यमुना एक्सप्रेसवे पर जलने वाली बस में भरा था नेल पेंट, कॉस्मेटिक आइटम्स और धागा; चंद मिनट में बनी आग का गोला
यमुना एक्सप्रेसवे पर एक स्लीपर बस में नेल पेंट, कॉस्मेटिक और धागे जैसे ज्वलनशील सामान लदे होने से आग तेजी ...और पढ़ें

यमुना एक्सप्रेसवे पर हादसे का शिकार स्लीपर बस में ज्वलनशील समान से भरा बूट स्पेस। जागरण
HighLights
बस में नेल पेंट, कॉस्मेटिक, धागे जैसे ज्वलनशील सामान थे।
एक ही निकास, आग तेजी से फैली, यात्री निकलने में असमर्थ।
ड्राइवर, ज्वलनशील सामान, सुरक्षा मानकों की जांच जारी है।
मनोज कुमार शर्मा, जेवर। यमुना एक्सप्रेसवे पर नौ यात्रियों को जिंदा निगलने वाली स्लीपर बस में यात्रियों के साथ बड़ी मात्रा में ऐसा सामान भी लदा था, जिसने आग लगते ही हादसे को और भयावह बना दिया।
करीब 35 यात्रियों को लेकर दौड़ रही बस के बूट स्पेस और छत पर नेल पेंट, काॅस्मेटिक का सामान, सिलाई के धागे, कपड़े, इलेक्ट्रिक सामान और शादी समारोह के कार्ड रखे हुए थे। आग लगते ही ज्वलनशील सामग्री ने लपटों को तेजी से फैलाया और चंद मिनट में पूरी बस आग के गोले में तब्दील हो गई।
ड्राइवर-कंडक्टर की भूमिका की जांच शुरू
हादसे के दौरान यात्रियों के लिए बाहर निकलने का रास्ता भी बड़ी चुनौती बना। बस में प्रवेश और निकास के लिए मुख्य रूप से एक ही रास्ता होने की बात सामने आई है। यात्रियों के मुताबिक आग इतनी तेजी से फैली कि उन्हें संभलने तक का मौका नहीं मिला। आपातकालीन निकास भी धुएं और अफरा-तफरी के बीच नजर नहीं आया।
कई यात्रियों ने खिड़कियों और अन्य रास्तों से कूदकर जान बचाई। पुलिस बस में लदे सामान, आग लगने के कारण, विद्युत वायरिंग, आपातकालीन निकास, अग्निशमन उपकरण और ड्राइवर-कंडक्टर की भूमिका की जांच की जा रही है।
ज्वलनशील सामान किसकी अनुमति से लादा गया?
यात्रियों का कहना है कि टैक्स और अन्य खर्च बचाने के लिए बसों में यात्रियों के सामान के साथ इस तरह का अतिरिक्त सामान ले जाना आम बना हुआ है। सवाल उठता है कि यात्रियों से भरी बस में ज्वलनशील सामान किसकी अनुमति से लादा गया जिम्मेदार कहां थे? सुरक्षा मानकों की निगरानी कहां थी?
