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'जिंदा तो छोड़ो, मरने के बाद भी नर्क!' पीलीभीत में जलभराव के बीच से निकली महिला की अंतिम यात्रा

Published: Wed, 16 Sep 2026 06:11 PM (IST)

पीलीभीत की जोशी कॉलोनी में एक वृद्ध महिला की शवयात्रा को कीचड़ और जलभराव के बीच से निकालना पड़ा, जिससे ...और पढ़ें

HighLights

  1. तीन हजार से अधिक की आबादी प्रभावित, कालोनी में नहीं है कोई भी निकास मार्ग

जागरण संवाददाता, पीलीभीत। व्यवस्थाओं की लापरवाही से सड़क पर हुए कीचड़ से जोशी कालोनी का मार्ग दलदला हो चुका है, जो लोगों के लिए दर्द का सबब बन चुका है। लोगों को दलदल से होकर गुजरना अब उनके जीवन का हिस्सा बन चुका है। कालोनी से वृद्ध महिला का शव लेकर लोग कीचड़ से गुजरे तो व्यवस्था पर भी उसके छींटे पड़ गए।

शहर से सटी जोशी कालोनी के बाशिंदे लंबे अरसे से निकास मार्ग के लिए तरस रहे हैं, लेकिन जिम्मेदार आंखें मूंदे बैठे हैं। बुनियादी सुविधाओं के अभाव में ग्रामीणों को कीचड़ भरे रास्ते से ही शव यात्रा निकालनी पड़ी।

शहर से सटी जोशी कालोनी के बाशिंदे बुनियादी सुविधाओं और एक अदद मुख्य निकास मार्ग के लिए दशकों से तरस रहे हैं। करीब 35 वर्ष पहले बसी इस कालोनी में आज तक चौपहिया वाहन जाने का कोई रास्ता नहीं बन सका है।

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इसके चलते ग्रामीणों को आए दिन भारी मुसीबतों का सामना करना पड़ता है। स्थानीय लोग लंबे अरसे से इस समस्या को लेकर फरियाद करते आ रहे हैं। जिम्मेदारों की उपेक्षा के कारण बुधवार को कालोनी से एक शवयात्रा कीचड़ और जलभराव के बीच से निकालनी पड़ी।

मंगलवार शाम जोशी कालोनी निवासी मेघनाथ की पत्नी गंगादेई का निधन हो गया था। बुधवार सुबह जब उनकी अंतिम यात्रा निकाली गई, तो स्थानीय लोगों के सामने एक बड़ी चुनौती खड़ी हो गई। कालोनी से बाहर निकलने के एकमात्र कच्चे रास्ते पर गंदा पानी भरा हुआ था।

कोई अन्य विकल्प न होने के कारण मजबूरी में परिजनों व ग्रामीणों को जलभराव के बीच पूरनपुर रेलमार्ग के किनारे से होकर शव को श्मशान घाट तक ले जाना पड़ा। इस दुर्दशा के बीच से गुजरने पर स्थानीय लोगों में व्यवस्था के खिलाफ खासा आक्रोश है।

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टनकपुर और मैलानी रेल खंड के बीच बसी जोशी कालोनी की यह त्रासदी कोई नई नहीं है। करीब 150 घरों और तीन हजार के करीब की आबादी वाली यह बस्ती लंबे समय से प्रशासनिक उपेक्षा का शिकार है।

रेलवे स्टेशन चौराहे से महज पांच सौ मीटर दूर होने के बावजूद इस कालोनी को बरहा ग्राम पंचायत में शामिल किया गया है। पक्के रास्ते के अभाव में ग्रामीणों को बीमारों को गोद में या चारपाई पर लादकर मुख्य सड़क तक ले जाना पड़ता है।

कालोनीवासियों ने कई बार इसे नगरपालिका में शामिल करने और मुख्य निकास मार्ग बनाने की मांग उठाई है। लेकिन अब तक उनकी इस गंभीर समस्या पर किसी भी जिम्मेदार ने ध्यान नहीं दिया है।

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