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बाघ-तेंदुए-हाथी का खौफ तो सिर्फ बहाना निकला! पीलीभीत में इस 'साइलेंट किलर' ने ली 5 गुना ज्यादा जानें

Published: Wed, 09 Sep 2026 06:06 AM (IST)

पीलीभीत में वन्यजीवों के डर के बावजूद, सर्पदंश से 10 लोगों की मौत हुई है, जो बाघ के हमलों से ...और पढ़ें

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HighLights

  1. बाघ के हमले में एक वृद्ध महिला और एक वृद्ध पुरुष की गई जान

पीयूष दुबे, पीलीभीत। पीलीभीत टाइगर रिजर्व (पीटीआर) होने की वजह से वन्यजीव जंगल से बाहर निकलकर अक्सर लोगों को नुकसान पहुंचाते हैं। इसमें हाथी, बाघ, तेंदुए और भालू सर्वाधिक नुकसान करते हैं। यही वजह है कि जंगल के आसपास रहने वाले ग्रामीण इन वन्यजीवों से सर्वाधिक डरते हैं।

लोग इन वन्यजीवों से डरते रहे, लेकिन लोगों की सर्वाधिक मृत्यु सर्पदंश की वजह से हुई। आंकड़ों के अनुसार, 10 लोगों की मृत्यु सर्पदंश से हो चुकी है और लोग बाघ, तेंदुओं, हाथी, भालू से डरते रह गए। इसकी अपेक्षा जिले में बाघ ने दो लोगों को हमला करके मार डाला।

सर्प दंश की वजह से मरने वाले व्यक्ति के परिवार को चार लाख रुपये मुआवजा राज्य आपदा प्रबंधन कार्यालय की ओर से दिया जाता है। जिले में अब तक नौ लोगों को मुआवजा दिया जा चुका है।

10वें व्यक्ति की मृत्यु छह सितंबर को हुई है। इस बारे में एडीएम वित्त एवं राजस्व प्रसून द्विवेदी ने बताया कि सर्पदंश की वजह से जान गंवाने वाले जिन लोगों की ओर से आवेदन किए जाते हैं, उनको मुआवजा दिलाने की प्रक्रिया तत्काल शुरू करा दी जाती है।

वहीं, वन्यजीवों में बात करें तो बीते 11 फरवरी को पीलीभीत टाइगर रिजर्व की महोफ रेंज में एक 65 वर्षीय महिला का शव मिला, जिस पर बाघ के हमले की आशंका जताई गई थी।

दूसरा मामला मामला 28 अगस्त को पूरनपुर तहसील के शांतिनगर गांव में वृद्ध किसान मुंशी प्रसाद को बाघ ने हमला कर मार डाला। इससे स्पष्ट है कि वन्यजीवों के हमले से पांच गुणा ज्यादा लोगों की मृत्यु सर्पदंश से हुई है।

झाड़फूंक पर भरोसा, जान पर भारी

तराई के जिले में अंधविश्वास की वजह से लोग सांप काटने वाले व्यक्ति को पहले झाड़फूंक करने वाले ओझा के पास ले जाते हैं। तब तक विष पूरे शरीर में फैल जाता है। इसी वजह से कई बार जब मरीज अस्पताल पहुंचता है, तो उसकी हालत खराब हो चुकी होती है। इससे मरीज की मृत्यु हो जाती है।

जिले में मिलते हैं चार प्रजातियों के जहरीले सांप

पीलीभीत टाइगर रिजर्व और जिले के अन्य क्षेत्रों में कोबरा, रसेल वाइपर, धामन, करैत चार प्रजातियों के सांप ही जहरीले हैं। इन सांपों को बिग फोर के नाम से जाना जाता है। बाकी प्रजातियों के सांप बिना जहर वाले हैं। इसके बावजूद बड़ी संख्या में लोगों की मृत्यु सांप काटने की वजह से हो जाती है।

सांप काटने पर इन बातों का रखें ध्यान

  • सांप काटने के बाद घबराएं नहीं, शांत रहें।
  • मरीज को स्थिर रखें और हलचल न करने दें। हलचल होने से जहर शरीर में तेजी से फैलने लगता है।
  • काटे गए अंग को दिल के स्तर से नीचे रखें और उस पर हल्की पट्टी बांध दें।
  • सूजन आने से पहले अंगूठी, घड़ी या तंग कपड़े तुरंत उतार दें।
  • बिना समय गंवाए मरीज को निकटतम सरकारी या बड़े अस्पताल ले जाएं, जहां एंटी-स्नेक वेनम उपलब्ध हो।

 

जिले में एक वर्ष में वन्यजीवों के हमले से मरने वाले लोगों की संख्या दो है। एक हजारा थाना क्षेत्र के शांतिनगर गांव में हुई थी। इसमें बाघ ने वृद्ध का शिकार किया था। यह क्षेत्र जिले में आता है, लेकिन रेंज संपूर्णानगर होने की वजह से वहां की वन विभाग की टीम बाघ को पकड़ने का प्रयास कर रही है।

- भरत कुमार डीके, डीएफओ सामाजिक वानिकी


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