स्कूल में फोन जब्त करने पर छात्रों का प्रदर्शन, SDM ने पढ़ाया अनुशासन का पाठ; अफसर ने ऑफिस ले जाकर दो घंटे समझाया
पीलीभीत के जवाहर नवोदय विद्यालय में मोबाइल फोन जब्त करने पर छात्रों ने प्रदर्शन किया। एसडीएम नागेंद्र पांडेय ने छात्रों को रोककर दो घंटे तक अनुशासन का ...और पढ़ें

HighLights
मोबाइल फोन जब्त करने पर छात्रों ने किया प्रदर्शन।
एसडीएम ने छात्रों को दो घंटे तक समझाया अनुशासन।
प्रधानाचार्य ने पिटाई के आरोपों को नकारा, टैबलेट जल्द।
जागरण संवाददाता, पीलीभीत। पढ़ाई की उम्र में मोबाइल फोन की लत...! छात्रों को इससे बचाने के लिए जवाहर नवोदय विद्यालय के शिक्षकों ने सख्ती की तो शुक्रवार को बखेड़ा हो गया। हानि-लाभ की परख से दूर कई छात्र सड़क पर उतर आए। शिक्षकों के विरुद्ध नारेबाजी कर दी। उनके भटकते कदमों को सुधारने की जिम्मेदारी एसडीएम नागेंद्र पांडेय ने ली। उन्होंने जुलूस निकाल रहे छात्रों को रास्ते में रोका।
स्कूल कार्यालय में बैठाकर दो घंटे काउंसिलिंग की। समझाया कि अनुशासन का पालन करने के बाद ही सफल व्यक्ति बन सकेंगे। अब दोबारा कभी अपने शिक्षकों के विरुद्ध कुछ भी मत सोचना, यही आपका भविष्य बनाएंगे।
क्या था आरोप?
जवाहर नवोदय विद्यालय में मोबाइल फोन का उपयोग प्रतिबंधित है। इसके बावजूद कई छात्र चोरी-छिपे फोन रख लेते हैं। शुक्रवार दोपहर डेढ़ बजे 10वीं-12 वीं के छात्र एक कमरे में थे। शिक्षकों के अनुसार कुछ छात्रों से मोबाइल फोन मिलने पर जब्त कर लिए गए थे। उन्हें डांटा ताकि गलती न दोहराएं। इससे आक्रोशित कई छात्र दोपहर 3.30 बजे विद्यालय से बाहर निकलकर जुलूस निकालने लगे। उनका आरोप था कि एक शिक्षक ने हास्टल का दरवाजा तोड़कर पिटाई की।
जुलूस की सूचना पर एसडीएम नागेंद्र पांडेय व थाना प्रभारी संजीव शुक्ला छात्रों से बात करने पहुंचे, उन्हें स्कूल वापस लेकर आए। छात्रों ने आरोप लगाया कि उन्हें गालियां दी जाती हैं। पढ़ाई के लिए टैबलेट नहीं मिले, फोन उपयोग करें तो छीन लिए जाते हैं। एसडीएम ने आश्वासन दिया कि आरोपों की जांच कराएंगे। विद्यालय के नियमों का पालन करें, किसी के साथ अभद्रता नहीं होने दी जाएगी।
प्रधानाचार्य प्रतिभा चौधरी ने पिटाई या दरवाजा तोड़ने के आरोप गलत हैं। मेरठ की कंपनी दो दिनों में वाई-फाई लगवा देगी। इसके बाद छात्रों को टेबलेट का वितरण कर दिया जाएगा। एसडीएम नागेंद्र पांडेय का कहना है कि मोबाइल फोन उपयोग रोकने पर कुछ छात्रों को समस्या थी। उन्हें समझाया गया कि अनुशासन में रहें। प्रधानाचार्य को प्रत्येक माह में दो बार पैरेंट्स टीचर मीटिंग करने के निर्देश दिए हैं।