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    गहरी साजिश थी नोएडा का उपद्रव, 10 हजार में छह राउंड गोली; पुलिस को मिले इनपुट

    Updated: Wed, 22 Apr 2026 07:09 PM (IST)

    नोएडा में 13 अप्रैल को हुई हिंसा एक गहरी साजिश का हिस्सा थी, जिसमें 'मजदूर बिगुल संगठन' की भूमिका सामने आई है। पुलिस को '10 हजार में छह राउंड गोली' जै ...और पढ़ें

    नोएडा फेज-2 में हुए उपद्रव के दौरान की तस्वीर। फाइल फोटो सौजन्य- जागरण

    नोएडा फेज-2 में हुए उपद्रव के दौरान की तस्वीर। फाइल फोटो सौजन्य- जागरण

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    धर्मेंद्र चंदेल, नोएडा। 10 हजार में छह राउंड गोली चलानी है, कहां भेजना है, आदि के ऑडियो और चौंकाने वाले मैसेज पुलिस को मिले हैं। इससे पता चलता है कि वेतन वृद्धि आंदोलन की आड़ में 13 अप्रैल को नोएडा में हिंसा फैलाकर यहां औद्योगिक उत्पादन ठप करने की गहरी साजिश थी।

    दरअसल, जिस तरह से नोएडा, ग्रेटर नोएडा और यीडा में कुछ समय से बड़े पैमाने पर औद्योगिक पूंजी निवेश हुआ है। बहुराष्ट्रीय इकाइयां स्थापित हुई हैं, उससे गौतमबुद्ध नगर ही नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश विकास के मॉडल के रूप में अंतरराष्ट्रीय पटल पर उभरा है।

    सीटू ने भी दी थी बड़े आंदोलन की चेतावनी

    सूत्रों का दावा है कि नोएडा, ग्रेटर नोएडा में विरोध प्रदर्शन के जरिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उत्तर प्रदेश को बदनाम करने की साजिश थी, ताकि यहां पूंजी निवेश को प्रभावित कर सकें। इसलिए उपद्रव की साजिश रची गई। जांच में यह भी बात सामने आई है कि एक अप्रैल को एक अन्य संगठन सीटू ने भी काला दिवस मानकर चेतावनी दी थी कि 15 दिन में नोएडा में बड़ा आंदोलन होगा। इससे लगता है कि उपद्रव की पटकथा नियोजित तरीके से पूर्व में लिखी जा चुकी थी।

    इसमें शामिल लोगों को पुलिस चिह्नित करने और पकड़ने में जुटी है। उधर, पुलिस रूपेश राय, सृष्टि, मनीषा और आकृति को रिमांड पर लेकर हिंसा के बारे में जानकारी कर रही। कुछ अहम सुराग पुलिस को हाथ लगे हैं। यह भी पता चला है कि मजदूर बिगुल संगठन श्रमिकों को भड़काने के लिए अपने ऑनलाइन पोर्टल व वेबसाइट का भी दुरुपयोग करता था। इसके जरिए श्रमिकों को भड़काने का काम किया जाता था।

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    1996 में शुरू किया था मजदूर बिगल अखबार

    संगठन ने 1996 में मजदूर बिगल अखबार भी शुरू किया था। कई ऐसे लोगों के आलेख भी ऑनलाइन पोस्ट कर रखे हैं, जिनमें मजदूरों के दमन की बात लिखी है। तीन हजार रुपये में संगठन की आजीवन सदस्यता देते थे। इसका संचालन लखनऊ से होता है, लेकिन पूरे देश में इसके नेटवर्क की जड़े फैली हैं। दिल्ली, महाराष्ट्र व हरियाणा में नेटवर्क है।

    सूत्रों का दावा है कि पुलिस जांच के लिए संगठन के लखनऊ स्थित डी -68 निराला नगर पहुंची तो वहां कोई और रहता मिला। गलत पता मिलने को भी पुलिस साजिश का हिस्सा मानकर चल रही है।

    बिगुल संगठन के पीछे किसी राजनीति पार्टी का हाथ तो नहीं, हो रही है जांच

    बिगुल संगठन लखनऊ से संचालित हो रहा है, लेकिन इसकी जड़ें देश के कई हिस्सों में फैली हैं। पुलिस यह भी पता लगा रही है कि इसके पीछे कोई राजनीतिक साजिश तो नहीं है।

    ऐसी आशंका है कि विधान सभा चुनाव से पहले मजदूर और श्रमिकों को भड़काने की बड़े पैमाने पर योजना तो नहीं बनी थी। क्योंकि कोई संगठन बिना राजनीतिक सपोर्ट लिए अचानक इतना बड़ा आंदोलन कर भीड़ एकत्र नहीं कर सकता। जांच में यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि संगठन को किस राजनीतिक दल का अंदरखाने समर्थन प्राप्त है।

    पाकिस्तानी हैंडलर्स दिखा रहे थे गलत खबर

    घटना के बाद पाकिस्तानी हैंडलर्स द्वारा 20 मौत व 99 घायल होने की पोस्ट की गई। यह उपद्रव को और चिंगारी देने की गहरी साजिश का हिस्सा लग रही है। यह भी पता लगाया जा रहा है कि आरोपित का नगेटिव खबर चलाने लिए किस-किस से संपर्क है।

    सात अप्रैल को भी आरोपित गया था जेल

    आरोपित रूपेश राय एकता संघर्ष समिति भी चलाता था। सात अप्रैल को कुलेसरा गांव में बिजली कनेक्शन संबंधी समस्या पर भाषण के जरिए लोगों को भड़काया था। तब पुलिस ने शांतिभंग करने की धारा 151 में जेल भेजा था।