नोएडा में शुरू होते ही नेतृत्व विहीन हो गया आंदोलन, बातचीत करने के लिए नहीं मिले नेता
नोएडा में वेतन वृद्धि की मांग को लेकर कामगारों का आंदोलन नेतृत्व विहीन होने से उग्र हो गया। प्रमुख श्रमिक नेता या तो नजरबंद थे या अचानक गायब हो गए, जि ...और पढ़ें
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नोएडा में प्रदर्शन शुरू होते ही नेतृत्वविहीन हो गया श्रमिकों का प्रदर्शन।
HighLights
वेतन वृद्धि आंदोलन नेतृत्व विहीन होने से उग्र हुआ।
प्रमुख श्रमिक नेता नजरबंद या अचानक गायब हो गए।
वार्ता में कामगारों का प्रतिनिधित्व करने वाला कोई नहीं।
जागरण संवाददाता, नोएडा। वेतन बढ़ोतरी की मांग करने वालों कामगारों का प्रदर्शन उग्र रूप लेने के पीछे बड़ा करण नेतृत्व विहीन बताया जा रह है, क्योंकि नेताओं के हाउस अरेस्ट होने के बाद उनकी मांग को उचित प्लेटफार्म (उद्यमियों, प्रशासन, शासन) तक लेने जाने वाला कोई नहीं रहा।
यही कारण रहा कि उद्यमियों के साथ वार्ता कराने के लिए नेता किसी भी बैठक में शामिल नहीं हो सके। इसलिए जिलाधिकारी की बैठक में जो निर्णय हुआ, उसको कामगारों तक नहीं पहुंचाया जा सका। बता दें कि सीटू के नेता गंगेश्वर दत्त शर्मा, मुकेश कुमार राघव, परस राजक, अरुण कुमार पटेल, रामसागर वेतन बढ़ोतरी की मांग को कामगारों की तरफ से उठा रहे थे।
कई नेता अचानक आंदोलन के सभाओं से गायब हो गए
इन्होंने आंदोलन का ऐलान कर दिया था। इसलिए हाउस अरेस्ट कर लिया गया। जबकि मजदूर बिगुल संघ के नेता प्रियमदा, इंटक के केपी ओझा, हिंद मजदूर सभा के राघवेंद्र प्रताप सिंह व रितेश झा, भारतीय मजदूर संघ के अवनीश प्रताप सिंह, आल इंडिया सेंटर काउंसिल ट्रेड यूनियन के अमर सिंह अचानक आंदोलन के सभाओं से गायब हो गए, जिसकी जानकरी कामगारों को नहीं लग सकी।
इसको लेकर लेकर नाराजगी बढ़ने लगी, अधिकारी यह कह उनकी मांगों की सुनवाई नहीं कर रहे थे कि उनका नेतृत्व करने वाले लोग लापता है। इससे आंदोलन आक्रोश में बदल गया। जब शीर्ष अधिकारियों ने जब बैठकों को दौर शुरू किया, वहां पर कामगारों की बात सुनने व कहने वाला कोई नहीं था। एक तरफा हो रहे फैसले ने आक्रोश को भड़का दिया, नतीजा सबके सामने रहा। जहां पर पुलिस, प्रशासन, प्राधिकरण व शासन तक का सूचना तंत्र फेल हो गया।