड़े पैमाने पर धोखाधड़ी का खुलासा हुआ है। फाइल फोटो
प्रवेंद्र सिंह सिकरवार, नोएडा। रजिस्ट्री के लिए गलत पैन कार्ड का उपयोग सिर्फ टैक्स से बचने के लिए ही नहीं डूब क्षेत्र में प्रतिबंध के बावजूद खरीद फरोख्त और उसकी रजिस्ट्री के लिए भी हुआ। आयकर विभाग की जांच के दायरे में 3500 से अधिक रजिस्ट्रियां हैं।
इन रजिस्ट्रियों में 3035 करोड़ रुपये का गलत लेन-देन हुआ। टैक्स से बचने के साथ डूब क्षेत्र में प्रतिबंध के बावजूद रजिस्ट्री हुईं। अधिकांश इन रजिस्ट्रियों में भी गलत पैन कार्ड का उपयोग किया गया। रजिस्ट्री विभाग को आबादी और खरीदारों को डूब क्षेत्र के खसरे नंबर रजिस्ट्री के साथ मिले। यह गड़बडियां दस्तावेज लेखकों ने कीं।
डूब क्षेत्र में दो वर्ष पूर्व तक रजिस्ट्री प्रतिबंधित थी, फिर भी जमीनें बिकती रहीं और रजिस्ट्री होती रहीं। रजिस्ट्री के लिए तैयार किए गए दस्तावेजाें में स्टांप के साथ तैयार फाइल में दो खाली पेज लगाए जाते थे। दस्तावेज तैयार करने का कार्य लेखक करते हैं। एक पेज डूब क्षेत्र का खसरा लिखकर खरीदार को दिया जाता था।
वहीं, निबंधन विभाग को जमा करने वाली फाइल में आबादी या गांव की जमीन का खसरा दिखाया जाता था। रजिस्ट्री पूरी होने के बाद खरीदार को डूब खसरे वाले पेज पर स्टांप लगाकर दे दिया जाता था। सभी वैध दस्तावेजों के साथ विभाग डूब क्षेत्र के खसरे में रजिस्ट्री कर देता है। यह गड़बड़ी मुख्य रूप से 2020 से लगे प्रतिबंध के दौरान चली।
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वर्षों तक डूब क्षेत्र में रजिस्ट्री प्रतिबंधित रहीं। प्रतिबंध के बाद भी यहां जमीन खरीदी और बेचीं गईं। खरीदार और विभाग को गुमराह कर रजिस्ट्रियां भी हुईं।
डूब क्षेत्र में रहती है लाखों की आबादी
हरनंदी के डूब क्षेत्र में सबसे अधिक अवैध कालोनियां काटी गईं। यमुना में हजारों की संख्या में अवैध फार्म हाउस बने और उनकी रजिस्ट्रियां हुईं। रोक के बाद भी यहां प्रापर्टी खरीदने और बेचने पर रोक नहीं लग सकी।
आयकर का मामला डूब क्षेत्र की रजिस्ट्री से संबंधित नहीं है। पैन कार्ड की त्रुटियों से संबंधित है। एसएफटी विभाग की ओर से हर छह महीने में जमा की जाती है। गलत फीडिंग को ठीक करने का कार्य किया जा रहा है।
-अरुण कुमार शर्मा, एआइजी-1 निबंधन विभाग
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